भास्कर न्यूज|लोहरदगा समाहरणालय सभाकक्ष में उपायुक्त संदीप कुमार मीना की अध्यक्षता में बुधवार को जिला विकास समन्वय समिति की बैठक हुई। जिसमें विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के अभाव में लंबित योजनाओं की समीक्षा करते हुए उनके त्वरित निष्पादन के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए। डीसी ने परियोजना पदाधिकारी को मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत चयनित लाभुकों के लिए पशुधन शेड का निर्माण शीघ्र सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। विद्युत प्रमंडल को लेबर सेस जमा करने का निर्देश दिया गया। जिला सांख्यिकी कार्यालय द्वारा मांगे गए आवश्यक आंकड़े संबंधित विभागों को समय पर उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया। पथ विभाग अंतर्गत नदिया-लोहरदगा से इरगांव वाया अरकोसा से भंडरा पथ निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि के रैयतों को शीघ्र मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। वहीं, जेएसएलपीएस के मल्टीपर्पस सेंटर निर्माण के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अंचल अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। मौके पर डीडीसी राज महेश्वरम, परियोजना निदेशक (आईटीडीए) सुषमा नीलम सोरेंग, अपर समाहर्ता जितेंद्र मुंडा, सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सभी अंचल अधिकारी, सभी प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। उपायुक्त ने जिले के विभिन्न विद्यालयों के जर्जर भवनों को ध्वस्त किए जाने के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) की समीक्षा की तथा शेष विद्यालयों के लिए भी शीघ्र एनओसी जारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जिले के किसी भी विद्यालय में जर्जर भवन में पठन-पाठन का कार्य नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उपायुक्त ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्र प्रायोजित पेंशन योजनाओं के सभी लाभुकों का डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट एक सप्ताह के भीतर तैयार कर सामाजिक सुरक्षा निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग, लोहरदगा को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। साथ ही राज्य एवं केंद्र प्रायोजित पेंशन योजनाओं के लाभुकों के आधार की मैपिंग का कार्य भी शीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि सभी प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय परिसरों में नियमित रूप से जनता दरबार आयोजित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि आम नागरिकों की समस्याओं का अधिकतम समाधान प्रखंड एवं अंचल स्तर पर ही सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को जिला मुख्यालय का अनावश्यक चक्कर न लगाना पड़े।


