ऑपरेशन ‘कगार’ के नाम पर चल रहा ऑपरेशन, बढ़ाए जा रहे फोर्स के कैंप

{ मिसिर बेसरा : नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो का सदस्य है। 1 करोड़ रुपए इनाम। { पतिराम मांझी उर्फ अनल दा : बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी का सचिव । 1 करोड़ रुपए इनाम। {असीम मंडल उर्फ आकाश : सारंडा और सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय। 1 करोड़ रुपए इनाम। { अनमोल उर्फ सुशांत : झारखंड-बिहार स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य बड़ी घटनाओं का मास्टरमाइंड। { अजय महतो : प. सिंहभूम में सक्रिय है। दस्ते का सक्रिय सदस्य है। { मोछू उर्फ मेहनत : धनबाद और कोल्हान में आवाजाही करता है। यह भी इनामी है। { पिंटू लोहरा उर्फ टाइगर : विस्फोटक और हथियारों की लूट मामलों में सक्रिय। { सगन अंगारिया : यह सारंडा के दुर्गम इलाकों में आईईडी बिछाने में माहिर। { अश्विन : कोल्हान के जंगलों में नए कैडरों की भर्ती और ट्रेनिंग कराता है। {अमित मुंडा : सारंडा और पोड़ाहाट के जंगल में सक्रिय है। { रवि सरदार : कोल्हान क्षेत्र का एक कमांडर है। घात लगाकर हमला करता है। ऋषिकेश सिंह देव । चाईबासा मार्च 2026 । मतलब और ढाई महीना। इस ढाई महीने में झारखंड से माओवादियों को साफ किए जाने का टारगेट गृह मंत्रालय ने दिया है। ये ढाई महीना पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा में बचे मात्र 5 फीसदी माओवादियों का काल ग्रह होगा। सारंडा में इसकी तैयारी चरम पर है। एनाकांेडा 2.0 की तर्ज पर ऑपरेशन ‘कगार’ की तैयारियां चल रही हैं। पहले से सारंडा में 11 से ज्यादा सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर, आईआरबी व अन्य बटालियन का स्थायी कैंप है। अब झारखंड-ओडिशा बॉर्डर पर और पांच पारामिल्ट्री कैंप स्थापित हो रहे हैं। इसमें तीन झारखंड के हिस्से में हैं। इन कैंपों में तैनात जवान अब साइंटिफिक तकनीकी व ब्रेन गेम से वार की तैयारी में हैं। पिछले 3 महीने में माओवादियों ने बड़ी वारदात को अंजाम नहीं दिया है। जबकि एनआईए की रिपोर्ट की मानें तो एक-एक करोड़ के दो बड़े इनामी नेता मिसिर बेसरा, पतिराम मांझी इसी इलाके में छिपे हैं। वहीं अन्य की हिट लिस्ट तैयार है। छोटानागरा, किरिबुरू और मेघाहतुबुरू, थोलकोबाद, सेलाय, छोटानागरा, तिरीलपोसी और बिटकिलसोय, दीघा, करमपदा और जराईकेला, बालीबा, समठा, रोवाम के अलावे नए कैंप बाबुडेरा, नवागांव में स्थापित हो रहा। ये कैंप माओवादियों के गुजरने व प्रवास इलाके में बने हैं। सारंडा ढाई दशक तक माओवादियों के इस्टर्न इंडिया हेडक्वार्टर रहा। सैकड़ों इनकाउंटर, सैंकड़ों जवान शहीद हुए। ऑपरेशन एनाकोंडा चला। फिर नक्सली कोल्हान में चले आए। तीन साल कोल्हान में ऑपरेशन चला कर 2023 में फिर माओवादियों के बड़े लीडर सारंडा में घुस गए। यहां रहकर 2025 में पांच टन विस्फोटक ओडिशा से लूटी। कोल्हान के बाद सारंडा में अब बाबूडेरा, नवागांव, करमपदा जैसे इलाके में पगंडंडी आदि पर लैंड माइंस बिछा रखे हैं। सूत्रों की मानें तो ‘बूढ़ा पहाड़’ की तर्ज पर यहां फोर्स कार्रवाई कर रही है। { घेराबंदी के लिए ड्रोन और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल। { बाबुडेरा व ओडिशा इलाके के दुर्गम हिस्सों में नए बेस कैंप। {नक्सलियों के भागने के सभी रास्तों में चेकिंग प्वाइंट। { सैटेलाइट सर्विलांस में हाई-टेक ड्रोनों का इस्तेमाल हो रहा है। { कोबरा और झारखंड जगुआर जैसे जंगल युद्ध के स्पेशलिस्ट फ्रंटलाइन में। 01. रसद की कमी : सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के “सपोर्ट सिस्टम’ ध्वस्त कर दिया है। मददगार दुकानों पर नजर है। इसके कारण भोजन मिलने में परेशानी। 02.आत्मसमर्पण : पुलिस की पुनर्वास नीति के कारण कई नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं। हाल ही में दिसंबर 2025 में एक नक्सली ने सरेंडर किया। पोस्टर वॉर कर इमोशनल अपील की जा रही है 03.सिविक एक्शन प्लान: तैनात पुलिस बलों ने गांव-गांव में मेडिकल कैंप, सिविक कैंप लगाकर ग्रामीणों से वार्ता शुरू की है। इससे पुलिस के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ रहा।

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