उम्मीदों का 2026:सिटी के भीतर के बाद अब आउटर में लगेंगे 168 कैमरे, रफ्तार में गाड़ी चलाई तो होगा ई-चालान

नए साल यानी 2026 में पुलिसिंग में बड़े सुधार किए जाएंगे। पुलिस को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा। किसी भी तरह का क्राइम करने के बाद आरोपियों को पकड़ना आसान होगा। इतना ही नहीं किसी भी तरह के हादसों की भी जानकारी तुरंत मिल सकेगी। शहर में हाईटेक सर्विलांस सिस्टम को मजबूत करने के लिए शहर के आउटर की 57 सड़कों पर 168 से ज्यादा नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। 45 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गाड़ी चलाने पर लोगों के घरों में ई-चालान भेजा जाएगा। नए कैमरे उन सड़कों और गलियों में लगाए गए हैं जो अब तक कैमरों की जद से बाहर थे। यानी शहर का हर चप्पा-चप्पा अब कमरों की जद में होगा। इससे पहले आईटीएमएस के तहत शहर के भीतर 1240 कैमरे लगाए गए हें। अफसरों का दावा है​ इस बार स्पीड वायलेशन डिटेक्शन कैमरा, रांग वे डिटेक्शन कैमरा, नो पार्किंग पर कार्रवाई के लिए फिक्स टाइप कैमरा समेत अलग-अलग तरह के कैमरे लगाएं जाएंगे। इन कैमरों की मॉनिटरिंग पहले की तरह ही आईटीएमएस कंट्रोल रूम से ही होगी। शहर के हर इलाकों में कैमरे लगने के बाद आउटर में भी एनएचएआई 70 से ज्यादा हाईटेक कैमरा लगाने वाली है। यानी शहर ही नहीं अब आउटर भी तीसरी आंख के दायरे में रहेगा। इस तरह राजधानी की हर एक सड़क, मुख्य गलियां और चौक-चौराहे कैमरे की जद में आ जाएंगे। परिवहन और पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार सड़क हादसों को कम करने कैमरे लगवा रही है। इन चौक-चौराहों पर लगेंगे कैमरे
हाई स्पीड पर कार्रवाई करने के लिए शहर के 7 सड़कों पर 58 स्पीड वायलेशन डिटेक्शन कैमरा लगाया जाएगा। इसमें सिर्फ हाई स्पीड पर चलने वाली गाड़ियों पर कार्रवाई होगी। शहर के भीतर 45 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गाड़ी चलाई तो ई-चालान आएगा। एक्सप्रेस-वे में फुंडहर चौक, अमलीडीह के पास, कुशालपुर के पास, भाठागांव के पास, बंजारी मंदिर के पास, रांवाभाठा के पास और वीआईपी रोड फुंडहर के पास कैमरे लगाए जाएंगे। अब ऐसे हो रही शहर की निगरानी
स्मार्ट सिटी ने इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत शहर के भीतर 61 सड़कों पर 1240 हाईटेक कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों से शहर की लगातार निगरानी हो रही है। इन्हीं कैमरों से मिले फुटेज के आधार पर ट्रैफिक पुलिस भी रोज कार्रवाई कर रही है। रोजाना 200 से ज्यादा गाड़ियों को ई-चालान भेजा जा रहा है। इन कैमरों से सड़क हादसों की भी समीक्षा की जाती है। कैमरों के किस रेंज में कितने हादसे हो रहे हैं कैमरों से डेटा लेकर गाड़ियों की संख्या और अन्य चीजों को लेकर विश्लेषण किया जाता है। नवा रायपुर में भी योजना के पहले चरण में 128 नए कैमरे लगाए गए है। 22 जिलों के लिए नवा रायपुर में कंट्रोल रूम
नवा रायपुर में डायल-112 का नया कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। क्योंकि 11 शहरों में यह इमरजेंसी सर्विस चल रही है। इसे 33 जिलों में लागू करना है। अब 22 जिलों के लिए नवा रायपुर में कंट्रोल बनाया जाएगा। वहीं, रायपुर में भी इमरजेंसी गाड़ियों को अपडेट किया जा रहा है। नई गाड़ियां दी जा रही है। ताकि पुलिस का रिस्पांस टाइम सुधरे। पुलिस ने इसके लिए 400 गाड़ियां खरीदी है। सड़क हादसे कम करने थ्री-ई के लिए कैमरे
सड़क हादसे कम करने और निगरानी के लिए केंद्र सरकार हाईटेक कैमरे लगा रही है। यह थ्री ई सिस्टम में काम करेगी। यानी इंफोर्समेंट, ई-चालान और ई-एजुकेशन पर फोकस होगा। – डी. रविशंकर, अतिरिक्त परिवहन आयुक्त इन सड़कों पर लगेंगे नए कैमरे
शास्त्री चौक के आसपास जैसे एचपी पेट्रोल पंप, निर्वाचन कार्यालय, कलेक्टोरेट गार्डन के सामने 2-2 कैमरे लगाए जाएंगे। रेलवे स्टेशन गेट नंबर 1 व 2, तेलीबांधा तालाब के सामने गुरुद्वारा के पास, फूड जोन के सामने, पुलिस बूथ में 2-2 कैमरे, मालवीय रोड चिकनी मंदिर, गोल बाजार थाना के सामने, एमजी रोड मंजू ममता होटल के सामने, जवाहर नगर मोड और पुरानी बस्ती थाना, लोहार चौक के पास 4-4 कैमरे लगाए जाएंगे। पंडरी एलआईसी ऑफिस, लोधीपारा चौक, दलदल सिवनी मोड़, अशोका रतन समेत 41 सड़कों पर फिक्स कैमरे लगाए जाएंगे। ऑनलाइन सिस्टम से राहत
