ओरछा में रामराजा सरकार का शाही विवाह:नगर भ्रमण कर रात 1 बजे जनकपुरी पहुंची बारात; उमा भारती ने बहन बनकर लिया नेग

निवाड़ी जिले के ओरछा में रामराजा सरकार का शाही विवाह समारोह लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में रात 1:00 बजे रामराजा सरकार की बारात जनकपुरी पहुंची। वहां प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती बारात का इंतजार कर रही थी, उन्होंने पहले ही कह दिया था कि वह रामराजा सरकार की बहन है। इसलिए जब बारात जनकपुरी से दोबारा फिर रामराजा मंदिर पहुंची तो पूर्व मुख्यमंत्री ने बारात वापसी के बाद एक बहन की तरह भाई की पालकी का रोककर ‘नेग’ लिया। इसके बाद पुजारी जी ने उन्हें शगुन दिया और बारात राम राजा मंदिर के अंदर आई। रामराजा सरकार दूल्हे के रूप में पालकी में विराजमान होकर निकले। इस शाही बारात में घोड़े, मशालें और छत्र-चंवर शामिल थे। रामराजा सरकार ने खजूर पत्ती से बना पारंपरिक बुंदेली मुकुट धारण किया था। पूरे नगर को जनकपुरी की तरह सजाया गया था। बारात विशम्भर (जानकी) मंदिर पहुंची, द्वारचार की शाही रस्म नगर में भव्य भ्रमण के बाद रामराजा सरकार की बारात विशम्भर (जानकी) मंदिर पहुंची, जहां द्वारचार की रस्म बड़े वैभव के साथ हुई। बुंदेली विवाहगीतों ने माहौल को अलौकिक बना दिया। देश-विदेश से आए करीब एक लाख श्रद्धालु दूल्हे रूप में रामराजा के दर्शन कर मंत्रमुग्ध हो उठे। विदेशी पर्यटकों ने भी इस अनोखी परंपरा को अद्वितीय बताते हुए कहा कि ओरछा की धरती पर मानो स्वर्ग उतर आया हो। रात 1 बजे बारात जनकपुरी पहुंची और रामसिया विवाह सम्पन्न हुआ। मंगलवार को शाम 6 बजे रामराजा सरकार का दूल्हे के तौर पर मंदिर के अंदर पूजन हुआ था। 7 बजे भगवान की विशाल बारात नगर भ्रमण पर निकली थी। जहां दूल्हे सरकार के तौर पर राम राजा का तिलकोत्सव होगा और फिर सीताराम विवाह वर्षगांठ संपन्न होगी। इस दौरान पूर्व सीएम उमा भारती ने कहा कि दूल्हा सरकार मेरे भाई हैं। मैं नेग के लिए पालकी रोकूंगी। भगवान को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया यह आयोजन प्राचीन बुंदेली परंपराओं के अनुरूप हुआ। रामराजा सरकार को विशेष ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया, जो ओरछा के किलेबंद क्षेत्र में केवल “राजा” को मिलता है। मंदिर के बजाय राजमहल में विराजने वाले रामराजा सरकार की बारात में दर्जनों घोड़े आगे रहे। उनके पीछे हाथियों पर रक्षक और मध्य में दूल्हा स्वरूप रामराजा सरकार की पालकी रही। रामराजा सरकार ने सोने के मुकुट के स्थान पर पारंपरिक बुंदेली पद्धति से निर्मित खजूर के पत्तों का दूल्हे का मुकुट धारण किया। पालकी के एक ओर छत्र और दूसरी ओर चंवर के साथ सैकड़ों वर्ष पुराने बुंदेली साम्राज्य की भव्यता दिखी। रात में पूरा ओरछा नगर दूधिया रोशनी से जगमगाया। देखिए तस्वीरें… इस तरह चला तीन दिवसीय समारोह श्री राम विवाह महोत्सव के 23 तारीख को रामराजा सरकार का तेल चढ़ा था, जिसमें सवा लाख दीपो से ओरछा के कंचना घाट को जगमग किया गया। मंदिर के प्रधान पुजारी रमाकांत शरण महाराज ने 24 तारीख को दोपहर 11:00 बजे भगवान को हल्दी चढ़ाई 2:00 बजे भगवान का मंडप पूजन हुआ। मंदिर प्रबंधक और कलेक्टर जमुना भिड़े ने मंडप पूजन कर इसकी शुरुआत की। उसके बाद शाम 4 बजे से रात 1 बजे तक विशाल प्रीतिभोज हुआ।

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