आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ काम आसान नहीं कर रहा, बल्कि नियमों को चकमा देने का जरिया भी बनता जा रहा है। जयपुर रेल मार्ग पर ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आय है, जहां एआई टूल की मदद से तैयार किया गया फर्जी रेलवे टिकट पकड़ में आया। इस घटना ने रेलवे की टिकट जांच प्रणाली को और सतर्क कर दिया है, वहीं यात्रियों के लिए भी यह बड़ा अलर्ट है। रेल प्रशासन ने टिकट चेकिंग स्टाफ को निर्देश दिए हैं कि हर 100 यात्रियों में कम से कम 10 टिकट गहनता से चेक किए जाएं। जिससे पता लगाया जा सके कि कहीं यात्री एआई टूल से बने फर्जी टिकट लेकर सफर तो नहीं कर रहें। इस तरह के निर्देश मिलने के बाद ग्वालियर रेलवे स्टेशन में चेकिंग बढ़ा दी गई है। दरअसल, हाल ही में जयपुर में हेड टीसी ने कुछ स्टूडेंट्स को रोका। ऐसे स्टूडेंट मोबाइल में टिकट दिखाकर यात्रा करने की कोशिश कर रहे थे। पहली नजर में टिकट पूरी तरह असली लग रहा था। उसमें क्यूआर कोड, यात्रा विवरण, तारीख, रूट और राशि तक दर्ज थी। लेकिन जब टिकट की गहराई से जांच की गई तो सच सामने आ गया। जांच में पता चला कि यह टिकट एआई टूल जेमिनी की मदद से तैयार किया गया फेक टिकट था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि छात्रों ने केवल एक व्यक्ति का अनारक्षित टिकट खरीदा था। इसके बाद एआई के जरिए उसी टिकट में सात यात्रियों की एंट्री जोड़ दी गई। यह हैं नियम विंडो टिकट भौतिक रूप में ही मान्य होगा रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यूटीएस ऐप, एटीवीएम या काउंटर से जारी अनारक्षित टिकट (एम-टिकट और ई-टिकट को छोड़कर) यात्री के पास भौतिक रूप में होना अनिवार्य है। केवल मोबाइल स्क्रीन पर दिखाया गया ऐसा टिकट मान्य नहीं किया जाएगा। इस संबंध में झांसी मंडल के पीआरओ मनोज कुमार सिंह का कहना है कि टिकट फर्जी न हो इसके लिए क्यूआर कोड को स्कैन कर जांचने के लिए कहा गया है।


