गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में महीने के आखिरी दिन करीब 15 अलग-अलग जगहों पर भीषण आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। मरवाही वनमंडल के जंगल में लगी आग अभी तक जारी है। पेंड्रा वन परिक्षेत्र के जमड़ी खुर्द के औषधीय प्लांट में भीषण आग लगी। गौरेला के ज्वालेश्वर और तवाड़बरा, खोडरी के कोटमी खुर्द, आमगांव, बरिहा डांड़ में भी आग की घटनाएं हुईं। मरवाही के मटिया डांड़ और मरवाही क्षेत्र में भी आग ने तबाही मचाई। इन घटनाओं से बड़े क्षेत्रफल में नुकसान हुआ है। आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन नहीं होने से आग को समय पर काबू नहीं किया जाता जिससे खतरा बना रहता है। सूखी पत्तियां और टहनियां से फैलती है आग तेज गर्मी के कारण जंगलों में दावानल का खतरा पहले से ही बढ़ा हुआ है। इसके अलावा वनोपज बीनने वाले लोगों द्वारा महुआ, चार और भेलवा जैसे पेड़ों के नीचे सफाई के दौरान आग लगाने से स्थिति और गंभीर हो रही है। साल और सागौन के जंगलों में सूखी पत्तियां और टहनियां होने से एक चिंगारी पूरे जंगल में आग का रूप ले लेती है। आग बुझाने के सीमित संसाधन वन विभाग बैनर, पोस्टर और दीवार लेखन के माध्यम से जागरूकता फैला रहा है। लेकिन आग लगने की सूचना विभाग तक समय पर नहीं पहुंच पाती। मौके पर वन विभाग के कर्मचारियों की पहुंच देर से होती है। वहां भी सिर्फ चौकीदार और फायरवाचर्स ही सीमित संसाधनों के साथ पहुंचते हैं।


