झारखंड में औद्योगिक विकास के लिए सरकार नौ विभागों के 23 कानून में बदलाव करेगी। उद्योग और विधि विभाग ने इस पर काम शुरू कर दिया है। विभागों को वैसे कानून के प्रावधानों में बदलाव का सुझाव दिया है, जो या तो अप्रासंगिक हो गए हैं, या निवेशकों को उससे परेशानी हो रही है। कानून में संशोधन के लिए पहले विधि विभाग से मंजूरी ली जाएगी। फिर कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति के बाद इससे संबंधित विधेयक लाया जाएगा। जिन कानूनों में बदलाव होगा, उनमें वन पर्यावरण विभाग के दो, गृह कारा, आपदा एवं अग्निशमन सेवा का एक और राजस्व भूमि सुधार एवं निबंधन विभाग का एक कानून शामिल है। वहीं ऊर्जा विभाग का एक, उद्योग विभाग के दो, श्रम नियोजन के आठ, विधि विभाग का एक, ग्रामीण कार्य का एक और शहरी विकास एवं आवास विभाग के छह कानून हैं। -शेष पेज 9 पर जानिए… क्या बदलाव होंगे और इसका फायदा क्या निवेशकों को ज्यादा सहूलियत देने की कवायद. आवंटेित भूमि की प्रकृति में बदलाव के प्रावधान जोड़े जाएंगे। अभी कई प्रकार की जमीन की प्रकृति में बदलाव नहीं हो सकता है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया में सुधार होगा। भूमि उपयोग प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जाएगा। विभिन्न श्रेणी के उद्योगों के लिए न्यूनतम चौड़ाई वाली सड़क का प्रावधान होगा। राज्य में उपलब्ध औद्योगिक भूमि का जीआईए डेटाबैंक बनेगा। इसे भारत औद्योगिक भूमि बैंक से जोड़ जाएगा। औद्योगिक भूखंडों में भूमि की क्षति को कम करने के लिए भवन नियमों में संशोधन होगा कॉमर्शियल भूखंडों के लिए भवन नियमों में संशोधन किया जाएगा। भवन अनुमोदन और संयुक्त निरीक्षण में तीसरे पक्षों की भूमिका बढ़ाई जाएगी। भवनों के पूर्णता प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। कुछ उद्योगों में महिलाओं के काम करने पर लगे प्रतिबंध को हटाया जाएगा व्यवसायों (कारखानों) में महिलाओं को रात्रिकालीन रोजगार की अनुमति मिलेगी दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान में महिलाओं को रात्रिकालीन रोजगार की अनुमति मिलेगी कारखानों के लिए कार्य समय सीमा में संशोधन किया जाएगा। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए कार्य समय सीमा में संशोधन किया जाएगा। कारखानों के बंद होने, छंटनी और छंटनी के लिए श्रमिकों की सीमा में बदलाव होगा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स के कांसेंट टू अॉपरेट आैर स्टेबलिस टू अॉपरेट के प्रावधान बदले जाएंगे। -शेष पेज 9 पर


