कन्हैयालाल हत्याकांड की तीसरी बरसी पर रिलीज होगी ‘ज्ञानवापी फाइल्स’:प्रोड्यूसर बोले- लोगों की आत्मा झकझोरेगी ये फिल्म, लॉरेंस पर भी बना रहे वेब सीरीज

राजस्थान के उदयपुर में तीन साल पहले 28 जून 2022 को हुए तालिबानी हत्याकांड में जान गंवाने वाले कन्हैयालाल साहू (टेलर) पर बनी हिंदी फिल्म ‘ज्ञानवापी फाइल्स ए टेलर मर्डर स्टोरी’ 27 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म का निर्देशन भरत एस. श्रीनाते ने किया है। जयंत सिन्हा ने इसकी स्क्रिप्ट लिखी है। फिल्म में कन्हैयालाल के किरदार में बॉलीवुड एक्टर विजय राज है। रणवीर दुग्गल, प्रीति झांगियानी और आदित्य राघव भी अहम किरदार निभाएंगे। फिल्म को अमित जानी ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म को लेकर भास्कर ने अमित जानी से बात की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल : आप उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड पर फिल्म बना रहे हैं, क्या वजह रही कि ये सब्जेक्ट चुना? जवाब : पूरी दुनिया में एक कट्टरपंथी सोच सनातन धर्म को मानने वाले लोगों का गला काटने को आतुर है। इसी निर्ममता की सोच का चरमोत्कर्ष उदयपुर में लांघा गया था। कन्हैयालाल साहू तो उदयपुर का एक आम दर्जी था। वो इनके मजहब के खिलाफ, इनकी कुरीतियों के खिलाफ या फिर इनके सेंटर्स या संगठनों के खिलाफ नहीं बोल रहा था या न लिख रहा था। वो तो दुकान पर काम कर परिवार पाल रहा था। ऐसे में मुझे लगा कि इस सब्जेक्ट के साथ में फिल्म बनाकर लोगों के सामने लानी चाहिए। फिल्म का मकसद कन्हैयालाल के परिवार का दर्द बताना और आतंकी सोच को एक्सपोज करना है। सवाल : उस समय देश के अलग-अलग कोनों में कुछ और हत्याएं भी हुई थीं। क्या फिल्म में उन सभी की कहानी है ? जवाब : उस समय ज्ञानवापी मामले में लाइव टीवी पर एक मुस्लिम स्कॉलर ने तत्कालीन बीजेपी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा पर बेहद अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी की। जब वो बार-बार इसे दोहरा रहा था तो उसका जवाब देते हुए नूपुर शर्मा ने वो बात कही, जिस पर बहुत विवाद हो गया था। इसी बयान को लेकर वो लोग सड़कों पर उतरे और सर तन से जुदा के नारे लगाने लग गए थे। कन्हैयालाल के बारे में भी ये कहा गया था कि उन्होंने भी नूपुर शर्मा के बयान का समर्थन किया था। हमने फिल्म में सच्चाई दिखाई है कि कैसे उनके साथ कॉन्सपीरेसी की गई थी। जब ये फिल्म लोग देखेंगे तो ये उनकी आत्मा को झकझोरेगी। सवाल : नूपुर शर्मा के बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी की थी, क्या वो भी फिल्म में है? जवाब : सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नूपुर तुम्हारी वजह से एक व्यक्ति का गला कट गया है। देश के लोग सुप्रीम कोर्ट जैसी बड़ी संवैधानिक और न्याय की सर्वोच्च संस्थाओं से इस तरह की टिप्पणियों की अपेक्षा नहीं करते हैं। नूपुर शर्मा के साथ जो बीता है और जो बीत रहा है, उसे तो यहां कैमरे पर बताया भी नहीं जा सकता है। वो जिस पार्टी में थी उस पार्टी