पर्यटक नगरी मांडू में पहुंचने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इसकी मुख्य वजह है कि यहां पुरातत्व विभाग के संरक्षण में 61 स्मारक हैं। लेकिन गाइड सिर्फ 10 स्मारक ही दिखाते हैं। पुरातत्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार दस साल पहले मांडू का दीदार करने के लिए 3 हजार से ज्यादा विदेशी सैलानी पहुंचते थे। लेकिन अब ये संख्या एक हजार से भी कम हो गई है। वहीं यहां मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है। स्थानीय लोगों की माने तो पूरा पर्यटन स्थल 48 किमी के दायरे में फैला है। लेकिन गाइड केवल तीन से चार किमी के एरिया में बने स्मारकों को ही दिखाते हैं। इसमें केवल जहाज महल, रानी रुपमति महल और जामा मस्जिद शामिल है। जबकि पूरे 48 किमी के एरिया में 500 से ज्यादा ऐसे छोटे-बड़े स्मारक और दर्शनीय स्थल है। जिन्हें गाइड नहीं दिखाते। ये स्थान नहीं दिखाते गाइड स्थानीय लोगों ने बताया बूढ़ी मांडव ऐसा स्थान है, जहां पर कई दुर्लभ मूर्तियां रखी हैं। चतुर्भुज राम मंदिर, ये ऐसा मंदिर है जहां पर भगवान राम के चार भुजा वाली प्रतिमा है। यहां खुदाई में पूरी वानर सेना निकली थी। जिनकी मूर्तियां यहां रखी हैं। नीलकंठ महादेव मंदिर, ये खाई में बना है और प्राकृतिक रूप से यहां पूरे साल शिव का अभिषेक होता है। सात कोठरी, यहां दो कुंड हैं, एक में गर्म व एक में ठंडा पानी होता है। इसमें से होकर ही भोलेनाथ के मंदिर तक पहुंचते हैं। देसी पर्यटकों की संख्या में नहीं आई कमी मांडू में विदेशी पर्यटकों की संख्या जरूर कम हो रही है। लेकिन देसी पर्यटकों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। अभी हर साल 3 लाख से ज्यादा पर्यटक मांडू का दीदार करने के लिए पहुंच रहे है। हालांकि ये संख्या दस साल पहले भी थी और अब भी है। पिछले दस साल में 34.65 लाख देसी व 14871 विदेशी पर्यटक मांडू पहुंचे हैं।


