झाबुआ के थांदला विकासखंड में एम्बुलेंस सेवा की स्थिति बदहाल है। मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई यह सेवा खुद ‘बीमार’ नजर आ रही है। कई एम्बुलेंस जर्जर हालत में हैं, जिससे मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
एम्बुलेंस को खोलने-बंद करने के लिए रस्सियों का हो रहा इस्तेमाल काकनवानी अस्पताल की एम्बुलेंस की हालत बेहद जर्जर है। इसके दरवाजों में हैंडल नहीं हैं और उन्हें खोलने-बंद करने के लिए रस्सियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वाहन की फ्रंट लाइट भी खराब है, जिससे इसकी फिटनेस पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। थांदला की तीन एंबुलेंसों में से एक हाल ही में नगर परिषद चौराहे पर अचानक बंद हो गई थी, जिसे ठीक करने में कई दिन लग गए। इसी तरह, खवासा स्वास्थ्य केंद्र की एंबुलेंस भी कई दिनों से खराब खड़ी है। इन समस्याओं के कारण क्षेत्र के मरीजों को इलाज के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बीएमओ बोले-वाहन के रखरखाव की जिम्मेदार ठेकेदार कंपनी की है इस मामले पर जब बीएमओ बी.एस. डावर से बात की गई, तो उन्होंने रखरखाव की जिम्मेदारी ठेका कंपनी पर डाली। डावर ने कहा, “एम्बुलेंस के रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार कंपनी की है। हमने इस संबंध में उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया है।” झाबुआ जिले के आदिवासी अंचल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत इन एंबुलेंसों की बदहाली से उजागर हो रही है। यह स्थिति क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है।


