विश्वकर्मा इलाके में ऑक्सीजन प्लांट में हुए ब्लास्ट से 100 मीटर दायरे में एक दर्जन से ज्यादा मकान, दुकानें और फैक्ट्रियों की खिड़की, दरवाजे टूट गए और दीवारों में दरारें आ गईं। लोग बोले धमाक इतना जोरदार था कि ऐसे लगा जैसे भूकंप आ गया हो। थोड़ी देर बाद में पता चला कि फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ है। प्लांट उस दौरान 100 से ज्यादा सिलेंडर रखे थे। लोग इसी को लेकर डर रहे थे कि अगर चिंगारी इन तक पहुंच जाती तो इस क्षेत्र का क्या होता। पुलिस और सिविल डिफेंस ने सभी सिलेंडरों की जांच होने तक आस-पास के एरिया को सील कर दिया। कुछ सिलेंडर में लीकेज की आशंका बताई है। ऐसे में कई लोगों को दूसरी शिफ्ट कर दिया। घबराए लोग बोले एक ही सिलेंडर फटा है, अगर ज्यादा सिलेंडर में ब्लास्ट हो जाता तो इलाके में भारी नुकसान हो जाता। प्लांट में बिखरे सिलेंडर, दो घंटे तक खंगालते रहे शवों के टुकड़े ब्लास्ट के दौरान मजदूर मुन्ना के शरीर की चिथड़े पूरे प्लांट में बिखर गए। पुलिस और सिविल डिफेंस के जवान दो घंटे तक सर्च करते रहे। इसी तरह मैनेजर विनोद के दोनों पैर धड़ से अलग हो गए। अस्पताल में इलाज के दौरान विनोद ने भी दम तोड़ दिया। डीएनए जांच से पता चलेगा कि कौनसा अंग किस शरीर का है। दोनों लंबे समय से इसी फैक्ट्री में काम करते थे। मैनेजर विनोद मुरलीपुरा में पत्नी व 13 साल की बेटी के साथ रहते थे। बेटी रोज की तरह पिता के घर आने का इंतजार कर रही थी। काफी देर बाद घर पर हादसे का पता चला तो पत्नी बेसूद हो गई। एफएसएल जांच होगी थानाधिकारी रविन्द्र नरूका ने बताया कि ब्लास्ट के कारणों का पता एफएसएल जांच में ही लगेगा। पुलिस फैक्ट्री मालिक की भी तलाश कर रही है। फैक्ट्री का रिकॉर्ड भी तलाश किया जा रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने कागज जला दिए, लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई।


