उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में नई शिक्षा नीति पर जनप्रतिनिधि की सहभागिता विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन और क्रांफ्रेंस आज से शुरू हुई। इसमें विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में स्टूडेंट्स को यह छूट है कि वे किस-किस विषय पर अध्ययन करें। अपनी डिग्री को कितने समय में पूरा करे। नई नीति केन्द्र सरकार के विकसित भारत के सपने को साकार करने में मददगार साबित होगी। मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के शैक्षणेतर कर्मचारी संघ द्वारा बप्पा रावल सभागार इसका आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में पिछले वर्ष सेवानिवृत्त हुए 37 कर्मचारियों का सम्मान भी किया गया। कार्यवाहक कुलगुरु प्रोफेसर बीपी सारस्वत ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक रिक्त पदों को भरे जाने और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकार से फंड उपलब्ध कराने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने 2026 तक यूनिवर्सिटी में नई शिक्षा नीति के सिद्धांत लागू किए जाने पर जोर डाला। वही मुख्य वक्ता के रूप में राज्यपाल सलाहकार प्रोफेसर कैलाश सोडाणी द्वारा भी नई शिक्षा नीति को विद्यार्थियों के हित में बताते हुए इसके क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। इसी कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में अखिल भारतीय विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष, चरण दास अटवाल ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय कर्मचारी, विद्यार्थी एवं सामाजिक क्षेत्र में सदैव आगे रहेंगे। अखिल भारतीय विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष भरत व्यास ने भी विश्वविद्यालय में घटते हुए कर्मचारियों की संख्या के बारे में चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए कर्मचारियों की संख्या का पर्याप्त होना जरूरी है।


