संसद के दोनों सदनों से वक्फ संशोधन बिल 2025 पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- वक्फ संपत्तियों में सालों से गड़बड़ी हो रही थी। इससे खासतौर पर मुस्लिम महिलाओं और गरीबों को नुकसान हुआ। अब यह नया कानून पारदर्शिता बढ़ाएगा। गरीब पसमांदा मुस्लिमों के अधिकारों की रक्षा करेगा। पीएम मोदी ने वक्फ की जिन संपत्तियों में गड़बड़ी का जिक्र किया है, मध्यप्रदेश में इसके सैकड़ों उदाहरण हैं। वक्फ बोर्ड के मुताबिक, एमपी में वक्फ की 90 फीसदी प्रॉपर्टी विवादों में है। ये विवाद अलग-अलग तरह के हैं। वक्फ की कई जमीनों पर कब्जे और अतिक्रमण हैं, तो कई संपत्तियों पर सरकारी दफ्तरों का संचालन हो रहा है। एमपी का पुलिस मुख्यालय और कंट्रोल रूम समेत भोपाल की 47 सरकारी प्रॉपर्टी पर वक्फ बोर्ड दावा जताता है। इनके मामले कोर्ट में चल रहे हैं। साथ ही वक्फ बोर्ड को इन संपत्तियों से जितनी आय होना चाहिए, वो भी नहीं हो रही है। अब नए कानून से वक्फ की विवादित प्रॉपर्टी पर क्या असर पड़ेगा, किस तरह से ये मामले निपटाए जाएंगे, दैनिक भास्कर ने इसे लेकर एक्सपर्ट के साथ वक्फ बोर्ड के मेंबर्स से बात की। पढ़िए, रिपोर्ट… अब सिलसिलेवार जानिए विवादों के बारे में…
विवाद 1: वक्फ की जमीन, अस्पताल से किराया कोई और वसूल रहा
वक्फ की प्रॉपर्टी का कैसे इस्तेमाल हो रहा है, ये समझना है तो इसका सबसे जीवंत उदाहरण है वक्फ बोर्ड के मुख्यालय के पास बना यतीमखाना। इस यतीमखाने का संचालन दारुल शफकत सोसाइटी करती है। सोसाइटी ने पिछले हिस्से में यतीमखाना बनाया है और सामने के हिस्से को निजी- जीवन रेखा अस्पताल को किराए पर दे दिया है। सोसाइटी वक्फ बोर्ड को कोई किराया नहीं देती, लेकिन अस्पताल से 12 से 15 लाख रुपए सालाना किराया वसूल करती है। इतना ही नहीं, सोसाइटी ने पूरी प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक का भी दावा किया था। वक्फ बोर्ड की तरफ से कोर्ट में केस दायर किया गया। कई सालों तक मामला कोर्ट में चला और फैसला वक्फ बोर्ड के पक्ष में आया। मालिकाना हक वक्फ बोर्ड का, कब्जा सोसाइटी का
वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सनवर पटेल कहते हैं कि यतीमखाना से बोर्ड कोई किराया नहीं लेता। मगर, यतीमखाना का संचालन करने वाली सोसाइटी हर साल इज्तिमा बाजार के किराए से 1.5 करोड़ रुपए सालाना कमाती है। अस्पताल से हर साल सोसाइटी को 15 लाख रुपए किराया मिलता है। पटेल कहते हैं- वक्फ बोर्ड की संपत्ति के हो रहे दुरुपयोग की शिकायत सीएमएचओ और जिला प्रशासन को की गई थी। इसके बाद सीएमएचओ ने इसी साल 28 जनवरी को एक नोटिस जारी करते हुए तीन दिन में जवाब देने के लिए कहा था। भास्कर ने इस मामले में जब जीवन रेखा अस्पताल प्रबंधन से बात की तो उन्होंने कहा कि ये उनका मामला नहीं है। विवाद 2: PHQ वक्फ प्रॉपर्टी, सरकार ने हाईकोर्ट में की अपील
