रायपुर शहर में तात्यापारा-फूलचौक चौड़ीकरण 20 साल पुराना प्रोजेक्ट है, जो आज भी सर्वे, सीमांकन और मुआवजे पर अटका हुआ है। हालांकि यह पहली बार है, जब सरकार के निर्देश पर कलेक्टर ने एसडीएम की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने सर्वे पूरा कर रिपोर्ट सौंप कलेक्टर को सौंप दी है। सड़क के दोनों ओर 12.40 मीटर की नापजोख में 111 भू-स्वामी चिह्नित किए गए हैं। इनमें किरायेदार और कुछ विवादित संपत्तियां भी हैं, जिन पर वर्षों से कब्जे हैं। रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा तय होगा, हालांकि इसमें अभी भी कई पेंच हैं। भास्कर पड़ताल में खुलासा हुआ है कि 20 साल पहले (2006-07) अगर अमल होता, तो मुआवजा बांटने और चौड़ीकरण दोनों में 25 करोड़ ही खर्च आता, लेकिन रसूखदारों के मकान, जमीन और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से चौड़ीकरण उलझ गया, जो आज तक अटका हुआ है। जबकि रोड संकरी होने से यहां रोज भारी जाम लगता है। उधर, पूर्व कांग्रेस सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 137 करोड़ रुपए जारी किए थे। लेकिन पीडब्ल्यूडी और निगम के अफसरों का आकलन है कि प्रोजेक्ट 200 करोड़ रुपए के पार जाएगा। इसकी वजह है कलेक्टर गाइडलाइन में जमीन के दाम बढ़ना। मेटेरियल लागत बढ़ना। अब राज्य में भाजपा सरकार है और 15 साल बाद निगम में भाजपा सत्ता में आई। मगर, महापौर मीनल चौबे ने चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को बजट से बाहर रखा है। उनका कहना है कि बजट आवंटित हो चुका है, फिर से इसे बजट में रखने से बजट की लागत बढ़ती। जवाब बाकी: मुआवजा कैसे बांटेगा, चौड़ीकरण निर्माण कैसे होगा: मुआवजा समेत चौड़ीकरण के 137 करोड़ रु. का बजट पीडब्ल्यूडी के पास हैं। जब तक जिला प्रशासन सीमांकन कर, एक-एक भू-स्वामी की रिपोर्ट पीडब्ल्यूडी को नहीं देगा। तब तक मुआवजा राशि जारी नहीं होगी। निर्माण तब शुरू होगा जब 90% जमीन पीडब्ल्यूडी को खाली कर हैंडओवर नहीं होगी। 365 मी. चौड़ा होने पर जीई रोड पर जाम से निजात तस्वीर रायपुर के फूल चौक से तात्यापारा की ओर जाने वाली सड़क की है। इस सड़क के दोनों ओर 12.40-12.40 मीटर चौड़ीकरण होगा। जीई रोड रायपुर स्थित तात्यापारा-फूलचौक रायपुर की सबसे व्यस्त सड़क है। यहां रोज 1 लाख से अधिक वाहन गुजरते हैं। रोज जाम लगता है, क्योंकि यह बॉटल नेक (संकरी) रोड है। हालांकि 365 मीटर चौड़ीकरण से जाम से राहत मिल जाएगी। हर महापौर ने बनाया प्लान, पर समस्या जस की तस
साल 2005 में चौड़ीकरण का प्रस्ताव बना था। उस समय सुनील सोनी (वर्तमान में भाजपा विधायक) महापौर थे। उसके बाद 15 साल तक निगम में कांग्रेस के महापौर रहे। पहले डॉ. किरणमयी नायक, प्रमोद दुबे और फिर एजाज ढेबर। इन सभी ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा। मगर, हर बार मुआवजे पर राज्य सरकार व निगम के बीच सहमति नहीं बनी। क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी सर्वे रिपोर्ट का अध्ययन कर रहा हूं। जो बेहतर विकल्प होगा, उसके आधार पर शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। -गौरव कुमार सिंह, कलेक्टर शासन ने निर्माण राशि जारी की है, बस जमीन का सीमांकन हो जाए तो मुआवजा बांटकर निर्माण शुरू हो। सीमांकन के लिए जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है। उनकी तरफ से जवाब नहीं मिला है। देखिए, निर्माण तो होगा ही क्योंकि राशि स्वीकृत हो चुकी है। -ज्ञानेश्वर कश्यप, मुख्य अभियंता, रायपुर संभाग


