साइबर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए भारत सरकार के इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) ने नया कदम उठाया है। आई4सी ने एआई तकनीक से लैस ‘आई-कैट’ सॉफ्टवेयर विकसित किया है, जो किसी भी क्षेत्र में सक्रिय मोबाइल नंबरों और सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण कर संदिग्ध नंबरों की पहचान कर लेगा। सबसे पहले इस सॉफ्टवेयर का पायलट प्रोजेक्ट राजस्थान के जयपुर रेंज में शुरू किया गया है। जयपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश ने बताया कि प्रथम चरण में अलवर, भिवाड़ी और खैरथल-तिजारा क्षेत्र को चुना गया। इस दौरान पुलिस ने 3.85 करोड़ मोबाइल नंबरों का डेटा सॉफ्टवेयर में अपलोड किया। एआई विश्लेषण के बाद 7.66 लाख संदिग्ध नंबर सामने आए। इनमें से हाई सस्पेक्ट स्कोर वाले 4476 नंबरों को ब्लॉक करवा दिया गया। ये सभी नंबर देशभर में साइबर ठगी के लिए उपयोग किए जा रहे थे। आई-कैट नें ऐसे पकड़े संदिग्ध नंबर मेवात के 7 साइबर हॉटस्पॉट से 3.85 करोड़ नंबरों को सॉफ्टवेयर में डाला, 4476 संदिग्ध नंबर ब्लॉक 1. पुलिस मोबाइल नंबरों का डेटा सॉफ्टवेयर में अपलोड करती है।
2. एआई तकनीक 6 पैरामीटर के आधार पर विश्लेषण करता है।
3. सबसे पहले, जिन नंबरों पर साइबर अपराध की शिकायत होती है, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है।
4. इसके बाद कॉल डिटेल्स, लोकेशन, सिम कार्ड कहां से जारी हुआ और सोशल मीडिया गतिविधियां देखी जाती हैं।
5. प्रत्येक नंबर का सस्पेक्ट स्कोर तय किया जाता है।
हाई स्कोर वाले नंबरों की पुलिस जांच करती है और फिर उन्हें ब्लॉक कर दिया जाता है। राजस्थान में मेवात और जयपुर रेंज ही क्यों? “आई4सी ने एआई बेस्ड सॉफ्टवेयर आई-कैट दिया है। अलवर, भिवाड़ी व खैरथल-तिजारा में शुरू किएपायलट प्रोजेक्ट का एनालिसिस करके जल्द ही रेंज के अन्य जिलों में इसे काम लिया जाएगा।”
– राहुल प्रकाश, रेंज आईजी जयपुर


