एमपी में धर्मेंद्र ने 4 फिल्मों की शूटिंग की:मांडू में 22 दिन रुके, महेश्वर में अकेले घूमने निकल जाते थे; लोग उनकी सादगी के कायल

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र (89) का सोमवार को निधन हो गया। धर्मेंद्र का मध्यप्रदेश से भी कनेक्शन रहा है। उन्होंने यहां चार फिल्मों की शूटिंग की। महेश्वर में उन्होंने अपने दोनों बेटों सनी देओल और बॉबी देओल के साथ दो फिल्मों की आधी से ज्यादा शूटिंग की थी। वहीं, मांडू में 1975 में ‘किनारा’ और 1984 में ‘जीने नहीं दूंगा’ फिल्म की शूटिंग के लिए आए थे। दोनों ही फिल्मों में वे लीड रोल में थे। फिल्म ‘किनारा’ के चार सुपरहिट गीतों सहित लगभग 70 फीसदी शूटिंग जहाज महल में हुई थी। पढ़िए धर्मेंद्र के एमपी में शूटिंग के कुछ यादगार किस्से अकेले घूमने निकल जाते थे धर्मेंद्र
धर्मेंद्र मांडू में फिल्म ‘जीने नहीं दूंगा’ की शूटिंग के लिए वे 22 दिन तक तवेली महल रेस्ट हाउस और मालवा रिट्रीट में रुके थे। इस दौरान वे खाली वक्त में अकेले ही मांडू घूमने निकल जाते थे। वे अपने फैंस के साथ सादगी से पेश आते थे। उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते थे। फिल्म में दोहरी भूमिका निभाई थी
फिल्म ‘जीने नहीं दूंगा’ 26 अक्टूबर 1984 को रिलीज हुई थी। राजकुमार कोहली द्वारा निर्देशित इस फिल्म में धर्मेंद्र ने दोहरी भूमिका निभाई थी। उनके साथ शत्रुघ्न सिन्हा, राज बब्बर, अनीता राज और रोशनी जैसे कलाकार भी थे। फिल्म का प्रसिद्ध गीत ‘तुम याद ना आया करो’ भी मांडू में ही फिल्माया गया था। धर्मेंद्र और शत्रुघ्न सिन्हा रोज पान खाने आते थे
मांडू के पंडित केदारनाथ बताते हैं- मैं 55 साल से पान की दुकान चौराहे पर चला रहा हूं। जब फिल्म किनारा और जीने नहीं दूंगा बनी थी, तब दुकान पर धर्मेंद्र और शत्रुघ्न सिन्हा पान खाने आए थे। उन्होंने 22 दिन यहां फिल्म ‘जीने नहीं दूंगा’ की शूटिंग की। तब रोज मैं अपनी दुकान से उनके लिए मसाला पान लेकर जाता था। केदारनाथ कहते हैं- वाकई में धर्मेंद्र सहज हीरो थे। वे अपनेपन से मुझे मिलते थे। कभी नहीं लगा कि वे हमसे मिलेंगे या नहीं मिलेंगे। जब हम शूटिंग देखने जाते थे, तब वहां सहज रूप से हमारे पास आकर बात करते थे। वहीं, सोमनाथ तिवारी का कहना है कि धर्मेंद्र शूटिंग के दौरान भी गरीबों का ध्यान रखते थे। वह उन्हें कई चीजें दे जाते थे। वे सरल हृदय के व्यक्ति थे। जहाज महल परिसर के बाहर खुरासानी इमली की दुकान लगाने वाले रूपा लोदा ने बताया कि शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र और शत्रुघ्न सिन्हा दुकान पर आए थे। सड़क किनारे टोकरी में रखकर खुरासानी इमली बेचता था। वे वहां से गुजर रहे थे। उन्होंने पूछा कि दादा यह फल कौन सा है, तो मैंने उन्हें इमली के बारे में बताया। एक इमली गिफ्ट भी दी थी। इमली फोड़कर उन्हें खिलाई भी थी। जब वह टेस्ट लेने लगे, तो उन्हें इसका स्वाद अच्छा लगा था। फिल्म खत्म होने के बाद वे पांच इमली ले गए थे। महेश्वर में की दो फिल्मों की शूटिंग
इसके अलावा, खरगोन जिले में नर्मदा तट पर बसे महेश्वर में फिल्म यमला पगला दीवाना (2011) और यमला पगला दीवाना-2 (2013) की की शूटिंग हुई। दोनों ही फिल्मों ने महेश्वर को नई पहचान दी। दोनों फिल्मों का बड़ा हिस्सा लगभग आधी फिल्म महेश्वर में फिल्माया गया था। हालांकि फिल्म में इसे बनारस का दिखाया गया था, लेकिन दर्शक महेश्वर के घाटों, किले और पुरानी गलियों को देखने से खुद को रोक नहीं सके। ​फिल्म में धर्मेंद्र का किरदार ‘परमवीर ढिल्लो’ नाम के दिलदार व्यक्ति का है। महेश्वर के घाट पर उनका लोगों को झांसा देने, रंगीन गमछा पहनकर घूमने और बॉबी देओल के साथ मिलकर लोगों को ठगने वाले दृश्य फिल्माए गए थे। उनकी मुलाकात सनी देओल के किरदार से भी इसी नर्मदा तट पर हुई थी। आशुतोष राणा बोले- वे अभिनय की पाठशाला थे
सागर पहुंचे अभिनेता आशुतोष राणा ने दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को लेकर कहा कि वे अद्भुत अभिनेता रहे हैं। ग्रीक गॉड माने जाते थे। मुझे लगता है कि सदियों में ऐसा कोई एक व्यक्तित्व गढ़ा जाता है। वह जितने खूबसूरत थे, उतना ही उनका अद्भुत एक्शन होता था। कॉमेडी में अगर आप उनको देखें तो अप्रतिम कॉमेडी करते थे। चुपके-चुपके जैसी फिल्में आप देखें या शोले में उनका किरदार देख लें। वह अभिनय की एक संपूर्ण पाठशाला थे। सीएम बोले- धर्मेंद्र का योगदान अविस्मरणीय
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा- उनका निधन हम सबके लिए कष्टकारी है। उन्होंने फिल्मी दुनिया में जिस तरह का योगदान दिया, उसे भुलाया नहीं जा सकता। धर्मेंद्र जी अपने समय के सर्वाधिक लोकप्रिय और सुपरहिट हीरो में से एक रहे। बाबा महाकाल से प्रार्थना है कि वे पवित्र आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें। तोमर ने कहा- उनकी कला को याद करेंगे
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी अभिनेता धर्मेंद्र के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि भले ही वे आज शरीर से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कला और उनका प्रदर्शन हमेशा याद रहेगा। ये खबर भी पढ़ें…
मैं जट यमला पगला दीवाना ने सिखाया थिरकना वो दौर जब मोहब्बत खतों में लिखी जाती थी और प्यार का इजहार गानों में किया जाता था, तब परदे पर एक मुस्कुराता चेहरा आया, नाम है धर्मेंद्र। उनकी आंखों की चमक, उनकी सादगी और उनके गानों का जादू बस दिल में उतर जाता था। पढ़ें पूरी खबर…

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *