एकलव्य आवासीय विद्यालय जबलपुर रामपुर में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने प्राचार्य के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए क्लास का बहिष्कार किया और बिना बताए कलेक्टर से मिलने पैदल ही निकल पड़े। करीब दो किलोमीटर दूर जैसे ही स्थानीय लोगों की नजर छात्रों पर पड़ी तो तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर गोरखपुर थाने का स्टाफ मौके पर पहुंचा और छात्रों से वजह पूछी, पर नाराज छात्र-छात्राओं ने उनकी बातें अनसुनी करते हुए आगे के लिए रवाना हो गए। जानकारी कलेक्टर तक पहुंची तो उन्होंने जिला पंचायत सीईओ को मौके पर भेजकर बात सुनकर कार्रवाई के निर्देश दिए। स्कूली छात्र-छात्राओं की शिकायत को गंभीरता से लिए कार्रवाई की बात कही है। अधिकारियों की समझाइश पर बच्चें वापस छात्रावास के लिए रवाना हो गए। इधर छात्रों के विरोध के पहले ही प्राचार्या अविनाश रानी छुट्टी पर चली गई। दरअसल एकलव्य आवासीय छात्रावास में साढ़े चार से छात्र-छात्राएं रहते हैं। आरोप हैं कि अधीक्षक और प्राचार्य न सिर्फ उनसे अभद्रता करती है, बल्कि जातिसूचक शब्द भी कहते हैं। कई बार टीचर की बातों को इग्नोर किया गया, लेकिन जब बात हद से बढ़ गई तो अधिकारियों से भी कहा गया। आखिरकार किसी ने बात नहीं सुनी तो सोमवार की दोपहर को सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने छात्रावास का ताला तोड़कर कलेक्टर कार्यालय की और कूच कर दिया। छात्राओं का कहना है कि जब तक प्राचार्य को हटाया नहीं जाता है, तब तक छात्र इसी तरह से प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि जब कभी परिजन मिलने आते हैं, तो उनसे भी अभद्रता करती हैं। स्कूल में प्यून और अन्य कर्मचारी होने के बाद भी हमसे बाथरूम, नाली साफ करवाई जाती है। हास्टल में डस्टिंग का काम भी हम लोग ही करते हैं। छात्राओं ने कहा कि जो भी छात्र-छात्राएं प्राचार्य की बता नहीं मानते हैं, उनके साथ मारपीट की जाती है। बार-बार शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो छात्रावास का ताला तोड़ा और कलेक्टर से मिलने रवाना हो गए। महिला प्राचार्य अविनाश रानी के खिलाफ हाय-हाय के नारे लगाते हुए सड़क पर जमकर प्रदर्शन किया। छात्र अनिल बैगा का कहना है कि जब परिवार वाले मिलने आते हैं, तो उनसे भी अभद्रता करती हैं। छात्र ने बताया कि इससे पहले गीता साहू प्राचार्य थीं, वह भी इसी तरह की हरकत करती थीं। प्रशासन ने गीता साहू को हटाने की वजह अविनाश रानी को पदस्थ कर दिया। मुस्कान ने बताया कि आमतौर पर एक स्कूल में एक प्राचार्य होती है, लेकिन एकलव्य छात्रावास में दो सप्ताह पहले एक और प्रिंसिपल को पदस्थ कर दिया गया। दोनों ही प्रिंसिपल अलग-अलग निर्देश देते हैं। ऐसे में छात्राओं के बीच समस्या यह आ रही है कि दोनों में से किसकी बात माने। छात्राओं का कहना है कि दोनों प्राचार्या रसूख जमाने के लिए टीचरों तक पर पाबंदी लगाती हैं। कलेक्टर को जैसे ही जानकारी लगी कि सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं हास्टल से बाहर निकलकर कलेक्टर कार्यालय तरफ आ रहे हैं। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की पर जब वह नहीं माने तो जिला पंचायत सीईओ को छात्रों से मिलने भेजा गया। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने भी माना कि छात्राओं की शिकायत मिली है, जिसका समाधान करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में छात्रावास में अविनाश रानी को भेजा गया है, उनके व्यवहार को लेकर छात्र-छात्राओं ने अपत्ति जताई है। शिकायत में बताया गया है कि परिजनों से गलत बाते कही जाती है, सभी बातें नोट की गई हैं। छात्रावास में दो प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि हाल ही में भारत सरकार के नियम आए हैं, जिसमें वो छात्रावास जहां पर कि बच्चों की संख्या अधिक है, उसमें एक राज्य सरकार और एक केंद्र सरकार के प्रिंसिपल होगे। इसी के तहत दो प्राचार्य नियुक्त की गई हैं। जल्द से जल्द समाधान निकाला जाएगा। ये खबर भी पढ़ें… बैतूल में कलेक्टर से मिलने पैदल निकले हॉस्टल के छात्र बैतूल जिले के शाहपुर स्थित एकलव्य छात्रावास में अव्यवस्थाओं से परेशान छात्र बुधवार को बैतूल कलेक्टर से शिकायत करने के लिए पैदल ही निकल पड़े। लगभग 36 किलोमीटर लंबी दूरी तय करने का इरादा लेकर निकले छात्रों के बरेठा घाट तक पहुंचने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। पुलिस और प्रशासन ने बच्चों को रास्ते में रोककर समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद स्थिति गंभीर होती देख कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी खुद शाहपुर पहुंचे और बच्चों से सीधे संवाद किया।पूरी खबर पढ़ें


