लुधियाना| देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले माइक्रो, स्मॉल एंडमीडियम एंटरप्राइजेस(एमएसएमई ) आज विलंबित भुगतान की समस्या के कारण गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। लुधियाना के उद्यमियों का कहना है कि एमएसएमई अधिनियम मजबूत होने के बावजूद जमीनी स्तर पर छोटे उद्योगों को अपने वैध बकाये के लिए लंबी और खर्चीली कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। वकीलों की फीस 30 हजार और आर्बिट्रेशन शुल्क 25 हजार रुपये से शुरू होने के कारण छोटे उद्यमों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके अलावा, आर्बिट्रेटर्स द्वारा जिला उद्योग केंद्र कार्यालय के बजाय निजी चैंबरों में कार्यवाही करने की प्रवृत्ति से उद्यमियों की परेशानी और बढ़ जाती है। समय पर भुगतान न मिलने से उद्योगों का कार्यशील पूंजी चक्र और उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुँच गई हैं।प्लास्टिक एसोसिएशन के प्रधान डॉ. मानकर के. गर्ग जैसे प्रतिनिधियों का मानना है कि सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए जागरूकता शिविर और कार्यशालाएं आयोजित करनी चाहिए, ताकि उद्यमी बिना किसी डर या भारी खर्च के अपने अधिकारों का उपयोग कर समय पर बकाया वसूली कर सकें।


