मंत्री ने कांग्रेस पर दुर्भावनावश वीडियो वायरल करने का लगाया आरोप साय कैबिनेट में नए मंत्री बनाए गए गुरु खुशवंत साहेब का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह साउथ की एक फिल्म के डायलाग के साथ रील बनाते हुए दिख रहे हैं। इस वीडियो को कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर पोस्ट कर तंज कसते हुए लिखा है कि ‘भाजपा के नए मंत्री की तरफ से पुराने मंत्रियों को प्यार भरा संदेश’। सोशल मीडिया पर वीडियो पर कई कमेंट आए। बता दें कि एक दिन पहले बुधवार को ही गुरु खुशवंत ने मंत्री पद की शपथ ली थी। मंत्री गुरु खुशवंत ने इसे कांग्रेस की ओछी हरकत बताते हुए कहा कि वीडियो 5 साल पुराना है। दरअसल खुशवंत साहेब इस रील में कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि पॉवर कुर्सी में नहीं, उस पर बैठने वाले में होती है और जो कुर्सी में बैठा है वो पूरा पावर हाउस है। फिल्मी डॉयलाग के साथ यह वीडियो छत्तीसगढ़ की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। वीडियो में मूछों पर ताव देते हुए दिखाई दे रहे हैं खुशवंत जो वीडियो वायरल हुआ है उसमें गुरु खुशवंत साहेब अपनी मूछों पर ताव देते हुए साउथ फिल्म का डायलॉग बोलते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस के तंज के बाद मंत्री ने कहा कि वीडियो पांच साल पुराना है। दुर्भावनावश कांग्रेस नेताओं ने इस वीडियो को शपथ ग्रहण समारोह के दिन वायरल किया है। कांग्रेस ने पांच साल तक सतनामी समाज का अपमान किया है। बीजेपी अब समाज को इज्जत दे रही है। समाज को पद दिया जा रहा है और समाजहित में काम हो रहा है, तो कांग्रेस नेताओं से ये बर्दाश्त नहीं हाे रहा है। कांग्रेस नेता पुराने वीडियो में राजनीति ढूंढने की कोशिश कर रहे है। इधर, स्कूटी से मंदिर पहुंचे मंत्री राजेश अग्रवाल मंत्री बनने के अगले ही दिन ही राजेश अग्रवाल बिना किसी सुरक्षा के अपनी स्कूटी से ही निकल पड़े। अग्रवाल लखनपुर स्थित अपने घर से एक किलोमीटर दूर प्राचीन शिव मंदिर पहुंचे जहां उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना की और फिर स्कूटी से ही वापस लौटे। रास्ते में वे लोगों का अभिवादन करते भी नजर आए। अग्रवाल ने कहा कि वे पार्टी के एक छोटे कार्यकर्ता हैं और संगठन जो जिम्मेदारी देगा, उसे पूरी मेहनत से निभाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनाया जाए और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी उसी दिशा में काम कर रहे हैं। ये मेरा रूटीन है। मैं रोज मंदिर स्कूटी से ही जाता है और आगे भी जारी रहेगा। गांव में प्रोटोकॉल की जरूरत नहीं है।