दूसरा सबसे अहम केस मध्यप्रदेश के पुलिस मुख्यालय से जुड़ा है। साल 2007 में वक्फ बोर्ड के अधीन काम करने वाली संस्था मुतावल्ली कमेटी इंतेजामिया औकाफ-ए-आम्मा ने वक्फ ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर जायदाद का मालिकाना हक दिलाने की मांग की थी। इस मामले में मध्यप्रदेश सरकार, गृह सचिव, डीजीपी और नगर निगम को पार्टी बनाया गया था। औकाफ-ए-आम्मा की तरफ से वादी मोहम्मद रफी और मोहम्मद सलीम ने प्राधिकरण को बताया कि जिस जमीन पर पुलिस मुख्यालय बना है, वह कब्रिस्तान की भूमि है। यह वक्फ बोर्ड द्वारा संधारित पंजी में क्रमांक 928 और सिटी सर्वे नंबर 1462 में दर्ज है। वर्ष 1994-95 के खसरा के कॉलम नंबर 3 में भी इसे कब्रिस्तान दर्शाया गया है। ट्रिब्यूनल के आदेश पर मप्र वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जांच भी की थी। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ट्रिब्यूनल ने पीएचक्यू को वक्फ संपत्ति घोषित करते हुए कहा कि ये कब्रिस्तान की जमीन पर बना है, जो अतिक्रमण की श्रेणी में आता है। ट्रिब्यूनल ने सरकार और पुलिस विभाग पर 2007 से 2015 तक हर महीने 1 लाख 18 हजार रुपए की दर से 1 करोड़ 13 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। जहांगीर मोहम्मद खां की कब्र पुलिस मुख्यालय में
ट्रिब्यूनल के इस फैसले के खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की है। केस का स्टेटस जानने के लिए भास्कर ने वक्फ बोर्ड के सीईओ से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस मसले पर कोई बात नहीं की। ट्रिब्यूनल ने जिस भूमि को वक्फ बोर्ड की जायदाद घोषित किया है, वह कब्रिस्तान फौजियान के रूप में जानी जाती है। नवाबी काल में इस कब्रिस्तान में फौजियों को दफनाया जाता था। वहीं, भोपाल के नवाबों पर रिसर्च कर चुके एडवोकेट शाहनवाज खान कहते हैं कि जहांगीर मोहम्मद खां की कब्र पुलिस मुख्यालय में है। इसके अलावा भी ऐसे कई प्रमाण हैं, जो ये साबित करते हैं कि ये वक्फ की संपत्ति है। सैफिया कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर अशहर किदवई कहते हैं कि भोपाल नवाब ने जब जहांगीराबाद बसाया तो यहां खेती के लिए नूर बाग भी बनाया था। ऐसा कहा जाता है कि पुलिस मुख्यालय वाला हिस्सा नूरबाग में शामिल रहा है। इसके पक्ष में वे तर्क देते हैं कि छोटे तालाब से इस नूर बाग में पानी सप्लाई होता था। किदवई भी दोहराते हैं कि यहां जहांगीर मोहम्मद के अलावा नवाब परिवार के अलग-अलग सदस्यों की कब्र बनी हुई है। विवाद 3: वक्फ के 2 हजार किरायेदार 100 रुपए भी किराया नहीं देते
भोपाल में वक्फ बोर्ड की 797 प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड हैं। जहांगीराबाद, बाग मुंंशी हुसैन खां, बाग फरहत अफजा सहित भोपाल के कई हिस्सों में वक्फ की प्रॉपर्टी है। इनकी देखभाल का जिम्मा औकाफ-ए-आम्मा का है। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सनवर पटेल कहते हैं कि औकाफ-ए-आम्मा के भोपाल में 4 हजार किराएदार हैं। इसमें 2 हजार किराएदार ऐसे हैं, जो 100 रुपए से भी कम किराया देते हैं। यदि किराया बढ़ाने की बात करो तो कानूनी कार्रवाई के लिए कोर्ट पहुंच जाते हैं। विवाद 4: प्रॉपर्टी पर अवैध कब्जा
