अब एम्स भोपाल से ही एयर एम्बुलेंस के लैंड और टेकऑफ कराने की तैयारी चल रही है। इसे लेकर संस्थान में हेलीपैड बनाने का प्रस्ताव सोमवार को भारत सरकारी की स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी (SFC) में रखा गया है। इसके अलावा 200 बेड का कैंसर अस्पताल (ऑन्कोलॉजी सेंटर), 150 बेड का अपेक्स ट्रॉमा सेंटर, यूरोलॉजी विभाग में रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम और वर्चुअल ऑटोप्सी जैसे प्रोजेक्ट की डिटेल प्रेजेंटेशन भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने दी। सांसद शर्मा ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव को एक हजार करोड़ रुपए के विस्तार का प्लान सौंपा है। जिसमें गर्भवती महिलाओं के लिए भी सुविधाओं के विस्तार का प्रोजेक्ट शामिल हैं। उम्मीद है कि इन प्रोजेक्ट के लिए जल्द ही बजट सैंक्शन हो जाएगा। SFC की बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी, मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस का प्रतिनिधिमंडल, भोपाल सांसद, एम्स भोपाल के निदेशक डॉ. माधवानंद कर, एम्स भोपाल के डिप्टी डायरेक्टर संदेश जैन समेत अन्य लोग मौजूद रहे। 36 हजार कैंसर मरीजों के लिए 200 बेड का ऑन्कोलॉजी सेंटर
कैंसर मरीजों के लिए 200 ऑक्सीजन सपोर्ट बेड और 20 वेंटिलेटर युक्त आईसीयू बेड वाला अपेक्स ऑन्कोलॉजी सेंटर बनाया जाएगा। इसमें डेडिकेटेड ऑन्को-पैथोलॉजी, सायटोलॉजी लैब, एडवांस मशीनरी और आधुनिक जांच सुविधाएं होंगी। निर्माण पर 437 करोड़ और उपकरणों पर 300 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें कीमोथेरेपी, सर्जरी, टारगेट थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और स्टेम सेल ट्रीटमेंट की व्यवस्था होगी। एम्स प्रशासन का कहना है कि फिलहाल कैंसर मरीजों को अलग-अलग विभागों में भटकना पड़ता है। एम्स भोपाल के आंकड़ों के अनुसार, हर साल 36 हजार से ज्यादा कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से करीब 60% मरीज भोपाल के बाहर के हैं। सबसे ज्यादा केस आगर मालवा (3664), रायसेन (1776), विदिशा (1536), नर्मदापुरम (1216), सागर (1072), रीवा (944) जैसे जिले टॉप पर हैं। दिल्ली के बाद होगा दूसरा सबसे बड़ा ट्रॉमा सेंटर
एम्स भोपाल में लेवल-1 अपेक्स ट्रॉमा सेंटर बनाया जा रहा है। यह प्रदेश का सबसे बड़ा और देश में एम्स दिल्ली के बाद दूसरा सबसे बड़ा ट्रॉमा सेंटर होगा। इस ट्रॉमा सेंटर के निर्माण की स्वीकृति मिल गई है। निर्माण दो चरणों में होगा। पहले चरण में 295 करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्रस्ताव केंद्रीय वित्त विभाग को भेजा गया है। यह ट्रॉमा सेंटर इसलिए मिला है क्योंकि मरीजों का भार तेजी से बढ़ रहा है। साल 2022 के मुकाबले साल 2024 में 49 हजार मरीज बढ़ गए हैं। एम्स भोपाल ने रविवार को ट्रॉमा सेंटर की एनुअल रिपोर्ट जारी की है। जिसके अनुसार साल 2022 में जहां 36,696 मरीजों का इलाज हुआ, वहीं 2023 में यह संख्या 54,500 पहुंच गई, जो 48.5% की वृद्धि है। 2024 में मरीजों की संख्या बढ़कर 85,435 हो गई, जो 2023 की तुलना में 56.7% की बढ़त है। यूरोलॉजी विभाग में रोबोट से होंगी सर्जरी
दुनिया की सबसे उन्नत हाई एंड रोबोटिक सर्जरी प्रणाली ‘द विंची रोबोट 4.0’ यूरोलॉजी विभाग में इंस्टॉल किया जाएगा। इस सिस्टम के लगने के बाद एम्स भोपाल सेंट्रल इंडिया का पहला सरकारी मेडिकल संस्थान होगा, जहां इतनी मॉडर्न रोबोटिक तकनीक से ऑपरेशन हो सकेंगे। करीब 30 करोड़ की लागत से लग रहे इस सिस्टम से प्रोस्टेट कैंसर, किडनी ट्यूमर, मूत्राशय कैंसर जैसे जटिल ऑपरेशन किए जाएंगे। ये खबर भी पढ़ें… एम्स भोपाल में जरूरी जांचें बंद, इलाज अटका देश के सबसे भरोसेमंद स्वास्थ्य संस्थानों में गिने जाने वाले एम्स भोपाल में इन दिनों मरीज इलाज से पहले ही परेशान हो रहे हैं। वजह है कई बेहद जरूरी जांचों का बंद होना। हालात ऐसे हैं कि डॉक्टर जांच लिख रहे हैं, लेकिन लैब से मरीजों को सीधा जवाब मिल रहा है कि यह जांच फिलहाल बंद है। ब्लड कल्चर, यूरीन कल्चर, हेपेटाइटिस-सी, एएसओ टेस्ट, आरएच फैक्टर, आरएस फैक्टर और एच1-बीएसी जैसी जांचें उपलब्ध न होने से इलाज की पूरी प्रक्रिया लड़खड़ा गई है।पूरी खबर पढ़ें


