एसजीपीसी के अधीनस्थ ट्रस्ट की टास्क फोर्स पर किसानों की फसल नष्ट करने का आरोप

भास्कर न्यूज| अमृतसर कुल हिंद किसान सभा पंजाब के राज्य सचिव लखबीर सिंह निजामपुर और सब्जी उत्पादक किसान संगठन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह तीर्थ पुरा ने प्रैसवार्ता की। इस मौके पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अधीनस्थ श्री गुरु रामदास हॉस्पिटल ट्रस्ट वल्ला की टास्क फोर्स द्वारा ट्रैक्टरों के साथ गांव खानकोट के किसान बाज सिंह तथा वजिंदर सिंह की फसल नष्ट करने का आरोप लगाया है। पुलिस के अधिकारियों को दी शिकायत में उक्त किसानों ने करीब 10 एकड़ जमीन पर जबरदस्ती कब्जा करने का आरोप भी लगाया गया है। वल्ला में स्थित उक्त जमीन संबंधी पीड़ित किसानों ने खुलासा किया कि व 60 साल से ज्यादा समय से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं। इस जमीन पर पिता करनैल सिंह के नाम पर एक ट्यूबवेल कनेक्शन भी चल रहा है। इस जमीन को लेकर कोर्ट में केस भी चल रहे हैं। इसी तरह करीब 10 साल पहले भी हमारी फसलें इन्होंने बर्बाद कर दी थीं। स्थानीय अदालत में किए गए केस के तहत कोर्ट ने फसल नुकसान के लिए इस ट्रस्ट पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। इस केस के खिलाफ उनकी (एसजीपीसी प्रबंधन) अपील सेशन कोर्ट ने खारिज कर दी थी। जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अब अपील की है। किसान नेताओं ने कहा कि 31 दिसंबर 2025 को फिर से अस्पताल प्रबंधन द्वारा किसानों द्वारा बीजी गई गेहूं और मटर की फसल पर कब्जा कर लिया है और किसानों को बिना बताए उनकी सारी फसलें अन्य किसानों को बेच दी हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर को शिकायत कर दी गई है। फिलहाल किसी भी पुलिस अधिकारी ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और न ही घटनास्थल का दौरा किया है। उल्टा, पुलिस लगातार पीड़ित किसानों को परेशान कर रही है। उन्होंने कि पीड़ित किसानों के ट्यूबवेल की डिलीवरी और सबमर्सिबल मोटर जो इस जमीन पर लगी हुई है, उसे भी ये अधिकारी ले गए हैं। यह ट्यूबवेल कनेक्शन ही साबित करता है कि ये लोग इस जमीन पर कब्जा करके खेती कर रहे थे। किसान नेताओं ने जिला प्रशासन से मांग की कि आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। इस बारे में अमृतसर जिले के यूनाइटेड किसान मोर्चा में शामिल किसान संगठनों की 10 जनवरी को मीटिंग बुलाई गई है। किसान नेताओं माहल सिंह, प्रताप सिंह चप्पा, राम सिंह, गुरजीत सिंह, पाल सिंह, जीवन सिंह, अवतार सिंह, भूपिंदर सिंह, करनैल सिंह नवां पिंड, गुरप्रीत सिंह नबीपुर और मंगल सिंह खजला ने भी इस कार्रवाई की निंदा की है। किसानों के आरोप झूठे हैं। एसजीपीसी ने फसल नहीं कटवाई है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए एसजीपीसी ने जैसे के तैसे स्थिति कायम रखी हुई है। – प्रताप सिंह, सचिव एसजीपीसी

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