ऐसे सांसद जो रोडवेज बस का इंतजार करते मिले:किरोड़ी बाबा बोले- मुझे जनता को बेवकूफ बनाने आता है, विधायक-सांसद ने एक साथ साइकिल चलाई

नमस्कार रोडवेज बसों में आपने किसी सीट पर सांसद/विधायक रिजर्व सीट लिखा देखा होगा। सीकर के सांसद अक्सर इन सीटों का उपयोग सफर के लिए करते हैं। बीकानेर में पूर्व मंत्री ने अपनों को जेल जाने की नसीहत दी है। दौसा में मंत्रीजी ने साफ कर दिया कि जनता को बेवकूफ बनाने की कला आती है। बालोतरा में सांसद-विधायक ने होनहार खिलाड़ी के साथ साइकिलिंग की। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. गोविंद राम मेघवाल की नसीहत ‘घुसपैठ’ से नेताजी सहमे हुए हैं। यहां ‘घुसपैठ’ का तात्पर्य न तो बांग्लादेश से भारत में घुसकर आधार कार्ड बनवाने वाले लोग हैं और न ही कश्मीर घाटी में घुसे पड़ोसी। नेताजी चेहरे से काफी चिंतित नजर आ रहे थे। चिंता घुसपैठ ही थी। पत्रकार ने सवाल किया- रामेश्वर डूडी जी के निधन के बाद RLP आपके एरिया में काफी एक्टिव है। हनुमान बेनीवाल काफी नजर आ रहे हैं। वोटबैंक खिसक सकता है? पत्रकार ने नेताजी की दुखती रग पर हाथ धर दिया। उनके क्षेत्र में हो रही घुसपैठ का उन्हें अंदाजा था। उन्होंने जवाब में तुरंत अपने नेताओं से अपील कर दी। कहा- जनता में पकड़ बनाओ। जनता में जाओ। जनता के मुद्दे उठाओ। पार्टी के लिए जेल भी जाना पड़े तो जाओ। गांधी-नेहरू भी जेलों में रहे थे। उन्होंने ‘वरना’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए अंजाम भी बताया- वरना RLP क्या, कोई भी अंदर घुस जाएगा। जहां रिक्त स्थान होगा वहां लोग घुसेंगे। उन्होंने तरकीब सुझाई- अगर मेरा विरोधी आज खाजूवाला में 10 हजार की रैली कर दे तो मैं महीने भर बाद ही 20 हजार की रैली कर दूंगा। पत्रकार ने यक्ष प्रश्न उछाला- आप मानते हैं कि आपकी पार्टी कमजोर हो रही है? नेताजी संभल गए- ऐसी बातें मीडिया में नहीं कह सकता। कुछ बातें अंदरूनी होती हैं। यह सुन कार्यकर्ता हंस पड़े। 2. किरोड़ी बोले-जनता को बेवकूफ बनाना आता है हमने बीए करते हुए राजनीति विज्ञान की कक्षा में एक प्रश्न का सामना किया था। प्रश्न था- राजनीति कला है या विज्ञान? दौसा में कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने उत्तर दे दिया कि राजनीति एक कला है। यह बात उन्होंने गुपचुप किसी के कान में नहीं कही। माइक लेकर सभी के सामने कहा। उन्होंने कहा- जनता के बीच में आना, भाषण देकर बेवकूफ बनाना, वोट ले जाना, चुनाव जीत जाना, यह थोड़ी-बहुत कला मैं जानता हूं। ज्यादा तो मुझे नहीं पता। राजनीतिक कला का जिक्र करने के बाद वे ‘भक्ति’ पर आए। उन्होंने कहा कि मीराबाई ने भगवान कृष्ण की बेशुमार भक्ति की थी। भक्ति से आदमी को शक्ति मिलती है। जनता में भक्ति जगाना भी आजकल राजनीति की ललित कला मानी जाती है। मंत्रीजी ने ‘बेवकूफ बनाकर चुनाव जीतने’ की बात के बाद यह भी कहा कि मुझ पर जनता की विशेष कृपा रही है। मैं जिसके लिए कहता हूं, आप उसे जिता देते हो। इसके बाद जनता ने जिंदाबाद के नारे लगाए। वातावरण काफी भक्तिमय हो गया। 3. चैंपियन के साथ सांसद-विधायक ने चलाई साइकिल गोविंद राम मेघवाल जी के उपरोक्त कथनानुसार माननीयों में निम्नलिखित परिवर्तन दिख रहे हैं। बाड़मेर-बालोतरा में सांसद उम्मेदाराम और विधायक हरीश चौधरी जुगल जोड़ी बनाकर जनता के बीच जा रहे हैं। पकड़ बना रहे हैं। मुद्दे उठा रहे हैं। सड़कों पर उतर रहे हैं। सड़क पर उतरने का ताजा दृश्य बालोतरा का है। यहां साइकिलिंग के क्षेत्र में देश के स्तर पर बालोतरा का नाम रोशन करने वाली लड़की इंद्रा कुमारी के साथ दोनों नेता साइकिल चलाते नजर आए। होनहार बिटिया का स्वागत किया। इंद्रा ने गोल्ड मेडल हासिल किया है। इससे पहले दोनों नेता SIR में कटे नामों की शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट के चक्कर काटते दिखे थे। गोविंदराम मेघवाल जी जिस ‘रिक्त स्थान’ का जिक्र कर रहे थे, उसे भरने में दोनों नेता भरपूर जोर लगा रहे हैं। 4. चलते-चलते.. राजनीति में यह बात अमर्यादित सी लगती है कि कोई नेता टिकट खरीद कर सीट हासिल कर ले। लेकिन सीकर सांसद अमराराम के लिए यह आम बात है। कामरेड अमराराम अक्सर रोडवेज डिपो की टिकट विंडो पर जाते हैं और जहां जाना हो, अपना सांसद पास दिखाकर वहां का टिकट लेकर बस में बैठ जाते हैं। साधारण परिवार में परवरिश हुई थी। इसलिए लग्जरी पर पैसा खर्च करना उन्हें व्यर्थ लगता है। सीकर वासियों का कहना है कि वे ईमानदार हैं। बस में सफर करना दिखावा नहीं, उनकी आदत है। अमराराम की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी शेयर की जा रही है। जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड पर वे एक जगह बैठे सीकर की बस का इंतजार कर रहे हैं। ‘प्रेमचंद के फटे जूते’ की तर्ज पर कलाकार लोग इस पर ‘भारतीय राजनीति में लीक से हटकर तस्वीर’ नामक निबंध लिख रहे हैं। अमराराम अपने रोडवेज के सफर को लेकर एक किस्सा भी सुनाते हैं। कहते हैं- मैं बस से सीकर जा रहा था। कंडक्टर ने मुझे पहचाना नहीं। मेरे एक सहयोगी जो साथ में सफर कर रहे थे, उन्होंने मजाक में झूठ फैला दिया कि इनका पास फर्जी है। कंडक्टर ने उनकी बात पर भरोसा कर लिया और रींगस थाने ले जाकर बस खड़ी कर दी। भागा-भागा इंचार्ज के पास गया। बोला-एक सवारी सांसद पास पर सफर कर रही है। इंचार्ज ने बाहर आकर बस में देखा तो कंडक्टर पर चिल्लाया- मूर्ख, ये कामरेड अमराराम हैं। (इनपुट सहयोग- अनुराग हर्ष (बीकानेर), राघवेंद्र गुर्जर (दौसा), विजय कुमार (बालोतरा), सुरेंद्र माथुर (सीकर)।) वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…

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