ने भी उसे सस्पेंड कर दिया। सवाल : आप फिल्म को लेकर पहले कन्हैयालाल के परिवार से भी मिले थे, उन्होंने क्या बताया था? जवाब : वो तो बस रोते हैं। कन्हैयालाल साहू की याद आते ही उनके आंसू निकल पड़ते हैं। इंसाफ के इंतजार में आज भी कन्हैयालाल की अस्थियां गंगा में विसर्जित नहीं हुई है। ऐसे में मैंने भी ज्यादा उनके जख्म कुरेदना ठीक नहीं समझा। फिल्म को लेकर मैंने उनके आस-पड़ोस वालों से, पुलिस अधिकारियों और कन्हैयालाल के दोस्तों से बात कर, पुलिस की केस डायरी और NIA की चार्जशीट पर रिसर्च की है। सवाल : क्या फिल्म चार्जशीट बेस्ड रीयल स्टोरी की तरह है या फिर इसमें क्रिएटिव लिबर्टी ली गई है? जवाब : शहर का नाम, किरदारों के नाम, मुकदमा, धाराएं, वारदात का तरीका तो सब असल ही होंगे। हां, कहानी को मनोरंजक ढंग से कहने के लिए कुछ क्रिएटिव फ्रीडम ली गई है। ये कहानी पाकिस्तान भी जाएगी, क्योंकि NIA की चार्जशीट में दो आरोपियों के पाकिस्तान में होने की बात है। सवाल : आप पर आरोप है कि सेंसेटिव मुद्दों को फिल्म के जरिए हवा देते हैं, आपकी दूसरी फिल्मों के सब्जेक्ट भी ऐसे है? जवाब : पहले सिनेमा में जुम्मा-चुम्मा दिखाना मजबूरी थी, क्योंकि देश में मोदी सरकार नहीं थी। उनके आने के बाद देश का सिनेमा भी बदला है। फिल्मों में दाऊद इब्राहिम और डॉन हाजी मस्तान जैसे गैंगस्टर को ग्लोरिफाई किया जाता था। अकेले दाऊद पर ही 8 फिल्में बना दी गई थी। उन फिल्मों में अंडरवर्ल्ड का पैसा लगता था। देश में जब से सरकार बदली है, लोगों का असल दर्द सामने आने लग गया है। कश्मीर से लेकर केरला और साबरमती तक का दर्द फिल्मों के जरिए फाइलों से बाहर आया है। अब हम ज्ञानवापी का दर्द सामने ला रहे हैं। ये सब दिखाने की हिम्मत बॉलीवुड में आज आई है। अब इसे सेंसर का सर्टिफिकेट भी मिल रहा है। कहीं कोई विरोध भी नहीं है और कोई इन फिल्मों का पोस्टर भी नहीं फाड़ सकता है। सवाल : क्या देश में सत्ता बदलने के साथ ही बॉलीवुड में भी बदलाव आया है? जवाब : सत्ता बदलेगी तो शासन भी बदलेगा और सिनेमा भी बदलेगा। बस ठीक ऐसे ही ये बॉलीवुड भी वही है, लेकिन निजाम बदलने के साथ ही अब बॉलीवुड भी बदल गया है।ऑडियंस तो पहले से ही ये देखना चाह रही थी। मैं समझता हूं, आने वाले टाइम में ऐसे कंटेंट और आएंगे और लोगों तक जाएंगे। सवाल : आप लॉरेंस पर भी सीरीज बना रहे हैं, एक गैंगस्टर को ग्लोरिफाई करने की वजह? जवाब : हम उसे ग्लोरिफाई नहीं कर रहे हैं। ट्रेलर भी आप देखेंगे तो वो सब एक्चुअल है। जो अब तक पब्लिक डोमेन में है, बस उसे ही कहानी में पिरोया जाएगा। उसने जो वारदातें की हैं, वो सब फिल्म में दिखाने वाले हैं। उस पर बाबा सिद्दीकी और सिद्धू मूसेवाला की ह्त्या का आरोप है, तो हम वो दिखा रहे हैं। लॉरेंस जेल में भगत सिंह की तस्वीर लगा कर रहता है, तो हम ये दिखा रहे हैं। सवाल : क्या लॉरेंस के अपराध और उन अपराधों के शिकार लोगों का दर्द भी दिखाएंगे? जवाब : हम सीरीज में ये सब कुछ दिखाएंगे। हम कोई लॉरेंस गैंग के सदस्य नहीं है। न ही हम उससे कोई फंडिंग लेकर फिल्म बना रहे