एक लाख नौकरियां, हर हफ्ते परीक्षा की घोषणा की तैयारी:इंडस्ट्री-पानी-बिजली क्षेत्र में बड़े ऐलान संभव, कंपनियों में राजस्थानियों को नौकरी का कोटा

राजस्थान की भजनलाल सरकार फरवरी माह में अपने कार्यकाल का दूसरा बजट पेश करेगी। फाइनेंशियल एक्सपर्ट का अनुमान है कि यह अबतक का सबसे बड़ा बजट हो सकता है। आमतौर पर हर बार बजट 10-11 फीसदी बड़ा होता है, लेकिन इस बार बजट में कम से कम 20% बढ़ोतरी की जा सकती है। राइजिंग राजस्थान समिट के दौरान हुए 35 लाख करोड़ के एमओयू से अनुमान लगाया जा रहा है कि बजट में इंडस्ट्रीज के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं हो सकती हैं। दूसरी बड़ी घोषणा एक लाख से ज्यादा नौकरियों की हो सकती है। तबादला नीति की डेडलाइन तय करने के साथ-साथ पानी से जुड़ी योजनाओं, सस्ती बिजली को लेकर भी बड़े निर्णय सामने आ सकते हैं। भजनलाल सरकार इस बार अपने बजट (2025-26) में किस पर फोकस करेगी, मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए… बजट साइज करीब 1 लाख करोड़ बढ़ने की उम्मीद
राज्य सरकार ने अपना पिछला बजट करीब 3.35 लाख करोड़ रुपए का पेश किया था। आगामी 2025-26 बजट निश्चित रूप से पिछले बजटों से बड़ा होने का अनुमान है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट और राजस्थान यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर एसएस सोमरा के अनुसार, खुद सरकार ने अर्थव्यवस्था को 2030 तक .35 ट्रिलियन डॉलर का बनाने का संकल्प लिया है। पिछले कुछ वर्षों का ट्रेंड देखें तो बजट में हर साल 10 से 11 फीसदी बढ़ोतरी होती रही है। लेकिन अभी आने वाला बजट 20 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है, जो लगभग 4 लाख करोड़ तक का हो सकता है। 2024-25 में 3.35 लाख करोड़ का था। हालांकि उधार के रीपेमेंट की लायबिलिटी को शामिल करें तो वह भी 31-32 फीसदी है। ऐसे में बजट का साइज बड़ा होगा। पेपर लीक नहीं होने देने का क्रेडिट लेगी सरकार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने पिछले पूर्ण बजट को पेश करते हुए इस कार्यकाल में 4 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियों सहित 10 लाख युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी। सरकार ने हाल ही में अपना एक साल पूरा होने का जश्न भी मनाया था। जानकारी के अनुसार, भजनलाल सरकार ने अपने पहले साल के दौरान करीब 50 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं। अब बजट 2025-26 में सीएम 1 से सवा लाख तक सरकारी भर्तियों की घोषणा कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, CMO के निर्देश पर RPSC, कर्मचारी चयन बोर्ड और सभी सरकारी विभाग 2 लाख भर्तियों को फोकस करते हुए खाली पड़े पदों की लिस्ट बनाई जा रही है। राज्य सरकार लगभग हर हफ्ते भर्ती परीक्षाएं करवाएगी। वर्तमान में RPSC और कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से अलग-अलग विभागों की करीब 50 भर्तियों के लिए विज्ञापन जारी हो चुके हैं, जिनका प्रोसेस चल रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले 6 महीनों के भीतर करीब 50 हजार युवाओं को सरकारी नियुक्तियां दे दी जाएं। राज्य सरकार अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में 4 लाख में से करीब 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां देने के आंकड़े को छूना चाहती है। इसके बाद वादे के अनुसार सरकार के बचे 3.5 साल के कार्यकाल में 2.5 लाख सरकारी भर्तियां करने का टारगेट रहेगा। ऐसे में सरकार भर्ती प्रक्रिया को और तेज करेगी। बजट में ये सरकार पिछले एक साल में कोई भी पेपर लीक नहीं होने देने का क्रेडिट लेते हुए भविष्य में भी यही साख बनाए रखने का दावा करेगी। राइजिंग राजस्थान समिट में हुए MoU
