जबलपुर में सोमवार को ‘आरक्षण जनआंदोलन’ की शुरुआत करते हुए महासभा ने सीधे राज्य सरकार को चुनौती दी है। महासभा ने जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम भेजे ज्ञापन में 2 मांगे उठाईं हैं। पहली मुख्यमंत्री मोहन यादव पर विवादित टिप्पणी करने वाले तथाकथित संत आनंद स्वरुपानंद पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लगाकर तत्काल गिरफ्तारी की जाए। दूसरी प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर लगी रोक को अविलंब समाप्त किया जाए। ओबीसी महासभा के जिलाध्यक्ष छोटे पटेल ने सरकार को सीधी चेतावनी दी कि 27 फीसदी आरक्षण पर लगी रोक ने हजारों नौकरियों को रोक दिया है, जिससे लाखों ओबीसी युवाओं का भविष्य अधर में लटका है। यह मामला वर्ष 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा आरक्षण को 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी करने के बाद शुरू हुआ था। हाईकोर्ट ने 50 फीसदी की सीमा का हवाला देते हुए इस पर आंशिक रोक लगा दी, जिसके बाद से 13 फीसदी पद होल्ड पर हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर 8 अक्टूबर से नियमित सुनवाई होने वाली है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। ओबीसी महासभा की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य राकेश लोधी ने पूर्व में भी सरकार पर 13 फीसदी होल्ड को न्यायपूर्ण तरीके से न हटाने का आरोप लगाया है। महासभा का कहना है कि आरक्षण उनका संवैधानिक अधिकार है, एहसान नहीं। यदि सरकार तय समय में 27 फीसदी आरक्षण पूरी तरह लागू नहीं करती है, तो वे पूरे प्रदेश में ‘आरक्षण जनआंदोलन’ शुरू करेंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं पिछड़ा वर्ग से आते हैं। महासभा ने उन पर संत आनंद स्वरूपानंद की अभद्र टिप्पणी को पूरे ओबीसी समाज का अपमान बताया है। महासभा ने आरोप लगाया है कि संत की टिप्पणियां ‘जातीय विद्वेष’ फैलाने वाला अपराध हैं, इसलिए NSA लगाकर उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, महासभा ने केंद्र सरकार से अनुसूचित जाति और जनजाति के समान ही ओबीसी वर्ग को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए ‘पिछड़ा वर्ग अत्याचार निरोधक अधिनियम’ बनाने की मांग भी रखी है। जातिगत जनगणना की पुरानी माँग को भी दोहराया गया है।


