एमपी में चना, मिलेट्स, सरसों के रिसर्च सेंटर बनेंगे:खेती की लागत घटाकर आमदनी बढ़ाने 16 मंत्रालयों को सीएम ने दिया टास्क

एमपी में खेती की लागत घटाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सीएम डॉ. मोहन यादव इस साल को कृषक कल्याण वर्ष के तौर पर मनाने जा रहे हैं।
16 विभाग मिलकर इस टास्क पर काम करेंगे। जिससे किसानों की आमदनी बढ़ने के साथ ही कृषि आधारित रोजगार बढ़ेंगे और फूड प्रोसेसिंग डेयरी, फिशरीज जैसे उद्योग भी बढ़ेंगे। रविवार 11 जनवरी को भोपाल के जंबूरी मैदान से सीएम ने इसकी औपचारिक शुरुआत की है। यह है सरकार की रणनीति
सरकार का लक्ष्य है कि किसान केवल अन्नदाता न रहे, बल्कि उद्यमी, ऊर्जा दाता और एक्सपोर्टर भी बनें। इसी सोच के साथ “समृद्ध किसान–समृद्ध प्रदेश” थीम पर आधारित यह अभियान शुरू किया गया है।
सरकार ने खेती को पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़ाकर लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में रोडमैप तैयार किया है। मार्केटिंग प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर फोकस
पिछले एक दशक में 16% से ज्यादा कृषि विकास दर हासिल कर चुके मध्यप्रदेश को अब वैश्विक कृषि मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की तैयारी है।
सरकार उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मार्केटिंग, प्रोसेसिंग और वैल्यू-एडिशन पर फोकस कर रही है। खेती को जोखिम से बाहर निकालने के लिए मौसम आधारित तकनीक, बीमा और अनुसंधान को केंद्र में रखा गया है। तीन बड़े कृषि अनुसंधान केंद्र बनेंगे
कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत राज्य में तीन प्रमुख रिसर्च हब स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों से फसल उत्पादकता, गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलेगी विदेशों तक खेती देखने जाएंगे किसान
किसानों और कृषि से जुड़े अधिकारियों को वैश्विक नवाचारों से जोड़ने के लिए विदेश अध्ययन भ्रमण योजना शुरू की जाएगी। सिंचाई दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रेशराइज्ड वाटर माइक्रो इरीगेशन योजना लागू की जाएगी। वहीं प्रदेशभर में WINDS (वेदर इंफॉर्मेशन नेटवर्क डाटा सिस्टम) विकसित कर किसानों को सटीक मौसम पूर्वानुमान और कृषि सलाह उपलब्ध कराई जाएगी। बीमा योजना में उद्यानिकी फसलें भी शामिल होंगी
खेती को जोखिम से सुरक्षित बनाने की दिशा में मौसम आधारित बीमा योजना के दायरे में अब उद्यानिकी फसलों को भी शामिल किया जाएगा। किसानों की जमीनी मदद को मजबूत करने के लिए कृषक मित्र–कृषक दीदी योजना को दोबारा शुरू किया जाएगा। आय के नए स्रोत खोलने के उद्देश्य से प्रदेश में कृषि पर्यटन की शुरुआत और गोपालन को प्रोत्साहन देने की कार्यवाही भी प्रस्तावित है। तिलहन किसानों को राहत देते हुए सरसों पर भावांतर योजना लागू की जाएगी। खाली पदों पर भर्ती होगी
संस्थागत मजबूती के तहत कृषि विभाग में द्वितीय और तृतीय श्रेणी के 1,348 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी, जबकि मंडी बोर्ड में 386 पदों पर सीधी भर्ती होगी। गुणवत्ता नियंत्रण को सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश के सभी संभागों में बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन कर उन्हें NABL मान्यता दिलाई जाएगी। इसके साथ ही राज्य के 46 शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों में से 5 को मॉडल प्रक्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। कृषि-सब्जी मंडियों का मॉर्डनाइजेशन करेंगे
कृषि विपणन को आधुनिक बनाने के लिए प्रदेश की चिन्हित कृषि उपज मंडी समितियों और सब्जी मंडियों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। नवाचार के रूप में कृषि उत्पाद निर्यात योजना लागू कर किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की तैयारी है। मृदा पोषण प्रबंधन के लिए प्रदेश में 3 माइक्रो न्यूट्रीएंट लैब स्थापित की जाएंगी। पर्यावरण संरक्षण और अतिरिक्त आय के उद्देश्य से नरवाई प्रबंधन के तहत अधिक से अधिक कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट (CBG) लगाए जाएंगे और पराली संग्रह के लिए एग्रीगेटर स्थापित किए जाएंगे। उद्यानिकी क्षेत्र के विस्तार पर भी सरकार का विशेष जोर रहेगा। वर्ष 2026-27 में उद्यानिकी रकबा 28.39 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 29.89 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है, यानी करीब 1.5 लाख हेक्टेयर की वृद्धि होगी। इसी अवधि में उद्यानिकी के अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई क्षेत्र को 1 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाया जाएगा। इंडस्ट्रियल समिट की तरह होंगे कार्यक्रम जनवरी 2026 फरवरी 2026 मार्च 2026 अप्रैल 2026 मई 2026 जून 2026 जुलाई 2026 अगस्त 2026 सितंबर 2026 अक्टूबर 2026 नवंबर 2026 10 दिशात्मक आयामों पर होगा काम पहला: कृषि बदलाव की बड़ी परियोजनाएं दूसरा: किसान आय वृद्धि एवं अपव्यय में कमी तीसरा: प्राकृतिक एवं जैविक कृषि चौथा : जल, मृदा एवं कृषि आदान का अनुकूलन 5वां: जलवायु, ऊर्जा एवं सततता 6वां: मूल्य-श्रृंखला, बाजार एवं किसान हिस्सेदारी 7वां: निर्यात, ब्रांडिंग एवं वैश्विक उपस्थिति 8वां: अनुसंधान, नवाचार एवं सशक्तिकरण 9वां: विरासत, संस्कृति एवं सॉफ्ट ब्रांडिंग 10वां: शासन, डिजिटल व्यवस्था एवं पारदर्शिता

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