ऐतिहासिक शिवरात्रि पशु मेला शुरू:100 से ज्यादा ऊंट पहुंचे, गौवंश की संख्या घटी; 22 फरवरी तक चलेगा मेला

राजस्थान के करौली में रियासत कालीन शिवरात्रि पशु मेले का आगाज हो गया है। जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना और पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. खुशी राम ने मंत्रोच्चार के साथ पूजा कर ध्वजारोहण किया। 1964 से लगातार आयोजित हो रहे इस मेले में इस बार 100 से अधिक ऊंट पहुंच चुके हैं। मेले का स्वरूप पिछले कुछ वर्षों में बदला है। पहले यह मेला मुख्य रूप से गोवंश, विशेषकर बैलों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से पशुपालक बड़ी संख्या में आते थे, लेकिन कृषि के मशीनीकरण और आधुनिकीकरण के कारण अब गोवंश की जगह ऊंट, भैंस और बकरियों की संख्या बढ़ी है। 22 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में पशुपालन विभाग पशुओं के लिए चारा, पानी और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। जिला कलेक्टर ने मेले में दुधारू पशुओं की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया है। पशुपालन विभाग के निदेशक का कहना है कि इस तरह के पारंपरिक मेलों को बचाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। एसीएम धर्मेंद्र के अनुसार, यह मेला न केवल सामाजिक सौहार्द बढ़ाता है बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा करता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में मेले की रौनक कम हुई है और पशुपालकों की संख्या में भी गिरावट आई है, जिससे मेला समय से पहले ही समाप्त होने लगा है। पशुपालन विभाग समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर कृषि और पशुपालन को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।

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