करनाल में एक परिवार से विदेश भेजने के नाम पर बड़ी रकम लेने, सालों तक प्रक्रिया लटकाने और बाद में पैसे वापस मांगने पर झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देने का मामला सामने आया है। शिकायत में बताया गया कि पहले रकम ली गई, फिर कुछ समय बाद वापस की गई, लेकिन दोबारा संपर्क कर फिर से पैसा लेकर वीजा नहीं लगवाया गया। लगातार टालमटोल के बाद फोन बंद कर दिए गए, जिससे परिवार को पुलिस के पास जाना पड़ा। 2017 में फैमिली पीआर के लिए हुआ था एग्रीमेंट
गांव झंझाड़ी की महिला सविता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 26 जनवरी 2017 को करनाल के सेक्टर-13, मेन मार्केट स्थित बी. जी. इमिग्रेशन के मालिक जतिन मलिक से ऑस्ट्रेलिया फैमिली पीआर के लिए लिखित एग्रीमेंट किया गया था। कुल राशि 15 लाख रुपए तय हुई थी, जिसमें से 10 लाख रुपए चेक से और 5 लाख रुपए नकद दिए गए। शर्त यह थी कि 10 महीने के भीतर फैमिली पीआर करवा दी जाएगी। 2020 तक वीजा नहीं, फिर कोरोना का बहाना
शिकायत के अनुसार तय समय में वीजा नहीं लगा और साल 2020 तक अलग-अलग बहाने बनाकर टालता रहा। इसी दौरान कोरोना के कारण लॉकडाउन लग गया। इसके बाद साल 2020 में आरोपी ने अलग-अलग तारीखों में पूरे 15 लाख रुपए वापस लौटा दिए। 2022 में दोबारा संपर्क कर फिर लिए 15 लाख
शिकायत में बताया गया कि साल 2022 में लॉकडाउन खत्म होने के बाद आरोपी ने फिर से संपर्क किया और कहा कि अब वीजा लगवा देगा। इसके बाद 5-5 लाख रुपए के तीन चेक दिए गए, जाे अलग अलग तारीखों के थे। पुलिस वेरिफिकेशन और मेडिकल भी कराए गए
साल 2022 में आरोपी के कहने पर दोबारा पुलिस वेरिफिकेशन कराकर कागजात दिए गए। इसके बाद साल 2023 में पूरे परिवार का मेडिकल कराने को कहा गया, जो कराकर उसे सौंप दिया गया। इसके बावजूद वीजा को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई और हर बार नई वजह बताकर टालता रहा। पटियाला ऑफिस जाकर भी नहीं मिला समाधान
साल 2024 में आरोपी ने फोन उठाने बंद कर दिए। इसके बाद कुलदीप वर्मा खुद पटियाला स्थित बी. जी. इमिग्रेशन, एसएसटी नगर, एससीओ नंबर 9 के ऑफिस पहुंचे और पैसे वापस मांगे, लेकिन वहां भी बहाने बनाकर टाल दिया गया। पटियाला कोर्ट में झूठा केस, पैसे मांगने पर धमकी
शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने पटियाला की अदालत में सविता के खिलाफ एक केस दर्ज कराया, जिसमें उसने यह माना कि विदेश भेजने के नाम पर 15 लाख रुपए लिए गए हैं। इसके बावजूद बातचीत चलती रही और आरोपी पैसे लौटाने का आश्वासन देता रहा। बाद में पैसे मांगने पर झूठे मामलों में फंसाने और राजनीतिक व प्रशासनिक पहुंच होने की धमकी दी गई। दिसंबर 2025 में नंबर ब्लैकलिस्ट, फिर पहुंची शिकायत पुलिस तक
दिसंबर 2025 में जब फिर से पैसे मांगे गए तो मोबाइल नंबर ब्लैकलिस्ट कर दिए गए। इसके बाद बैंक स्टेटमेंट और व्हाट्सऐप चैट की प्रतियों के साथ पुलिस अधीक्षक करनाल को शिकायत दी गई। शिकायत थाना सिविल लाइन करनाल पहुंची, जहां एफआईआर 12 जनवरी दर्ज की गई और जांच उप निरीक्षक राजेश कुमार को सौंपी गई। पुलिस कर रही जांच, रकम की रिकवरी की मांग
पुलिस का कहना है कि मामले में सभी दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं और जांच जारी है। शिकायतकर्ता परिवार ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरे 15 लाख रुपए वापस दिलवाने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


