एमपीआईडीसी और ट्रैफिक पुलिस की बैठक में फैसला:पीएम के कारकेड- वीआईपी वाहनों को ही संग्रहालय में एंट्री, बाकी पार्किंग तक जाएंगे

ग्लोबल इन्वेस्टर समिट (जीआईएस) का ट्रैफिक प्लान चार दिन से चल रही कवायद के बाद आखिरकार तैयार हो गया है। गुरुवार देर रात तक चली बैठक में निर्णय हुआ है कि अब केवल वीआईपी गेस्ट्स के वाहन ही मानव संग्रहालय में लाए जाएंगे। वीआईपी गेस्ट्स में केवल बड़ी कंपनियों के एमडी-सीईओ, विदेशी डिप्लोमेट्स, मल्टी नेशनल कंपनियों के कंट्रीहेड्स और बड़े राजनेताओं को शामिल किया गया है। इनकी संख्या करीब 500 है, इसलिए अब 2700 वाहनों के बजाए केवल 500 वाहनों को ही संग्रहालय में प्रवेश दिए जाने की योजना बनी है। बैठक एमपीआईडीसी और पुलिस के अफसरों के बीच चार दिनों तक चली। इसमें तय हुआ कि सामान्य डेलिगेट्स के वाहन उनके होटलों से निकलकर संग्रहालय के आसपास बनी पार्किंग तक जाएंगे। यहां से डेलिगेट्स को ई बस से संग्रहालय लाया जाएगा। पार्किंग के लिए कलर कोडिंग की गई है, जिसके पास शुक्रवार से बंटना शुरू हो गए हैं। इन डेलिगेट्स को संग्रहालय परिसर में घूमने के लिए 100 गोल्फ कार्ट भी बुलवाई जा रही हैं। जब उन्हें पार्किंग में खड़े अपने वाहन तक वापस जाना होगा तो उन्हें ई-रिक्शा से छोड़ने की योजना है। बोट क्लब की ओर ट्रैवलर का ट्रायल… मानव संग्रहालय के गेट नंबर-3 से बाहर निकलने के लिए ट्रैवलर का ट्रायल रन करवाया गया। इस गेट से निकलने पर तेज मोड़ हैं और ढलान भी है। ये सड़क बोट क्लब पर आकर मिलती है, जहां करीब 12 फीट जगह ही बचती है। हालांकि ट्रेवलर आसानी से निकल गई। युवा उद्यमी बताएंगे, कैसे सरकारी योजनाओं की मदद से सफल हुए जीआईएस में उन युवा उद्यमियों की कहानी भी सुनाई जाएगी, जिन्होंने सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर अपना कारोबार खड़ा किया। ये युवा उद्यमी बाहर से आने वाले निवेशकों के साथ सीधा संवाद करेंगे। जीआईएस में युवा योजना, स्वरोजगार योजना, आर्थिक कल्याण योजना, कृषक उद्यमी योजना और प्रधानमंत्री एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन प्रोग्राम के लाभार्थियों को शामिल किया गया है। करीब 15 हजार युवा उद्यमियों में से आईटी, फूड और फैब्रिक सेक्टर के 12 सफल युवा उद्यमियों को विशेष रूप से बुलाया गया है। इनके अलावा, कृषि क्षेत्र में प्रोडक्शन करने वाले युवा उद्यमी भी हिस्सा लेंगे। सबसे ज्यादा रतलाम के उद्यमी मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में शामिल 5,000 में से 500 आंत्रप्रेन्योर का चयन हुआ है। इनकी सफलता की कहानियां जीआईएस में बाहरी निवेशकों के साथ साझा की जाएंगी ताकि वे प्रदेश के उद्यमिता माहौल को समझ सकें। सरकार के मुताबिक पिछले 5,000 से अधिक युवाओं को लोन मुहैया कराया, जिसमें सबसे ज्यादा 546 आंत्रप्रेन्योर रतलाम से हैं। इन्हें लगभग 30 करोड़ रुपए की मदद मिली। इसके बाद रीवा (331 आंत्रप्रेन्योर, 20 करोड़) और इंदौर (313 आंत्रप्रेन्योर) का स्थान है। भोपाल में भी 263 आंत्रप्रेन्योर को 19 करोड़ की सहायता मुहैया कराई गई।

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