मध्य प्रदेश में बढ़ती ठंड का असर अब इंसानों के साथ-साथ वन्यजीवों पर भी पड़ने लगा है। इसके चलते प्रदेश के इकलौते मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी में जानवरों की देखभाल और उनके आहार में विशेष बदलाव किए गए हैं। आम दिनों में रोज 10 किलो मांस खाने वाले व्हाइट टाइगर को अब भैंसे का 12 किलो मांस दिया जा रहा है। सफारी प्रबंधन के अनुसार, ठंड के दौरान शरीर में ऊष्मा बनाए रखने के लिए टाइगर को अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है। मुकुंदपुर सफारी में इस समय कुल 4 व्हाइट टाइगर हैं। इनमें तीन वयस्क- रघु, टीपू और सोनम शामिल हैं जबकि जनवरी में एक शावक भी यहां लाया गया है। इसके अलावा सफारी में 5 बंगाल टाइगर और 2 शेर भी मौजूद हैं। ठंड के मौसम में अन्य जानवरों की खुराक में भी बदलाव किया गया है। भालुओं को अब खीर दी जा रही है, पक्षियों के आहार में अंडे शामिल किए गए हैं। अजगर और अन्य सांपों के लिए हीटर की व्यवस्था की गई है, ताकि वे ठंड से सुरक्षित रह सकें। नए साल के पहले दिन 50 हजार पर्यटकों के आने का अनुमान
मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी के वॉक-इन एवरी में छोटे-बड़े पक्षियों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। यहां अलग-अलग देशों से लाए गए 17 से अधिक प्रजातियों के विदेशी पक्षी हैं। ठंड से बचाव के लिए उनके लिए घास-फूस और लकड़ियों से विशेष शेड बनाए गए हैं। पक्षियों के घरों को निचले स्थान से ऊंचाई पर शिफ्ट किया गया है और उनका आहार भी पूरी तरह बदला गया है। उधर, नए साल को लेकर भी सफारी प्रबंधन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अनुमान है कि नए साल के पहले दिन करीब 50 हजार पर्यटक मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी पहुंच सकते हैं, जिसके चलते व्यवस्थाओं को पहले से मजबूत किया जा रहा है। ठंड में खान-पान पर रहती है पैनी नजर
मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी में वन्यजीवों के प्रभारी चिकित्सक डॉ. नितिन गुप्ता के अनुसार, जानवरों के बाड़ों के सामने हीटर लगाए गए हैं, जबकि पक्षियों को गर्मी का अहसास कराने के लिए विशेष किस्म के बल्ब लगाए जा रहे हैं। उन्हें स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए विटामिन और पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। बाघ, शेर और चीता के बाड़ों में छत से ओस और ठंडी हवाओं को रोकने के लिए ग्रीन शीट लगाई गई है। शेर और बाघ को वसायुक्त मांस दिया जा रहा है, जिसकी मात्रा भी बढ़ा दी गई है। हिरण के भोजन में गुड़ शामिल किया गया है। ठंड से बचाव के लिए उनके बाड़ों में जमीन पर पुआल बिछाई गई है। सभी पक्षियों के आहार में पौष्टिक वस्तुएं शामिल की गई हैं, साथ ही उनके पानी में मल्टीविटामिन मिलाए जा रहे हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि सर्दी के मौसम में शाकाहारी जानवरों के भोजन में साग-सब्जी और फलों की मात्रा बढ़ाई गई है, जबकि मांसाहारी पशुओं के भोजन में भी इजाफा किया गया है। रात के समय जानवरों को ठंडी हवा से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सुबह उन्हें धूप की गर्माहट दिलाने के लिए खुले में छोड़ा जाता है। पक्षियों के लिए गर्म तासीर वाले दानों की मात्रा बढ़ाई
सफारी के केयर टेकर निखिल सिंह का कहना है कि ठंड के मौसम में पक्षियों की सेहत को ध्यान में रखते हुए उनके आहार में गर्म तासीर वाले दानों की मात्रा बढ़ाई गई है। सनफ्लॉवर सीड, तिल और अन्य विशेष दाने दिए जा रहे हैं, ताकि वे सर्दी से सुरक्षित रह सकें। केयर टेकर विष्णुकांत मिश्रा का कहना है कि मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी में सर्दियों के दौरान सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं। अब यहां सफेद शेर के साथ-साथ विदेशी पक्षियों का वॉक-इन ओवरी भी बड़ा आकर्षण बन गया है, जिसे देखने देश-विदेश से सैलानी पहुंच रहे हैं। ठंड में यूपी-बिहार के पर्यटकों की बढ़ी आमद
मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी प्रबंधन के अनुसार, सर्दियों में यहां आने वाले सैलानियों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। सुहावना मौसम और बेहतर साइटिंग के चलते उत्तर प्रदेश और बिहार से भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। ठंड के महीनों में जंगल हरियाली से भर जाता है और वन्यजीवों की गतिविधियां भी अधिक देखने को मिलती हैं। व्हाइट टाइगर सहित अन्य जानवर खुले में नजर आते हैं, जिससे पर्यटकों को रोमांचक और यादगार अनुभव मिलता है। इसी कारण वीकेंड और छुट्टियों के दौरान सफारी की बुकिंग में तेजी दर्ज की जा रही है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सफारी प्रबंधन ने सुरक्षा, स्वच्छता और गाइड व्यवस्था को और मजबूत किया है। प्रवेश टिकट, वाहन व्यवस्था और समय सारिणी को व्यवस्थित किया गया है। प्रबंधन ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त व्यवस्थाएं भी की जाएंगी। सफारी में बढ़ती पर्यटक संख्या का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। होटल, ढाबे और परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। प्रबंधन को उम्मीद है कि पूरा शीतकालीन सीजन मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी के लिए पर्यटन के लिहाज से बेहद सफल रहेगा। पर्यटक बोले- ठंड में सफारी का अलग ही रोमांच
भोपाल से आए पर्यटक आदित्य शर्मा ने बताया, “ठंड के मौसम में मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी घूमने का मजा ही कुछ और है। जंगल की हरियाली बेहद खूबसूरत लगती है और खुले में टहलते टाइगर को देखना रोमांच से भर देता है। यहां का शांत माहौल मन को सुकून देता है।” प्रयागराज की नेहा वर्मा ने कहा, “मुझे नई-नई जगह घूमने का शौक है, लेकिन मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी खास लगी। ठंड में मौसम सुहावना रहता है और दूर-दूर तक जंगल नजर आता है। गाइड्स से जानवरों की दिनचर्या के बारे में मिली जानकारी काफी रोचक रही। बच्चों के साथ आना भी सुरक्षित और आनंददायक लगा।” पर्यटकों का कहना है कि सर्दियों में जानवर ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं, जिससे सफारी का अनुभव और भी बेहतर हो जाता है। ठंडी हवा, खुला जंगल और वन्यजीवों की झलक मुकुंदपुर को यादगार पर्यटन स्थल बना रही है। मध्य प्रदेश का इकलौता व्हाइट टाइगर सफारी
मध्य प्रदेश का इकलौता व्हाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर अब प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर के पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण बनता जा रहा है। महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव व्हाइट टाइगर सफारी के नाम से प्रसिद्ध यह अभयारण्य दुर्लभ सफेद बाघों को नजदीक से देखने का मौका देता है। यह सफारी रीवा से करीब 15 किलोमीटर और सतना से 55 किलोमीटर दूर है। ये लगभग 250 एकड़ में फैला है। इसे दुनिया की पहली व्हाइट टाइगर सफारी के रूप में भी पहचान मिली है। यहां पर्यटक जंगल सफारी और खुली जीप के जरिए सफेद बाघों के साथ-साथ शेर, तेंदुए और भालुओं को उनके प्राकृतिक परिवेश में देख सकते हैं। एडवेंचर एक्टिविटीज के साथ ईको टूरिज्म
मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी के पास विकसित ईको टूरिज्म पार्क भी पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहा है। यहां एडवेंचर एक्टिविटीज के साथ परिवारों और युवाओं के लिए कई सुविधाएं मौजूद हैं। इसके अलावा आसपास के प्रमुख प्राकृतिक और धार्मिक स्थल जैसे मैहर का शारदा मंदिर, पूर्वा और क्योटी जलप्रपात, इस क्षेत्र को एक बड़े पर्यटन हब के रूप में स्थापित कर रहे हैं। विंध्य क्षेत्र दुनिया में व्हाइट टाइगर के लिए जाना जाता है। पहली बार दुनिया को ‘मोहन’ नामक सफेद बाघ से परिचित कराने का श्रेय रीवा रियासत के तत्कालीन महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव को जाता है। मोहन का निवास स्थान भी यही क्षेत्र था और यहीं उसकी संतानों ने भी परवरिश पाई। इसी ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए मुकुंदपुर टाइगर सफारी का नाम महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव के नाम पर रखा गया है। 2016 में यह सफारी आम लोगों के लिए खोली गई थी। इसके साथ ही विंध्य की धरती पर एक बार फिर सफेद बाघों की चहलकदमी शुरू हुई। पहले ही साल 2017 में यहां करीब 4 लाख पर्यटक पहुंचे थे, जिसकी संख्या अब दोगुनी हो चुकी है। ये खबर भी पढे़ं… मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी के साथ 6 वाटरफॉल में मिलेगा गोवा-मुंबई सा नजारा विंध्य का मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी, मां शारदा मंदिर और आधा दर्जन वाटरफॉल पर्यटकों की पहली पसंद है। नववर्ष के मौके पर रीवा, सतना, सीधी और सिंगरौली जिले में काफी संख्या में पर्यटकों के आने की उम्मीद है। सफारी प्रबंधन, मां शारदा प्रबंध समिति सहित संबंधित जिलों के जिम्मेदारों ने तैयारी पूर्ण कर ली है। पूर्वा फॉल, क्योटी जलप्रपात, चचाई जलप्रपात, बहुती जलप्रपात में भी सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पढे़ं पूरी खबर…


