मनातू के चक गांव में 11वीं की छात्रा की शादी की तैयारी चल रही थी। लड़की ने पलामू एसपी को फोन की। छात्रा ने कहा- एसपी मैम, मां-पिताजी मेरी शादी कराना चाहते हैं। मैं अभी करना नहीं चाहती। क्योंकि, मुझे पढ़ना-लिखना है। पढ़-लिखकर मैं जज बनना चाहती हूं। पलामू की एसपी रिष्मा रमेशन भी महिला हैं। उन्होंने छात्रा की पीड़ा और इच्छा को समझा और फौरन महिला थाना की प्रभारी रूपा बाखला के नेतृत्व में पुलिस की टीम को गांव में भेजा। पलामू पुलिस की स्पेशल टीम बच्ची के घर गई और परिजनों को समझाया। पुलिस के समझाने-बुझाने पर परिवार वाले मान गए। अब पलामू पुलिस नाबालिग छात्रा को पढ़ाएगी। पुलिस ने उसकी आगे की पढ़ाई की जिम्मेवारी ली है। मेदिनीनगर महिला थाने की थानेदार ने दैनिक भास्कर से पूरी घटना को शेयर किया। …..और फोन कर रोने लगी छात्रा मेदिनीनगर थाना की महिला थाना प्रभारी रूपा बाखला ने बताया कि सुबह एसपी मैम के पास एक अनजान कॉल आया। हैलो एसपी मैम, प्रणाम। यह एक नाबालिग का कॉल था। इतना बोलते ही वह रोने लगी। हिम्मत देने पर वह बोली, मैम मैंने 2024 में मैट्रिक पास किया है। आगे पढ़ना चाहती हूं, लेकिन मेरे माता पिता मुझे पढ़ाना नहीं चाहते। 6 महीने से घर में बैठी हूं। वे मेरी शादी करना चाहते हैं। लेकिन, मैं पढ़ना चाहती हूं। जज बनना चाहती हूं। आप रोकिए, नहीं तो मेरी जिंदगी नर्क बन जाएगी। बच्ची की बात सुनने के बाद एसपी मैम ने तत्काल मुझे बुलाया और छात्रा से संपर्क करने को कहा। कॉल करने वाली बच्ची पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के अति नक्सल प्रभावित चक गांव की रहने वाली है। मैं और मनातू थाना प्रभारी निर्मल उरांव के नेतृत्व में पुलिस उसके घर गई। परिजनों को करीब डेढ़ घंटे तक समझाया-बुझाया गया। काफी समझाने के बाद परिजन बच्ची की पढ़ाई को लेकर राजी हुए। लेकिन, उसकी पढ़ाई आगे कैसे होगी, इसको लेकर चिंतित थे। एसपी मैम से बात कर पुलिस ने पढ़ाई में मदद करने का आश्वासन दिया। बच्ची 11वीं क्लास की छात्रा है। इसे देखते हुए उसका नामांकन मनातू के चक में करवा दिया गया है। पढ़ने में मेधावी है बच्ची, दसवीं में मिले थे 70% से अधिक मार्क्स बच्ची 11वीं क्लास में आर्ट्स विषय से आगे की पढ़ाई करेगी। परिजनों की सहमति पर उसका नामांकन चक के स्कूल में कराया गया है। बच्ची ने दसवीं क्लास में 70 प्रतिशत से भी अधिक नंबर आया था। चक के जिस स्कूल में नामांकन हुआ है, वहां करीब 1700 बच्चे पढ़ते हैं। दाखिले के बाद बच्ची खुश है। पुलिस की पहल से नाबालिग की शादी रुक गई और उसकी आगे की पढ़ाई की चिंता भी दूर हो गई।


