पिछले पांच वर्षों से जानलेवा हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रही उत्तर प्रदेश की 12 वर्षीय वैष्णवी को एसएमएस अस्पताल जयपुर के डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। यूरोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने बच्ची के शरीर में मौजूद दुर्लभ ‘पैरा गैंग्लियोमा’ ट्यूमर को अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी के जरिए सफलतापूर्वक निकाल दिया। करीब 5 घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद बच्ची अब स्वस्थ है। एसएमएस के रोबोटिक सर्जन एवं यूरोलोजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि जांच में सामने आया कि बच्ची के बाएं गुर्दे के पास ट्यूमर था। इसके कारण ब्लड प्रेशर बढ़ रहा था। ऐसे हुआ हाई-टेक रोबोटिक ऑपरेशन जनरल एनेस्थीसिया के तहत पेट में सूक्ष्म चीरे लगाकर रोबोटिक कैमरा और उपकरण डाले गए। थ्री-डायमेंशनल हाई-डेफिनेशन विजुअल की मदद से ट्यूमर को आसपास की नाजुक रक्त नलिकाओं से सुरक्षित अलग किया गया। ब्लीडिंग नियंत्रित करते हुए ट्यूमर को पूरी तरह निकाल लिया गया। क्यों था ऑपरेशन जटिल? एनेस्थीसिया विभाग की अध्यक्ष डॉ. वर्षा कोठारी ने बताया कि सर्जरी के दौरान ट्यूमर से हार्मोन के अचानक स्राव के कारण रक्तचाप खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता था। इसके अलावा ट्यूमर महाधमनी और किडनी की मुख्य रक्त नलिकाओं से सटा होने से जोखिम और बढ़ गया था, लेकिन टीम के विशेष प्रयासों से गुर्दे को सुरक्षित रखते हुए पूरा ट्यूमर हटा दिया गया मोटापा, नींद की कमी से बढ़ रहा तनाव : एक्सपर्ट एसएमएस अस्पताल के डॉ. पुनीत सक्सेना और डॉ. बलराम शर्मा के अनुसार बच्चों में होने वाला हाई ब्लड प्रेशर पीडियाट्रिक हाइपरटेंशन कहलाता है। इसके पीछे मोटापा, नींद की कमी, मोबाइल का अधिक उपयोग, पढ़ाई का दबाव, फास्ट फूड, फल-सब्जियों की कमी, शारीरिक गतिविधियों से दूरी और मानसिक तनाव प्रमुख कारण हैं। हर साल बच्चों की बीपी और बीएमआई जांच जरूरी है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में पूरी जानकारी अपडेट रहे और बीमारियों से बचा जा सके। “बाहरी राज्यों के मरीज आज भी एसएमएस के डॉक्टरों पर भरोसा कर इलाज के लिए जयपुर आते हैं। यूपी, पंजाब, हरियाणा और मध्यप्रदेश से गंभीर रोगों के मरीज यहां पहुंच रहे हैं।”
-डॉ. दीपक माहेश्वरी, प्राचार्य, एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर


