ओबीसी आरक्षण के विरोध में बयान का मामला:तन्खा ने शिवराज के खिलाफ मानहानि का केस वापस लिया

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा के बीच मानहानि विवाद आपसी सहमति के बाद सुलझ गया है। मंगलवार को तन्खा की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि वे शिवराज के खिलाफ दायर आपराधिक और सिविल मानहानि के मामलों को वापस ले रहे हैं। जस्टिस एमएम सुंदरैश व जस्टिस एनके सिंह की पीठ को सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने यह जानकारी दी। दरअसल, 2021 में मप्र पंचायत चुनावों के दौरान भाजपाइयों ने तन्खा पर ओबीसी आरक्षण का विरोध करने का बयान दिया था। इसके खिलाफ तन्खा ने सेशन कोर्ट में सिविल और आपराधिक मानहानि का दावा करते हुए 10 करोड़ मुआवजे और तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान, तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा व पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सेशन कोर्ट ने तीनों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए। भाजपा नेताओं ने हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन राहत नहीं मिली तो मामला 2024 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 11 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने वारंटों पर रोक लगाकर तन्खा से जवाब मांगा। भाजपा का तर्क है कि बयान विधानसभा के भीतर दिए गए थे और संविधान के अनुच्छेद 194(2) के तहत संरक्षित हैं। तन्खा की ओर से कपिल सिब्बल और सुमीर सोढ़ी ने पैरवी की। जेठमलानी ने बताया कि दोनों नेताओं ने संसद में मुलाकात के बाद आपसी सहमति से विवाद हल करने का निर्णय लिया है। मामले को सुलह से समाधान तक ले जाने में सिब्बल ने अहम भूमिका अदा की है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट नए मामले का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की सराहना करते हुए कहा कि राजनीतिक बयानों से जुड़े मामलों में अदालतों को बेहद सावधानी से कदम रखना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का आग्रह था, शिवराज भी आकर मिले थे : विवेक तन्खा
तन्खा ने बताया कि मामले में सुप्रीम कोर्ट का विशेष आग्रह था। कोर्ट ने दोनों पक्षों से कहा था आप काफी वरिष्ठ लोग हैं। बेहतर होगा कि आपस में बात कर समाधान निकाल लें। शिवराज मुझसे मिले। संसद में भी 15 मिनट उन्होंने इस मुद्दे पर बात की। कपिल सिब्बल ने भी आग्रह किया कि 4 साल हो गए हैं, सार्वजनिक जीवन में बड़ा दिल रखना चाहिए। मुझे लगा कि मामले को आगे बढ़ाना ठीक नहीं हैं।

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