टैक्स-जुर्माना पटाने निगम के नहीं लगाने होंगे चक्कर रायपुर नगर निगम स्मार्ट गवर्नेंस की ओर तेजी से काम करेगा। निगम से किसी भी प्रकार की अनुमति, टैक्स भुगतान के साथ विवाह और जन्म प्रमाणपत्र जैसे कई काम ऑनलाइन हो गए हैं। लेकिन यह शतप्रतिशत नहीं हो रहा है। इसमें बढ़ोतरी के लिए निगम प्रशासन प्रयासरत है। जुर्माना व टैक्स पटाने के लिए निगम या जोन दफ्तर जाने की जरूरत नहीं रहेगी। टैक्स के साथ अब सभी प्रकार के जुर्माने के लिए ई-चालान जनरेट किया जा रहा है। इससे जिम्मेदार के मोबाइल में ही जानकारी पहुंच जाती है और वह ऑनलाइन ही चालान दे सकता है। ई-ऑफिस मॉड्यूल
सरकारी दफ्तरों में डाक सिस्टम बंद, 5-7 दिन तक बचेंगे राज्य सरकार ने अपने सभी सरकारी दफ्तरों में 1 जनवरी से ई-ऑफिस माड्यूल पूरी तरह से लागू कर दिया है। अब विभाग वाले एक-दूसरे को डाक से सूचना देने के बजाय ऑनलाइन ही सूचना देंगे। सरकारी दफ्तरों को मिलने वाली डाक अब पूरी तरह से बंद हो जाएगी। अभी एक विभाग से दूसरे विभाग तक डाक से सूचना देने में कई बार पांच से सात दिन का समय भी लग जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इस नए सिस्टम के लागू होने से लोगों को काफी आसानी होगी। उनके काम समय पर होंगे। मरीजों को राहत… अटल नगर में मेडिसटी, 5000 बेड की होगी सुविधा छत्तीसगढ़ सरकार नवा रायपुर अटल नगर में ‘मेडिसिटी’ परियोजना ला रही है। इससे ना सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवा के नए युग की शुरुआत होगी। सेक्टर 36–37 में 200 एकड़ में विकसित की जा रही मेडिसिटी में 5,000 से अधिक बेड की क्षमता और देश के अग्रणी हेल्थकेयर समूहों की भागीदारी इस परियोजना को देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य शहर के रूप में स्थापित करेगी। मेडिसिटी में मेडिकल यूनिवर्सिटी, नर्सिंग कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित किए जा रहे हैं ताकि डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल पेशेवरों की नई और सक्षम पीढ़ी तैयार हो सके। मेकाहारा में 700 बेड का अस्पताल
अंबेडकर अस्पताल में अब पेट सिटी और गामा मशीन शुरू होरही है। अब कैंसर के मरीजों को बाहर महंगी जांच से छुटकारा मिलेगा। इसके साथ ही यहां अब 700 बिस्तर का मातृ एवं शिशु अस्पताल बनने जा रहा है। ऑफलाइन से मिलेगी राहत
हर प्रमाण-पत्र के लिए अब ऑनलाइन आवेदन ही जरूरी जन्म, मृत्यु, आय, जाति या मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने के लिए अब आवेदन ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएंगे। इस तरह के किसी भी प्रमाण पत्र के लिए ऑफलाइन आवेदन लेना बंद कर दिया गया है। ऑनलाइन आवेदन करने से लोगों के काम जल्द होंगे। इतना ही नहीं एक बार आवेदन करने के बाद उस आवेदन की क्या स्थिति है इसकी ट्रेकिंग भी ऑनलाइन आसानी से घर बैठे ही की जा सकती है। इसका बड़ा फायदा लोगों को हो रहा है। किसी भी प्रमाण पत्र के लिए उन्हें निगम मुख्यालय या तहसीलों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। आईआईटी की तर्ज पर स्किल
11 सीआईटी खुलेंगे, एआई रोबोटिक्स की होगी पढ़ाई नए साल में आईआईटी की तर्ज पर प्रदेश में छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (सीआईटी) खुलने जा रहे हैं। हर लोकसभा क्षेत्र में एक सीआईटी शुरू करने की योजना है। गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज (जीईसी) जगदलपुर को सीजीआईटी बनाया जाएगा। शेष चारों जिलों में पॉलिटेक्निक संस्थानों को ही सीआईटी में अपग्रेड किया जाएगा। इनमें सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल जैसे परंपरागत ब्रांच नहीं होंगे। इसकी जगह रोबोटिक्स, एआई, कंप्यूटर साइंस, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग समेत अन्य नए कोर्स के ब्रांच होंगे।

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