एसएमएस हॉस्पिटल में 15वर्षीय लड़के की किडनी ट्रांसप्लांट हुई:दिलखुश की दोनों किडनियां थी फेल , बीमारी की वजह से पढ़ाई छूटी, अब जी सकेगा सामान्य जीवन

एसएमएस हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टर्स की टीम ने 15 वर्षीय किशोर दिलखुश की किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा कर उसे नया जीवन दिया है । 15 साल के दिलखुश और उसके परिवार के जीवन में एक गहरा अंधेरा था, क्योंकि दिलखुश वर्षों से किडनी की समस्या से जूझ रहा था और छोटी सी उम्र में वो असहनीय पीड़ा को झेल रहा था । वो कई वर्षों से एंड-स्टेज रीनल डिजीज की वजह से डायलिसिस पर निर्भर था। 31 दिसंबर 2024 को एसएमएस हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट की सर्जरी हुई । हॉस्पिटल में डॉक्टर्स की टीम ने मिल कर इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को पूरा कर इसे सफल बनाया । इस सफल सर्जरी के बाद दिलखुश डायलिसिस से मुक्त हो जाएगा और एक सामान्य जीवन जी सकेगा। यह जटिल और जीवन रक्षक सर्जरी एसएमएस अस्पताल की अनुभवी टीम द्वारा की गई, जिसमें किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. नीरज अग्रवाल, नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. धनंजय अग्रवाल, और बाल नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. नेहा अग्रवाल, डॉ.मनीषा और डॉ. नीलम शामिल थे। बाल गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा अग्रवाल ने बताया कि इस तरह की सर्जरी से मरीज का जीवन न केवल शारीरिक रूप से बेहतर होता है, बल्कि वह मानसिक रूप से भी मजबूत महसूस करता है। एसएमएस अस्पताल राज्य के प्रमुख केंद्रों में से एक है, जहां इस प्रकार की जटिल सर्जरी नियमित रूप से की जाती है। गुर्दा रोगियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली संस्था किडनी वॉरियर्स फाउंडेशन के राज्य कोर्डिनेटर हर्षवर्धन सिंह ने कहा, ‘एसएमएस अस्पताल की यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह उन सभी बाल गुर्दा रोगियों और उनके परिवारों के लिए एक आशा की किरण है, जो किडनी फेल की समस्या और डायलिसिस से जूझ रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि संस्था आगामी छह महीने तक इस रोगी को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। दिलखुश की मां चंदा देवी ने डॉक्टरों की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘हमारे बेटे को एक नया जीवन मिला है। यह सब डॉक्टरों की मेहनत और विशेषज्ञता के कारण संभव हो पाया है। मेरा बेटा, जो कई वर्षों से किडनी फेल और डायलिसिस से जूझ रहा था, अब अन्य बच्चों की तरह सामान्य जीवन जी सकेगा। चंदा देवी ने कहा कि मैं और मेरे पति रामजी लाल फागी के पास नीमराना गांव के रहने वाले हैं, दोनों मजदूरी कर अपने परिवार को चलाते आये हैं । ढाई साल पहले दिलखुश की बीमारी के बारे में पता चला, उस वक्त हमारी समझ से सब कुछ परे था , दिल-दिमाग काम ही नहीं कर रहा था , ऐसा लगा मानो सब कुछ खत्म है । बस मन में एक ही सवाल था अब क्या होगा ? मेरा बेटा दिलखुश कैसे ठीक होगा ? दिन रात भगवान से अपने बच्चे के सलामत रहने की दुआ मांगते हुए हम गांव से उठ कर जयपुर आ गए। बेटे को जेकेलोन हॉस्पिटल में दिखाया जहां इसका इलाज शुरू हुआ। बेटे की दोनों किडनी फेल हो गई थी , ऐसे में हमे समझ में ही नहीं आ रहा था , बच्चे की बीमारी पर दुःख मनाये या उसकी इलाज के संभव प्रयास के लिए सोचे । किडनी फेल होने से मेरा बेटा डायलेसिस पर आ चुका था । ढाई साल से हॉस्पिटल के में इलाज चल रहा था , ये दौर बहुत मुश्किल भरा था । बच्चा हॉस्पिटल में बीमारी के दर्द को झेल रहा था ,और परिवार संघर्ष के दर्द को झेल रहा था, हमें अपने दूसरे बेटे को भी संभालना था और घर भी चलाना था । पति-पत्नी दोनों मिल कर बेलदारी करके किसी तरह से जीवन यापन करते हैं ,इसमें बच्चे की बिमारी ने हमें पूरी तरह से तोड़ दिया। दिन रात की भाग-दौड़, कभी हॉस्पिटल तो कभी इधर-उधर। मेरा बच्चा दिलखुश अपनी बीमारी की वजह से पढ़ाई नहीं कर पाया, सातवीं क्लास के बाद उसकी पढ़ाई रोक दी क्योंकि वो डायलेसिस पर आ गया, इन्फेक्शन का दर भी हर वक्त सताता रहता था । दो साल पहले किडनी ट्रांसप्लांट के लिए फाइल लगी तो मन में एक आस जागी कि शायद मेरे बेटे को नया जीवन दान मिल पाए। एसएमएस के डॉक्टर्स ने मेरे बच्चे को किडनी ट्रांसप्लांट के साथ नया जीवन दिया है ,ये पूरे परिवार के लिए नई रोशनी है। अब मेरा बेटा आगे पढ़ाई कर सकेगा और आम बच्चों की तरह वो भी जीवन में आगे बढ़ सकेगा ।

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