हनुमानगढ़ के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर शनिवार को सोशल मीडिया पर दिनभर यह चर्चा रही कि इसका काम बंद हो गया है और इसे मध्य प्रदेश में स्थानांतरित किया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन और ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधन ने इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। आंदोलन से जुड़े माकपा नेता मंगेज चौधरी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए फैक्ट्री का काम बंद होने का दावा किया था। इसके बाद क्षेत्र में अटकलें तेज हो गईं। ड्यून एथेनॉल के कर्मचारियों और प्रबंधन ने भी फिलहाल ऐसी किसी जानकारी से इनकार किया है। वहीं, आंदोलन से जुड़े किसान नेताओं का कहना है कि फैक्ट्री को किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित करने को लेकर अंदरूनी स्तर पर चर्चा चल रही है और इससे जुड़े दस्तावेज जल्द सामने आ सकते हैं। यह फैक्ट्री टिब्बी के पास राठीखेड़ा गांव में ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बनाई जा रही है, जिसका किसान संभावित वायु और जल प्रदूषण को लेकर लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 10 दिसंबर को टिब्बी में हुई किसान महापंचायत के दौरान किसानों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। इस घटना के बाद यह मामला राज्य और देशभर में चर्चा में आ गया। इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस के नेता आमने-सामने आ गए। भाजपा ने फैक्ट्री के एमओयू को कांग्रेस शासनकाल की देन बताया, जबकि कांग्रेस ने फैक्ट्री बंद कराने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। इसके बाद 17 दिसंबर को हनुमानगढ़ में एक और किसान महापंचायत हुई, जिसमें राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढ़ूनी और जोगिंदर सिंह उग्राहां जैसे बड़े किसान नेताओं ने भाग लिया। प्रशासन ने संभावित प्रदूषण की जांच के लिए समिति गठित करने और किसानों पर दर्ज मुकदमों की जांच सीआईडी-सीबी से कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने फैक्ट्री को लेकर अंतिम निर्णय के लिए 20 दिन का अल्टीमेटम देते हुए 7 जनवरी को संगरिया में अगली महापंचायत का ऐलान किया है। जनसंपर्क अधिकारी राजपाल चौधरी ने लोगों से अपील की है कि आधिकारिक सूचना जारी होने तक सोशल मीडिया पर चल रही खबरों पर भरोसा न किया जाए।