राज्य सरकार राइजिंग राजस्थान ग्लोबल समिट- 2024 में निवेशकों के साथ 35 लाख करोड़ के एमओयू को लेकर काफी उत्साहित है। कई विधायकों की ओर से कई बार मांग उठाई जाती रही है कि निवेशकों को स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए पाबंद किया जाए। अनुमान है राज्य सरकार निवेशकों को दी जाने वाली रियायतों को और बढ़ाते हुए बड़ी घोषणाएं कर स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, इस मामले पर सरकार, ब्यूरोक्रेसी और निवेशकों के मत अलग-अलग हैं। सरकार अतिरिक्त रियायतों को जोड़कर नए स्थापित होने वाले उद्योगों में स्थानीय लोगों को रोजगार देने का कुछ प्रतिशत कोटा निर्धारित कर सकती है। मुफ्त बिजली : कंपनियों का घाटा, सोलर से दिख रही राह
बजट में राज्य सरकार बिजली कंपनियों के हजारों करोड़ रुपए के घाटे का जिक्र जरूर कर सकती है। पिछली गहलोत सरकार की फ्री बिजली योजना के बाद यह घाटा और तेजी से बढ़ रहा है। इस कारण राजस्थान में बिजली की दरें भी कम नहीं हो पा रही हैं और महंगी बिजली का मुद्दा भी लगातार बना हुआ है। वहीं, किसानों को भी दिन में पर्याप्त बिजली देना चुनौती बना हुआ है। किसानों की पिछली सरकारों में भी यही मांग रही है कि रात की बजाय दिन में पर्याप्त बिजली मिले। राज्य सरकार ने ग्लोबल समिट में करीब 20 फीसदी एमओयू एनर्जी के क्षेत्र में किए हैं। बजट में घाटे की चुनौती को दूर करने के लिए सोलर एनर्जी की ओर झुकाव दिखाई देगा। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने भी कहा है कि राजस्थान को हम सोलर एनर्जी का हब बनाने जा रहे हैं। इससे न सिर्फ राजस्थान की जनता को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध होगी, बल्कि दूसरे राज्यों को बिजली बेचकर डिस्कॉम को घाटे से उबारा जाएगा। केंद्र सरकार की सौर ऊर्जा से जुड़ी योजनाओं के साथ मिलकर राज्य सरकार किसानों को पर्याप्त बिजली देना चाह रही है। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना : ऑर्गन ट्रांस्प्लांट का मुफ्त इलाज करने की तैयारी
कांग्रेस की पिछली गहलोत सरकार में सबसे चर्चित और प्रमुख ‘चिरंजीवी योजना’ का नाम मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना कर दिया गया था। तब सवाल उठे थे कि सरकार केंद्र की आयुष्मान योजना की तर्ज पर इस योजना का लाभ घटा देगी। लेकिन पहले बजट में डे-केयर पैकेज को शामिल करते हुए इसका दायरा बढ़ा दिया था। सूत्रों के मुताबिक, इस बार बजट में इस योजना का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। इसके तहत महंगे इलाज वाली बीमारियों जैसे- ऑर्गन ट्रांसप्लांट का खर्च भी योजना में कवर करने की तैयारी है। पानी से जुड़ी बड़ी योजनाओं पर फोकस : ईआरसीपी के प्रावधान पर नजर
बजट में पानी से जुड़ी योजनाओं पर घोषणा के आसार हैं। कांग्रेस लगातार ईआरसीपी को लेकर निशाना साधती रहती है। इस बजट में 21 जिलों के 3.25 करोड़ लोगों से जुड़े ईस्टर्न रीजन कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) के प्रावधानों को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में ईआरसीपी सबसे प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में से एक रहा है, जिसकी गूंज अब तक सुनाई दे रही है। पेयजल के अलावा इस प्रोजेक्ट के जरिए 2.5 लाख हेक्टेयर नया क्षेत्र नहर के जरिए सिंचाई से जुड़ेगा और 1.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी मिलेगा। केंद्र सरकार के साथ राजस्थान, एमपी और हरियाणा में भी बीजेपी सरकार होने का फायदा मिलेगा। जानकारी के अनुसार एमपी से जुड़े जल विवाद कोर्ट और राज्य सरकारों के स्तर पर सुलझ गए हैं। एमपी जैसी ही स्थिति हरियाणा सरकार के साथ बनी हुई है। जल विवाद से सुलझने से पड़ोसी राज्यों से वाजिब मात्रा में पानी मिल सकेगा, जो पहले के मुकाबले लाखों क्यूसेक ज्यादा होगा। एमपी की पार्वती, कालीसिंध और चंबल नदियों से राजस्थान की नहरों को पानी मिल सकेगा। 70 हजार करोड़ रुपए की लागत से तैयार होने वाली नहर परियोजना के प्रावधान इस बजट में देखने को मिल सकते हैं। राजस्थान में तबादला नीति को लेकर डेडलाइन का इंतजार
