एससी-एसटी मामलों के 1500 प्रकरण लंबित:रीवा-मऊगंज में विशेष बेंच की मांग; समिति ने जताई चिंता

रीवा कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) समिति की त्रैमासिक बैठक में रीवा और नवगठित मऊगंज जिले से जुड़े मामलों की बढ़ती पेंडेंसी पर चिंता व्यक्त की गई। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने मऊगंज को प्राथमिकता देते हुए लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि रीवा और मऊगंज जिले को मिलाकर एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के लगभग 1500 प्रकरण न्यायालय में लंबित हैं। इसका मुख्य कारण दोनों जिलों के लिए केवल एक ही विशेष न्यायालय का होना बताया गया। समिति के सदस्यों ने पेंडेंसी कम करने और सुनवाई को नियमित बनाने के लिए मऊगंज में अलग से विशेष बेंच स्थापित करने का निर्णय लिया। गवाहों को समय पर फंड उपलब्ध नहीं हुआ मनगवां विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति ने कहा कि मामलों के लंबित रहने का एक बड़ा कारण गवाहों को समय पर फंड उपलब्ध न होना है। उन्होंने बताया कि यात्रा और मजदूरी का खर्च न मिलने से गवाह समय पर न्यायालय नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने शासन स्तर पर पत्राचार करने की बात कही। विधायक ने यह भी सुझाव दिया कि बैठक से कम से कम 15 दिन पहले एजेंडा और कार्यवाही विवरण सदस्यों को उपलब्ध कराया जाए, साथ ही मोबाइल के माध्यम से भी सूचना दी जाए। उन्होंने एससी-एसटी पीड़ितों के लिए राहत राशि आवंटन की स्थिति साझा करने और पात्र पीड़ित महिलाओं को विवाह सहायता देने पर भी जोर दिया। रीवा विधायक प्रतिनिधि राजेश पाण्डेय ने मऊगंज में पृथक न्यायालय स्थापित करने की मांग करते हुए दूरस्थ बस्तियों में जागरूकता शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया। बैठक में यह भी बताया गया कि राहत राशि के कई प्रकरण आवंटन के अभाव में लंबित हैं। बैठक में एसडीओपी उदित मिश्रा सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

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