कचरा डंप हटवाने के लिए साढ़े चार साल केस लड़ा, अब यहां का सौंदर्यीकरण कर शहीद भगत सिंह का इतिहास बताएगी जेआईसी

भास्कर न्यूज | जालंधर एक वक्त मॉडल टाउन श्मशान घाट के सामने से गुजरना लोगों के लिए आसान नहीं होता था। यहां कचरे का डंप होने से लोग अकसर अपने मुंह पर कपड़ा रखकर गुजरते थे, अब इसी जगह से गुजरने वाले लोग शहीद भगत सिंह की जीवनी से रूबरू होंगे। मॉडल टाउन जॉइंट एक्शन कमेटी ने यहां कचरे का डंप हटवाने के लिए पहले करीब साढ़े चार साल तक लड़ाई लड़ी, अब जब 2024 के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद डंप खत्म कर दिया गया तो कमेटी यहां शहीद-ए-आजम का स्मारक बनवाकर इलाके का सौंदर्यीकरण करने में जुटी है। कमेटी के अनुसार, मार्च 2026 तक निर्माण पूरा हो जाएगा और कोशिश है कि शहीद-ए-आजम के शहीदी दिवस पर इसे जनता को समर्पित कर दिया जाए। कमेटी के प्रधान जसविंदर सिंह साहनी और चेयरमैन वरिंदर मलिक ने बताया कि ‘इस जगह पर 12 फुट ऊंची और 32 फुट चौड़ी विशेष दीवार बनाई जा रही है। इस पर शहीद भगत सिंह की विशाल तस्वीर के साथ उनके जीवन और विचारों से जुड़ा इतिहास नक्काशी के साथ उकेरा जाएगा। स्मारक की सुंदरता बढ़ाने के लिए इसके आसपास ग्रीन बेल्ट भी विकसित की जाएगी।’ उन्होंने बताया, ‘स्मारक की दीवार पर सफेद, लाल और काले रंग के विशेष पत्थर लगाए जाएंगे, जिन पर नक्काशी कर शहीद भगत सिंह के जीवन से जुड़ी जानकारी लिखी होगी। विदेशी ग्रेनाइट का इस्तेमाल कर स्मारक को और भव्य रूप दिया जाएगा। स्मारक के चारों ओर खंभे लगाए जाएंगे, जिन पर आकर्षक लाइटें लगाकर इसे विशेष पहचान देने की कोशिश है। इसके लिए राजस्थान और मध्य प्रदेश के ग्वालियर से खास किस्म का पत्थर मंगवाया गया है। जयपुर के कारीगर इसका निर्माण करेंगे। स्मारक का मकसद लोगों को शहीद भगत सिंह के जीवन, विचारों और व्यक्तित्व से परिचित कराने के साथ इसे शहर का एक प्रमुख सेल्फी पॉइंट बनाना है। करीब 15 से 20 लाख रुपए की लागत से तैयार होने वाले इस स्मारक का पूरा फ‌ंड भी जॉइंट एक्शन कमेटी की ओर से इक्ट्ठा किया गया है। इसके साथ ही पास में लगे पीपल के पेड़ की बाउंड्री वॉल पर भी ग्रेनाइट लगाया जाएगा। इस काम में कमेटी के ट्रेजरर ललित तरिखा, पीआरओ स्वतंत्र चावला, जगदीप नंदा, मनदीप मोंगा, कर्नल अमरीक सिंह, लखविंदर चाहल, रविंद्र चाहल और हरदीप सिंह गोल्डी समेत कई सदस्य सहयोग कर रहे हैं। गौरतलब है कि इस जगह पर पहले कूड़े का डंप था। इसे हटवाने के लिए जॉइंट एक्शन कमेटी ने साढ़े चार वर्षों तक संघर्ष किया। कमेटी के प्रधान जसविंदर सिंह साहनी ने इस मांग को लेकर भूख हड़ताल तक की। 2024 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद डंप को हटाया गया।

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