बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन शाकाहारी वन्य प्राणियों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से घास मैदानों का विस्तार कर रहा है। वर्तमान में रिजर्व में लगभग 9000 हेक्टेयर क्षेत्र में घास मैदान मौजूद हैं। टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्यजीवों के लिए घास अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह उनके भोजन का मुख्य स्रोत है। इसके अतिरिक्त, अनुपयोगी घास पक्षियों के लिए घोंसले बनाने में सहायक होती है, जिससे पारिस्थितिकी संतुलन बना रहता है। घास मैदानों के विस्तार से शाकाहारी वन्य प्राणियों की संख्या में वृद्धि होगी और वे रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकेंगे। यह पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा, क्योंकि उन्हें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के वन्यजीवों को देखने का अवसर मिलेगा। एक्स्ट्रा सैंपल प्लॉट से जोड़े प्रबंधन गुणवत्तापूर्ण घास संग्रहण, प्लांट सैंपलिंग तकनीक, बीज संग्रहण विधियों, सटीक सैंपलिंग, घास संरचना सर्वेक्षण और लैंटाना उन्मूलन के बाद घास पुनर्स्थापना जैसे कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सैंपल प्लॉट भी जोड़े जाएंगे। रिजर्व में उपयोगी और अनुपयोगी दोनों तरह की घास पाई जाती है। समय-समय पर लैंटाना जैसी आक्रामक प्रजातियों के साथ-साथ पलाश, तेंदु, सेमल और लेडिया जैसे वृक्षों को भी हटाना आवश्यक होता है। इससे शाकाहारी वन्यजीवों के लिए उपयोगी घास आसानी से उपलब्ध हो पाती है। अधिकारी-कर्मचारियों को दे रहे प्रशिक्षण बीटीआर के उपसंचालक पीके वर्मा ने बताया कि वन्य प्राणी प्रबंधन एक महत्वपूर्ण कार्य है, जिसमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के वन्यजीवों की आवश्यकताओं के अनुसार काम किया जाता है। शाकाहारी वन्य प्राणियों के लिए जंगल में घास का होना अत्यंत आवश्यक है, और प्रबंधन इस दिशा में लगातार प्रयासरत है। लैंटाना उन्मूलन के बाद नई घास के विकास में मदद मिलती है। इसी को लेकर हमने अधिकारी-कर्मचारियों को भी निर्देश देने के साथ प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।


