शहर से जुड़ी एक प्राइवेट हॉस्पिटैलिटी कंपनी में कथित करोड़ों के लेन-देन विवाद ने अब आपराधिक मोड़ ले लिया है। पुलिस ने हॉक्स हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के एक डायरेक्टर इशान पसरीचा के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) का केस दर्ज किया है। शिकायत गोबिंद बट्टा नामक व्यक्ति ने दी, जो पेशे से वकील हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2021 में इशान पसरीचा ने उन्हें और अन्य लोगों को मुगलई फूड बिजनेस के नाम पर पार्टनरशिप का झांसा दिया। कंपनी के तहत कपूरथला, फगवाड़ा, मोहाली और जालंधर में क्लाउड किचन और रेस्टोरेंट शुरू किए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने अलग-अलग चरणों में करीब 27–28 लाख रुपए निवेश किए और बाद में घर पर लोन लेकर भी कंपनी में पैसा लगाया। विभागीय जांच में हुआ खुलासा, नियम तोड़े आरोप है कि कंपनी के खातों से बड़े स्तर पर रकम निकालकर इशान पसरीचा ने अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर ली। शिकायत के अनुसार, करीब 90 लाख रुपए कंपनी खाते से निजी उपयोग में ले जाए गए, जिनके लिए न तो कोई वैध बोर्ड रेजोल्यूशन था और न ही बाकी डायरेक्टरों की सहमति। मामले की पहले विभागीय जांच हुई। शुरुआती रिपोर्ट में इसे सिविल विवाद बताया गया था क्योंकि कंपनी खातों के सेटलमेंट को लेकर सिविल कोर्ट में केस भी लंबित है। लेकिन आगे की जांच के दौरान यह सामने आया कि संबंधित बैंक खाते को अकेले ऑपरेट करने का अधिकार इशान पसरीचा के पास था और कथित ट्रांसफर के समर्थन में कोई औपचारिक प्रस्ताव (रेजोल्यूशन) पेश नहीं किया गया। जिला अटॉर्नी लीगल की राय पर हुआ केस दर्ज जिला अटॉर्नी (लीगल) ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए राय दी कि कंपनी डायरेक्टर, कंपनी की संपत्ति के ट्रस्टी की तरह होते हैं। यदि वे कंपनी का पैसा निजी इस्तेमाल में लगाते हैं तो उनके खिलाफ IPC की धारा 406 और 409 के तहत आपराधिक मामला बनता है। इस कानूनी राय के आधार पर थाना जमालपुर पुलिस ने इशान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।


