हनुमानगढ़ जंक्शन की भट्ठा कॉलोनी में भूमिगत कचरा पात्र में मांस-मीट के अवशेष डालने को लेकर कॉलोनीवासियों ने बुधवार को विरोध दर्ज कराया। अरोड़वंश धर्मशाला के पास स्थित मीट-मांस का कारोबार करने वाले दुकानदारों पर ये अवशेष डालने का आरोप लगाया। सूचना मिलने पर नगर परिषद के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर दुकानदारों को चेतावनी दी और भविष्य में ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई के लिए पाबंद किया। कॉलोनीवासियों का कहना है कि भूमिगत कचरा पात्र में मांस के टुकड़े डालने से उठने वाली तेज बदबू के कारण वहां खड़ा होना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीट की दुकान के संचालक नगर परिषद के स्वामित्व वाले भूमिगत कचरा पात्र में जबरन हड्डियां और मांस के टुकड़े डालते हैं। इसके अलावा, वे मोहल्ले में भी खुले में मीट का कचरा फैलाते हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, मीट की दुकानों के आगे और पीछे दोनों तरफ शटर लगे हैं। आगे की तरफ भूमिगत कचरा पात्र में मीट के टुकड़े डाले जाते हैं, जबकि पीछे के गेट से मोहल्ले में मीट और हड्डियों के टुकड़े खुले में फेंक दिए जाते हैं। इससे पूरे मोहल्ले में दुर्गंध फैलती है, जिससे रहना, खाना-पीना प्रभावित होता है। कॉलोनीवासियों ने बताया कि इससे बीमारियां फैलने का अंदेशा बना रहता है और आवारा कुत्तों का झुंड भी इकट्ठा हो जाता है, जिससे उनके काटने का भय बना रहता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बहुत से दुकानदार अनाधिकृत रूप से दुकानें चला रहे हैं और उनके पास कोई लाइसेंस भी नहीं है। कॉलोनीवासियों ने मांग की है कि मीट दुकानों के संचालकों को खुले और भूमिगत कचरा पात्र में मांस/मीट के टुकड़े और हड्डियां डालने से रोका जाए, अन्यथा मोहल्लेवासियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। नगर परिषद के स्वच्छता इंचार्ज विनोद कण्डा ने बताया कि मोहल्ले में स्थापित भूमिगत कचरा पात्र केवल सूखे कचरे के लिए था, लेकिन आसपास मांस-मीट की दुकानें संचालित करने वाले रात को किसी समय चोरी-छिपे मांस-मीट के अवशेष डाल जाते हैं। इन्हें पूर्व में भी पाबंद किया गया था, लेकिन वे नहीं माने। अब इन्हें दोबारा पाबंद किया गया है। अगर उन्होंने भूमिगत कचरा पात्र में अपनी दुकानों का कचरा डाला तो नगर परिषद की ओर से इनके खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि भूमिगत कचरा पात्र को साफ करवाकर दोबारा रखवाया गया है।


