शरीर को बैक्टीरियल एंटीबायोटिक की दवाएं काफी नुकसान पहुंचाती है। ये दवाएं आपके शरीर में खराब बैक्टेरियल के साथ-साथ कुछ अच्छे बैक्टेरियल को भी नष्ट कर देती हैं। इसके अलावा लगातार किसी एंटीबायोटिक का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए। इन सब चीजों को देखते हुए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेस विभाग ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग की एमफॉर्मा की छात्रा ने ऐसा जेल तैयार किया है जोकि एक्जिमा मर्ज के लिए रामबाण साबित होगी। एजिथ्रोमाइसिन दवा का निकाला तोड़ स्कूल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेस विभाग की छात्रा मनीषा त्रिवेदी ने विभाग की प्रोफेसर डॉ. अनुप्रिया कपूर के नेतृत्व में एजिथ्रोमाइसिन दवा का तोड़ निकाला है। डॉ. अनुप्रिया ने बताया कि जो दवा हम खाते है वो पूरे शरीर को प्रभावित करती है। लेकिन यहां पर हमने एजिथ्रोमाइसिन लिया। इसके बाद उसमें नियोजोम का फार्मुला डवलप किया। फिर उसके अलग-अलग टेस्ट कराए, जो सबसे अच्छा आया उसको लेकर कार्बोपोल के साथ मिलाकर जेल बनाया। इसके फिर सभी को अलग-अलग पैरामीटर में चेक किया। ये प्रोसेस पूरा होने के बाद एंटीबैक्टेरियल स्टडीज और एंविट्रो स्टडीज को भी किया, जोकि काफी कारगर साबित हुआ है। ऊपर से हाथ में जेल लगा सकते हैं डॉ. कपूर ने बताया कि इस जेल को आप स्किन में ऊपर से लगा सकते है। ये टेबलेट से ज्यादा प्रभावित होती है, जिस तरह से टेबलेट आपके स्किन के लिए कारगार साबित होती है वैसे ही जेल के माध्यम से दवा आपके शरीर में जाएगी। फर्क इतना है कि जेल जिस जगह पर लगाते है बस उसी जगह तक एंटीबायोटिक काम करती है। इसके अलावा ये शरीर के किसी अन्य को प्रभावित नहीं करती हैं। एक साल तक चली रिसर्च इस जेल को बनाने में मनीषा त्रिवेदी को पूरे एक साल का समय लगा है। अब ये पूरी तरह से तैयार हो चुका है। लैब में इसका सफल परीक्षण भी हो चुका है। अब ये रिसर्च इंटरनेशनल पेपर में पब्लिश भी होने वाली है। स्कोपस इंडेक्स जनरल ने इस एक्सेपट भी कर लिया है। पेटेंट कराने के बाद मार्केट में लाएंगे डॉ. कपूर ने बताया कि इसको पेटेंट कराने के लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी है, जैसे ही पेटेंट हो जाएगा तो हम लोग किसी भी कंपनी के साथ मिलकर इसे मार्केट में लाएंगे। ये प्रक्रिया भी जल्द ही पूरी कर ली जाएगी।