सरवर पटेल कहते हैं कि भोपाल में प्लेटफॉर्म नंबर-1 की तरफ सराय के रूप में वक्फ बोर्ड की बड़ी प्रॉपर्टी है। इस पर कुछ निजी लोगों का कब्जा है। इससे बोर्ड को कोई इनकम नहीं होती। भोपाल टॉकीज के पास बड़ा बाग कब्रिस्तान की जमीन पर बनी दुकानों से बोर्ड को एक रुपए भी किराया नहीं मिल रहा है जबकि इन दुकानों का किराया लाखों रुपए में है। पटेल कहते हैं कि मॉडल ग्राउंड स्टेशन रोड पर वक्फ बोर्ड की 15 दुकानें हैं, यहां से भी कोई किराया नहीं मिल रहा है, लोगों ने दादागिरी कर कब्जा कर रखा है। भोपाल के कांग्रेस नेता रियाज खान पर 7.11 करोड़ रुपए की रिकवरी निकाली गई, क्योंकि उन्होंने वक्फ में 15 दुकानें बताईं, जबकि जांच में 115 दुकानें पाई गईं। इसी तरह सागर के बीना में कांग्रेस नेता इकबाल खान पर 1.84 करोड़ और भोपाल के नईम खान पर सवा करोड़ रुपए की रिकवरी जारी हुई है। धार जिले में कल्लू शाह ने वक्फ की 25 एकड़ जमीन का नामांतरण अपने नाम कराने की कोशिश की। कलेक्टर ने इससे इनकार किया तो उन्होंने कलेक्टर के खिलाफ अवमानना का केस कर दिया। दूसरे जिलों में भी वक्फ की प्रॉपर्टी पर विवाद… शाजापुर में वक्फ की 4 हजार एकड़ जमीन, विवाद के 16 मामले
शाजापुर में वक्फ बोर्ड की सबसे ज्यादा संपत्तियां हैं। कालापीपल विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने इसी बजट सत्र में वक्फ की प्रॉपर्टी के विवाद को लेकर सवाल पूछा था। इसके जवाब में राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि शाजापुर में 1990 में 1107 वक्फ एस्टेट थे, अब ये बढ़कर 1115 हो गए हैं। ये जो आठ संपत्तियां बढ़ी हैं, उनमें से 5 निजी भूमि पर हैं और तीन सरकारी जमीन पर है। साथ ही ये भी बताया कि जमीनों से जुड़े 11 विवादों के मामले ट्रिब्यूनल और अतिक्रमण के पांच मामले वक्फ बोर्ड न्यायालय में लंबित हैं। अब समझते हैं वक्फ कानून में संशोधन से क्या बदलेगा
वक्फ संशोधन बिल लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गया है। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सनवर पटेल कहते हैं कि बोर्ड की जमीनों के जो विवाद हैं, वो तीन लेवल पर निपटाए जाएंगे। ट्रिब्यूनल और कोर्ट केस का क्या होगा
वक्फ बोर्ड की लीगल टीम का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन नहीं आ जाती, तब तक इस पर स्थिति साफ नहीं होगी। हालांकि, वक्फ से जुड़े मामलों की पैरवी करने वाले एडवोकेट जगदीश छावानी कहते हैं कि कुछ प्रमुख बदलाव होंगे। जैसे- मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… वक्फ संशोधन बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी, कानून बना राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ (संशोधन) बिल को शनिवार देर शाम मंजूरी दे दी। सरकार ने नए कानून को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया। अब नए कानून को लागू करने की तारीख को लेकर केंद्र सरकार अलग से एक नोटिफिकेशन जारी करेगी। इस बिल (अब कानून) पर 2 और 3 अप्रैल को लोकसभा-राज्यसभा में 12-12 घंटे की चर्चा के बाद पास हुआ था। पढ़ें पूरी खबर…


