एनएच-11 मुआवजा विवाद:किसानों ने केंद्रीय मंत्री गडकरी को भेजा ज्ञापन, ‘मनमानी’ डीएलसी दरों से भारी नुकसान का आरोप, कलेक्टर को सौंप ज्ञापन

झुंझुनूं जिले के दुर्जनपुरा आबूसर का बास के किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-11 (NH-11) के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा प्रकरण में अनियमितताओं को लेकर विरोध जताया है। किसानों ने मंगलवार को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के नाम कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर उन्हें न्याय दिलाने की मांग की गई है। किसानों का आरोप है कि हाईवे अथॉरिटी और राजस्व विभाग ने मनमाने तरीके से डीएलसी (District Level Committee) दरें लागू की हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। चार प्रकार की डीएलसी दरें लागू, पीडब्ल्यूडी पर ‘मनमानी’ का आरोप किसानों का मुख्य आरोप है कि ग्राम दुर्जनपुर आबूसर का बास में अधिग्रहित की गई लगभग 12 बीघा भूमि का मुआवजा निर्धारण करते समय बड़ी अनियमितता बरती गई है। किसानों के अनुसार, हाईवे अथॉरिटी और राजस्व विभाग ने इस भूमि के लिए चार प्रकार की अलग-अलग डीएलसी दरों के आधार पर मुआवजा दिया है। वहीं, किसानों का गंभीर आरोप है कि पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) विभाग ने मनमाने तरीके से सामान्य डीएलसी दर लागू कर दी। किसानों का कहना है कि यह मनमानी कार्रवाई स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है और इसी कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। संदीप कुमार ने बताया कि हमें चार प्रकार की डीएलसी दरों पर मुआवजा दिया गया है, जबकि पीडब्ल्यूडी ने सामान्य दर लागू करके हमें नुकसान पहुंचाया है। यह अन्याय है और हम केंद्रीय मंत्री से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। रूट बदलने से उपजाऊ भूमि प्रभावित होने का दावा मुआवजे के अलावा, किसानों ने हाईवे के अलाइनमेंट (रूट) में बदलाव को लेकर भी स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा जारी आउट प्लान के अनुसार, रेंज 43-600 से 44-300 तक बिना किसी घुमाव के सीधा हाईवे निर्माण होना था। हालांकि, किसानों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग ने कथित तौर पर दबाव में आकर हाईवे की रेंज को मोड़ दिया। इस मनमाने बदलाव के कारण किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि अवाप्ति की चपेट में आ गई, जिससे उनका दोहरा नुकसान हुआ है। धर्मेंद्र ने बताया कि नियमों के अनुसार रूट सीधा होना था, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने दबाव में आकर हमारी सबसे उपजाऊ जमीन को अवाप्त कर दिया। मुआवजा भी सही नहीं दिया जा रहा है। विरोध करने पर किसानों को पाबंद करने का आरोप किसानों का आरोप है कि जब उन्होंने अधिकारियों को सही आदेश दिखाने और नियमों के उल्लंघन को रोकने का प्रयास किया, तो उन्हें दबाने की कोशिश की गई। किसानों ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि विरोध के दौरान पुलिस बल के साथ किसानों को थाने में बैठा दिया गया और उन्हें छह माह के लिए पाबंद कर दिया गया। किसानों ने इस कार्रवाई को भी अन्यायपूर्ण बताते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर उन्हें मुआवजा विवाद में न्याय दिलाने की मांग की है। प्रमुख मांगें * दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई: मुआवजा निर्धारण में मनमानी और नियमों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए। * सही डीएलसी दरों पर मुआवजा: पीडब्ल्यूडी द्वारा लागू की गई सामान्य दर को निरस्त कर, नियमों के अनुसार किसानों को सही और उचित डीएलसी दरों के आधार पर मुआवजा दिया जाए ताकि उन्हें हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सके।

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