पिछली कई सरकारों के जैसे वर्तमान सरकार भी एक सार्थक तबादला नीति बनाने का दावा कर चुकी है। लेकिन विधायकों के दबाव के कारण इस मामले में सभी सरकारों ने आगे कदम नहीं बढ़ाए। तबादलों को लेकर हर सरकार तबादला उद्योग के नाम से बदनाम होती रही है। सीएम भजनलाल ने हाल ही में विधायकों को कहा कि तबादलों की सिफारिश सोच समझकर करना, क्योंकि दो साल तक कर्मचारी को हटाया नहीं जाएगा। इससे संकेत लगाए जा रहे हैं कि इस बजट में तबादला नीति को लेकर राज्य सरकार कोई डेडलाइन तय कर सकती है। इससे सरकार की छवि भी साफ बनेगी और तबादलों को लेकर सरकारी कामों की गति में आने वाली रुकावटों को भी दूर किया जा सकेगा। बजट में होगा महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल के भविष्य का खुलासा
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सरकार बनते ही अंग्रेजी मीडियम स्कूलों को बंद करने के संकेत दिए थे। लेकिन, कांग्रेस का विरोध देख कर बीजेपी ने सीधे तौर पर बंद करने के बजाय समीक्षा करने के लिए बयान दिए। अब सरकार ने गहलोत राज में खुले 3741 महात्मा गांधी अंग्रेजी मीडियम स्कूलों का रिव्यू करने के लिए डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में एक कैबिनेट सब कमेटी बनाई है। कमेटी में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी मेंबर हैं। सूत्रों के अनुसार, बजट में इस रिव्यू कमेटी का जिक्र करते हुए महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल को लेकर सरकार अपनी मंशा का खुलासा कर सकती है। सरकार बजट में कह सकती है कि इन स्कूलों को बंद करने की कोई मंशा नहीं है। बल्कि, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए कमजोर इन्फ्रास्ट्रक्चर या कम बच्चे वाले स्कूलों को ही बंद किया जाएगा। इसके जरिए सरकार विधानसभा में होने वाले हंगामे से भी बचाव हो सकेगा। क्या घटेंगे पेट्रोल-डीजल के रेट?
दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद पेट्रोल डीजल पर 2 फीसदी वैट घटाया था, जिससे करीब 4 रुपए प्रति लीटर तक की राहत मिल गई थी। इससे पहले राजस्थान में पेट्रोल 112 रुपए लीटर तक मिल रहा था। वैट कम करने से जनता को राहत मिली थी। क्या दोबारा से राहत मिल सकती है? सियासी जानकारों के अनुसार पेट्रोल-डीजल, एलपीजी सिलेंडरों के दाम घटाने जैसे निर्णय तभी लिए जाते हैं जब आस-पास कोई चुनाव हो। यदि कोई बहुत बड़ी घटना न हो जाए, तो राजस्थान में अब बड़े चुनाव साढ़े तीन साल बाद होने हैं। ऐसे में वैट की दरों को कम करने का कोई फैसला अंतिम बजट में भले ही हो पाए। इस बजट से पेट्रोल डीजल की दरों में राहत मिलने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। राजस्थान में अब भी पेट्रोल पर वैट करीब 29 फीसदी है। एक्सपर्ट बोले- केंद्र और पड़ोसी राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार का फायदा उठाना चाहिए
राजस्थान का बजट साइज इस बार 20 परसेंट तक बढ़ा हुआ दिखाई दे सकता है। केंद्र और पड़ोसी राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार होने का फायदा राजस्थान को उठाना चाहिए। निवेशकों को माहौल देना चाहिए, जिससे सबमिट में हुए MOU साकार हो सकें। खनन क्षेत्र राजस्थान की तस्वीर बदल सकता है। इस पर बहुत फोकस किया जाना चाहिए। रिफाइनरी प्रोजेक्ट को फटाफट कंप्लीट करना चाहिए।

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