खंडवा में ओंकारेश्वर बांध परियोजना से अचानक छोड़े गए पानी से आफत सी बन गई। मोरटक्का में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच बह गई। इस दौरान काम कर रहे मजदूरों की जान पर आ गई। एप्रोच का आधा हिस्सा बह जाने से बीच नर्मदा में मजदूर फंस गए। बाद में नाव भेजकर 10 मजदूरों का रेस्क्यू कराया गया, उन्हें सुरक्षित खेड़ीघाट पर छोड़ा गया। बिजली निर्माण के लिए छोड़ते हैं पानी
दरअसल, ओंकारेश्वर बांध से लगातार टरबाइन चलाकर बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। टरबाइन से सतत चार-चार घंटे बिजली बनाई जा रही है। ऐसे में इकट्ठे हुए पानी को एक साथ नदी में छोड़ा जाता है। जिससे कि बहाव तेज होकर नर्मदा का जल स्तर बढ़ जाता है। ओंकारेश्वर के कई घाट तक डूब जाते हैं। हालांकि, सायरन बजाकर नर्मदा स्नान कर रहे श्रद्वालुओं को अलर्ट कर दिया जाता है। ताकि अचानक जल स्तर बढ़ने से कोई घटना ना हो जाए। चार दिन पहले भी बह गया था एप्रोच मोरटक्का में इंदौर-अकोला-खंडवा रेल रूट पर बन रहे रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण गुजरात की मंगलम बिल्डकॉन कंपनी कर रही है। इसी कंपनी के द्वारा मोरटक्का में नेशनल हाईवे का ओवरब्रिज भी बनाया जा रहा है। फिलहाल रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण के दौरान पानी के ऊपर मिट्टी डालकर एप्रोच रोड बनाई गई थी। ताकि वाहन और खासकर क्रेन मशीन खड़ी हो सकें और पिल्लर में कांक्रीट भरा जा सके। डैम से अचानक छाेड़े गए पानी से एप्रोच सड़क बह गई। अब फिर तीन से चार दिन में होगी तैयार
निर्माण कंपनी के ठेकेदार पंकज पटेल ने बताया कि, बिना एप्रोच सड़क के पानी के भीतर काम नहीं किया जा सकता है। वाहनों की आवाजाही और मजदूरों को कार्य करने के लिए सुरक्षित अस्थायी एप्रोच सड़क बनाई जाती है। लेकिन पानी के तेज बहाव में वह बह जाती है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, चार दिन पहले भी एप्रोच बह गई थी। उसे वापस बनाने में चार दिन लग गए, आज फिर वह बह गई। एक बार एप्रोच बनाने में 5 लाख रूपए का खर्च आता है।


