जयपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एक 11 साल के बच्चे की एंडोस्कोपिक से स्पाइन सर्जरी की गई। बच्चा कौडा इक्वाइना सिंड्रोम (CES) से पीड़ित था, जिसके कारण बच्चे के लगातार पीठ में दर्द होने के साथ ही उसको पेशाब करने में भी परेशानी थी। डॉक्टरों का दावा है कि देश में इतने छोटे बच्चे का इस तरह की सर्जरी से इस केस को रिपेयर करने का ये पहला मामला है। गीतांजली हॉस्पिटल में न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट के सहायक प्रोफेसर डॉ. धीरज विश्वकर्मा ने बताया- अलवर के रहने वाले इस 11 साल के बच्चे की पीठ में अचानक दर्द होना शुरू हो गया था। दर्द होने पर परिजन पहले तो बच्चे को आसपास लेकर गए और मालिश करवाना शुरू कर दिया, लेकिन वहां बच्चे को रिलीफ मिलने के बजाय उसकी तकलीफ और बढ़ गई। कुछ समय बाद बच्चे को पेशाब करने और चलने-फिरने में परेशानी होने लगी। अलवर में ही डॉक्टरों को दिखाने के बाद बच्चे की जांचें (एमआरआई, सोनोग्राफी समेत अन्य) करवाने के बाद पता चला कि बच्चा CES के साथ ही लम्बर डिस्क हर्नियेशन का भी शिकार है। 8MM का चीरा लगाकर की सर्जरी डॉ. विश्वकर्मा ने बताया- कि मरीज के परिजन जब हमारे पास पहुंचे तो हमने तमाम जांचें देखने के बाद बच्चे की सर्जरी का निर्णय किया। अमूमन इसके लिए सर्जरी में पीठ का बड़ा हिस्सा खोलकर स्पाइन डिस्क को ठीक किया जाता है, ताकि उसके नीचे दबी नसों को रिलीफ मिल सके। लेकिन इस सर्जरी से बच्चे के लिए भविष्य में दूसरे कॉम्पलीकेशन हो सकते थे। इसलिए हमने बच्चे की मोनोपोर्टल एंडोस्कोपिक डिस्केक्टॉम से सर्जरी का फैसला किया। इसमें बच्चे के 8MM का छोटा चीरा लगाकर एक तार के जरिए इस पूरी सर्जरी काे किया। इसमें बच्चे की रीढ़ की हड्डी को तो सुरक्षित रखा ही उसके दूसरे टिश्यू को भी नुकसान होने से बचाया। 3 फीसदी बच्चों में ही मिलता है ऐसा केस सर्जरी के अगले ही दिन बच्चे को पीठ दर्द से राहत मिली और चलने-फिरने भी लग गया। इसके साथ ही एक-दो दिन में उसकी पेशाब की समस्या भी दूर हो गई। डॉक्टर ने बताया- लम्बर डिस्क हर्नियेशन के साथ CES का केस छोटे बच्चों में अक्सर बेहद दुर्लभ माना जाता है। इस तरह के केस पूरी दुनिया में 3 फीसदी से भी कम बच्चों में देखने को मिलते हैं।


