मध्य प्रदेश के कटनी जिले में कोयले के विशाल भंडार का पता चला है। बड़वारा तहसील के लोहरवारा ग्राम पंचायत के सलैया केवट इलाके में उमड़ार नदी के किनारे भारी मात्रा में कोयला मिलने की बात सामने आई है। यह खोज जिले की खनिज संपदा में एक और महत्वपूर्ण वृद्धि मानी जा रही है, जो पहले ही सोने की मौजूदगी के संकेतों के लिए चर्चा में रहा है। जानकारी के अनुसार, उमड़ार नदी किनारे स्थित एक रेत खदान में खनन के दौरान अचानक पत्थर जैसा काला पदार्थ निकलने लगा। ग्रामीणों को जब पता चला कि यह उच्च गुणवत्ता वाला कोयला हो सकता है, तो मौके पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। आज सुबह से ही ग्रामीण बोरियों और साइकिलों पर कोयला भरकर ले जा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग सतर्क हो गया है। जिला खनिज अधिकारी रत्नेश दीक्षित ने अवैध उत्खनन को रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि उमड़ार नदी के पास कोयला निकलने की सूचना मिली है। जल्द ही खनिज विभाग और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की टीम मौके पर पहुंचेगी। यह टीम सैंपलिंग और सर्वे करेगी, जिससे कोयले के भंडार के फैलाव और उसकी कैलोरीफिक वैल्यू (ऊष्मीय मान) के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। लगभग पांच महीने पहले कटनी में आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 56,400 करोड़ रुपए के एमओयू (MOU) साइन किए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में क्रिटिकल मिनरल्स, सोने और अब लिग्नाइट व थर्मल कोल के भंडार का मिलना इस क्षेत्र की समृद्ध भूगर्भीय संरचना का प्रमाण है। यदि यहां कोयले की बड़ी खदान विकसित होती है, तो यह प्रदेश के राजस्व और औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।


