मुनेश्वर साहु| सिसई सिसई में 15 दिनों से जलापूर्ति ठप है। विभागीय उदासीनता के कारण इस भीषण गर्मी में सिसई के लगभग सात-आठ हजार पानी कनेक्शन धारियों के बीच पानी के लिए हाहाकार मच गया है। रात के अंधेरे में लोग पानी की जुगाड़ में जुट जाते हैं। सिसई प्रखंड के कुदरा भदौली सहित मुख्यालय के सात आठ हजार से अधिक घरों पर पानी मुहैया कराने वाले सिसई के पानी टंकी से सप्लाई 15 दिनों से बंद हो गया है। क्योंकि फिल्टर प्लांट को पानी देने के लिए इंटेक वेल जिस कंस नदी पर आश्रित है वह नदी सूख चुकी थी। गर्मी के साथ ही नदी की आंतरिक व्यवस्था सूखने लगा है। पेयजल कर्मी कच्चा बांध बांधकर तो कभी जेसीबी से खुदाई कराकर इंटकवेल के पास पानी जमा करने के जद्दोजहद में लगे रहते हैं। तब जाकर पानी सप्लाई हो पाती है। इधर पानी कमी हो गई थी, इसी दौरान मशीन को चालू कर दिया जिससे एक मोटर जल गया है। स्थानीय मिस्त्री द्वारा मोटर का मरम्मत किया गया। नदी में पानी जमा हो गया है फिल्टर भी बन गया है, अब जल मीनार के समीप बिजली का ट्रांसफार्मर जल गया है। इस संबंध में जल मीनार कर्मी मकीम अंसारी ने बताया पर्याप्त पानी सप्लाई के लिए प्रतिदिन ढाई तीन लाख लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है। जिस नदी में इंटेकवेल है। वह मार्च अप्रैल महीने में ही पूरी तरह सूख जाता है। जनवरी-फरवरी से ही कच्चा बांध बनाकर पानी रोकने का काम हम शुरू कर देते हैं ।फिल्टर प्लांट को पानी देने के लिए 7 से 8 घंटा चलाना जरूरी है। जबकि अभी 24 घंटे में रिक्रूट कर दो सेटिंग बनाकर चला पा रहे मोटर के आधा घंटा चलाते हैं। पानी खींचने के लिए लगाया गया जॉनसन पाइप पानी की सतह से बाहर आ जाता है और पानी देना बंद कर देता है। नदी में बालू नहीं होने के कारण गर्मी बढ़ते ही नदी की आंतरिक जलधारा में सूखने लगते हैं। इंटेकवेल ट्रांस प्लांट में मोटर लगा हुआ। एक मोटर का मरम्मत करा लिया गया है। कच्चे बांध को फिर से बांध कर पानी जमा किया गया है। अब ट्रांसफार्मर जल गया है, ठीक होगा : बीडीओ प्रखंड विकास पदाधिकारी रमेश कुमार यादव ने बताया मोटर जल गया था। एक मोटर का मरम्मती कर लिया गया है। इधर ट्रांसफार्मर जल गया है। बिजली विभाग से संपर्क कर शीघ्र मरम्मति या बदलकर पानी सप्लाई किया जाएगा।इस संबंध में पेयजल स्वच्छता विभाग के कनीय अभियंता रतन खलखो के मोबाइल( 8809018585)पर दो बार संपर्क किया गया, रिंग गया,पर उठाना मुनासिब नहीं समझे। बताया जाता है कि जेई कभी कभार पीएचडी कार्यालय सिसई आते हैं


