कम पानी पीने से बढ़ता है किडनी स्टोन का रिस्क:आयुर्वेदिक काढ़े पर रिसर्च… दर्द और जलन से राहत, पथरी का आकार भी हुआ आधा

पेशाब में जलन, कमर और पेट के निचले हिस्से में असहनीय दर्द, बार-बार यूरिन की समस्या और अचानक खून आना, ये लक्षण किडनी स्टोन यानी पथरी से जूझ रहे मरीज को झेलने पड़ते हैं। मॉडर्न मेडिसिन में इसका स्थायी इलाज सर्जरी माना जाता है, लेकिन भोपाल के आयुर्वेद संस्थान में हुए एक नए रिसर्च ने इस सोच को चुनौती दी है। आयुर्वेद के अनुसार श्वद्रंष्ट्रादि क्वाथ (आयुर्वेदिक काढ़ा) में मौजूद औषधियां यूरिन ट्रैक की सूजन कम करने वाली और पथरी तोड़ने में सहायक मानी जाती हैं। यही कारण था कि इसके वैज्ञानिक प्रमाण के लिए एक अध्ययन भोपाल स्थित पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में किया गया। संस्थान में हुए अध्ययन में श्वद्रंष्ट्रादि क्वाथ 90 दिन तक किडनी स्टोन से ग्रसित 40 मरीजों को दिया गया। इस शोध में न सिर्फ मरीजों के दर्द और जलन में राहत देखी गई, बल्कि पथरी के आकार में भी कमी आई। यह रिसर्च बिना सर्जरी आयुर्वेदिक उपचार से किडनी स्टोन मैनेजमेंट का रास्ता दिखाती है। इसकी वजह है कि 73% मरीजों में सुधार देखा गया, जबकि किसी भी मरीज से हालत बिगड़ने की शिकायत नहीं आई। दिन में दो बार पीना होगा काढ़ा
रिसर्च में शामिल 40 मरीजों को श्वद्रंष्ट्रादि क्वाथ दिया गया। इन्हें खुराक के रूप में 30 मिली काढ़े को दिन में दो बार दिया गया। यह प्रक्रिया 90 दिन तक जारी रही। इस दौरान साथ में गुनगुना पानी और आयुर्वेदिक आहार नियमों का पालन भी करना अनिवार्य था। केस वन: 4 एमएम की थी पथरी, 3 माह बाद डेढ़ एमएम बची
सीधी जिले की 42 वर्षीय अंबिका मिश्रा लंबे समय से किडनी में स्टोन की समस्या से परेशान थी। अचानक उठने वाले दर्द के कारण कई बार वो दो से तीन पेन किलर की गोलियां तक खा लेती थीं। स्थानीय डॉक्टरों ने उन्हें ज्यादा पेन किलर ना खाने और सर्जरी कराने की सलाह दी थी। वे भोपाल आईं और पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान के विशेषज्ञों की सलाह पर श्वद्रंष्ट्रादि क्वाथ (आयुर्वेदिक काढ़ा) नियमित रूप से सुबह और शाम पीना शुरू किया। तीन माह बाद उनकी दर्द की समस्या पूरी तरह खत्म हो गई थी। जांच में पथरी का साइज भी डेढ़ एमएम के करीब आया। केस 2: दर्द से मिला आराम, दिल्ली लौटे
भोपाल के 32 वर्षीय वेब डेवलपर राहुल जैन मल्टीनेशनल कंपनी में टीम लीड की पोजिशन पर काम करते हैं। उनकी दिल्ली में हेड ऑफिस में पोस्टिंग है। राहुल को बीते साल जून माह में अचानक पथरी का दर्द उठा। जांच कराई तो किडनी में 5 एमएम का स्टोन होने की बात सामने आई। वे भोपाल आए और पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान में इलाज कराया। उन्हें श्वद्रंष्ट्रादि क्वाथ दिया गया था। जिसके रिजल्ट बेहतर आए और तीन माह बाद दिल्ली लौट गए। मूताश्मरी आयुर्वेद में एक गंभीर रोग आयुर्वेद में किडनी स्टोन को मूताश्मरी कहा जाता है। यह बीमारी किडनी, यूरिन ट्रैक और मूत्राशय में पथरी बनने से जुड़ी है। सुश्रुत संहिता में इसे गंभीर रोगों की श्रेणी में रखा गया है। जिसमें इसे “महागद” कहा गया है। यही नहीं, लंबे समय तक किडनी में स्टोन पर गंभीर नुकसान हो सकते हैं। कई मामलों में यह किडनी फैलियर तक का कारण बन सकता है। अब बड़े स्तर पर रिसर्च की तैयारी
यह रिसर्च पत्र Journal of Ayurveda and Integrated Medical Sciences में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं ने कहा कि बड़े स्तर पर और अधिक मरीजों पर अध्ययन किए जाने की जरूरत है। इस दिशा में संस्थान जल्द काम शुरू करने जा रहा है। पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद संस्थान के प्रिंसिपल डॉ. उमेश शुक्ला के अनुसार यह शोध बताता है कि सही आहार, जीवनशैली और आयुर्वेदिक उपचार के जरिए किडनी स्टोन जैसी समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। यह खबर भी पढ़ें… भोपाल के पं. खुशीलाल आयुर्वेद कॉलेज का अनूठा प्रयास भोपाल के पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय ने शुक्रवार को मीडिया टूर में मुख्य रूप से दो प्रोजेक्ट्स की सफलता के बारे में बताया है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. उमेश शुक्ला ने कहा कि यह प्रोजेक्ट्स न सिर्फ नई पीढ़ी को पुराने आयुर्वेदिक ज्ञान से जोड़ रहे हैं, बल्कि गर्भवती महिलाओं और उनके होने वाले बच्चों को भी सेहतमंद बनाने में योगदान दे रहे हैं।पूरी खबर पढ़ें

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