उदयपुर में यूरिया खाद की किल्लत से परेशान किसानों ने अनूठे तरीके से प्रदर्शन किया। किसानों ने खाद की कमी पर ध्यान दिलाने के लिए गधों को माला पहनाकर गुलाब जामुन खिलाए। सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए यह व्यंग्यात्मक प्रदर्शन किया गया। इस दौरान यूरिया खाद को मृत मानते हुए बैग की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी गई। मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के बैनर तले यह विरोध कृषि विभाग कार्यालय के बाहर हुआ। मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के संयोजक विष्णु पटेल ने बताया कि किसानों की खाद की जरूरत के समय कालाबाजारी हो रही है। सरकार द्वारा तय 277 रुपए प्रति बैग के बजाय 450 से 500 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। यह सब अफसरों की श्रेय पर हो रहा है, उन्हें सिर्फ कमीशन का लालच है। पटेल ने बताया कि सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त गोदामों में 100 बैग ही पहुंच रहे हैं, जबकि 150 बैग अन्य जगहों पर भेजकर कालाबाजारी की जा रही है। स्थिति यह है कि कोई किसान सिर्फ 2 बैग ले रहा है, जबकि उसके नाम पर 10 बैग चढ़ाए जा रहे हैं। किसानों के मोबाइल पर मैसेज तक नहीं आ रहे हैं। सह-संयोजक मदनलाल डांगी ने बताया कि अधिकारियों की शह पर खाद की कालाबाजारी हो रही है। अफसरों तक कमीशन पहुंच रहा है और किसान खून के आंसू पीने को मजबूर हैं। सरकार के पास कृषि भूमि, फसल और संभावित उत्पादन की पूरी जानकारी होने के बावजूद हर साल रबी और खरीफ फसलों के समय ऐसी दिक्कत क्यों आती है, यह सवाल बना हुआ है। समिति ने मांग की है कि खाद वितरण के लिए भी राशन वितरण की तर्ज पर समिति बनाकर किसानों को खाद उपलब्ध करवाई जाए। पॉश मशीन से हर खरीदी की स्लिप दी जाए और किसी भी किसान को उसकी कृषि भूमि के आधार पर ही खाद दी जाए। प्रदर्शन के बाद समिति ने कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सुधीर वर्मा को ज्ञापन सौंपा। इससे पहले भी 20 दिन पूर्व समिति के लोग जिला कलेक्टर और एसडीएम को ज्ञापन दे चुके हैं। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सरकार ने इस मामले पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन किया जाएगा।