हैं। वो तो पहले से ही ग्लोरिफाई हो रखा है। देश में करोड़ों लोग उसके लिए मुझे कमेंट करते हैं। उसमें सभी जातियों के लोग है। जब इन कमेंट्स को देखता हूं तो हैरान हो जाता हूं। सवाल : लॉरेंस पर फिल्म बनाने की जरूरत ही क्या, जब एनआईए उसे आतंकी मानती है? जवाब : ये कोई पहली बार नहीं हो रहा है, जब किसी गैंगस्टर पर सीरीज बन रही है। श्रीप्रकाश शुक्ला और आनंदपाल पर रंगबाज एक और रंगबाज 2 बनी है। यूपी, बिहार के कई बड़े गैंगस्टरों पर भी फिल्में बनी है। एक चंदन लकड़ी चोर पर बनी फिल्म पुष्पा बॉलीवुड और सिनेमा के सभी रिकॉर्ड तोड़ देती है। वीरप्पन और नाथूराम गोडसे पर भी तो फिल्में बनी। अब तो लादेन पर भी फिल्म बन रही है। हमारा काम फिल्म बनाना है। अब जिसको लॉरेंस बनना है वो लॉरेंस बनेगा, जिसे सिद्धू मूसेवाला बनना है वो मूसेवाला बनेगा। जब प्राण और राज बब्बर फिल्मों में रेप करते थे तो क्या लोग रेपिस्ट बन जाते थे? सुपर कमांडो ध्रुव को देखकर बच्चे सुपर कमांडो ध्रुव थोड़े ही बन गए हैं। ये तो मनोरंजन है। सवाल : मतलब सेंसेटिव मुद्दों पर बनाई जा रही फिल्मों का भी मेन टारगेट पैसा कमाना ही होता है? जवाब : फिल्में पैसा कमाने के लिए ही बनती है। मैंने 20 करोड़ रुपए लगाकर कन्हैयालाल साहू पर फिल्म बनाई है। मैंने ये तय किया है कि इस फिल्म की कमाई का 25 फीसदी हिस्सा तो मैं कन्हैयालाल के परिवार को दूंगा और 5 फीसदी हिस्सा मुक्ति धाम मुकाम और 5 फीसदी हिस्सा सांवरिया सेठ के यहां दूंगा। मेरी इस फिल्म से समाज को पता चलेगा कि बिहाइड दी सीन क्या है ? और क्या जो उन्हें बताया गया वहीं सच है। अखबार और मीडिया की कुछ मर्यादा होती है, लेकिन फिल्मों में सब कुछ दिखाया जा सकता है। सवाल : आपने जेल में बंद लॉरेंस को एक लेटर भी लिखा था, उस पर फिल्म बनाने के लिए, कोई जवाब आया? जवाब : स्क्रिप्ट को लेकर हमें जो जानकारियां चाहिए थी वो तो सब हमें मिल गई है। हमने लेटर उसे भेजा था, लेकिन आज तक जेल से उस लेटर को लेकर न तो कोई स्पीड पोस्ट की पावती मिली और न ही लॉरेंस की तरफ से कोई जवाब वापस आया है। ये स्टोरी 850 पन्नों की बनकर तैयार है। वेब सीरीज में 10 एपिसोड होंगे। नेटफ्लिक्स के साथ हमारी बातचीत चल रही है। लॉरेंस के किरदार में भी एक बहुत बड़े बॉलीवुड स्टार आपको दिखेंगे। बोमन ईरानी, परेश रावल, अनुपम खेर और साउथ के सुपर स्टार दुल्क्वेर सलमान से बात हो गई है। अब बस कन्हैयालाल पर बन रही फिल्म की सफलता पर सब कुछ टिका है। सवाल : आपके पास इन फिल्मों को बनाने की फंडिंग कहां से आ रही है? जवाब : ये मेरी अपनी फंडिंग है। इस फिल्म के लिए मुझे 20 करोड़ की आवश्यकता थी और मेरे पास 5-6 करोड़ रुपए ही थे। मैंने दोस्तों से उधार मांगे तो किसी ने एक लाख और किसी ने 20 लाख रुपए मेरे खाते में डाल दिए। ये सब कुछ ऑनलाइन है और एक भी रुपए मैंने किसी से कैश में नहीं लिया है। मुझे मार्केट में मेरी पहचान से आज भी लोग करोड़ों रुपए देने को तैयार है। मैं मनी लॉन्ड्रिंग का काम नहीं करता हूं।

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