करोड़पति भिखारी बोला- भीख नहीं मांगता, ब्याज से कमाता हूं:भास्कर के कैमरे पर दावा- ब्याज पर पैसे देकर बनाई संपत्ति; असली नाम बताया महाकाल

रात को सराफा जाता हूं, लेकिन भीख मांगने नहीं, बल्कि उन लोगों से पैसे वसूलने जिन्हें उधार दिया है। मैं घिसटकर चलने वाली गाड़ी पर बैठता हूं। इस दौरान कई लोग मेरी हालत देखकर तरस खाते हैं और मेरी जेब में पैसा रख देते हैं। मना करता हूं, वे नहीं मानते। ये कहना है मांगीलाल का जो इंदौर महिला बाल विकास विभाग की टीम को 17 जनवरी को सराफा बाजार में भीख मांगते हुए मिला था। अफसरों ने जब उससे पूछताछ की तो पता चला कि उसके इंदौर में तीन मकान हैं। वह एक कार और तीन ऑटो का भी मालिक है। अफसरों ने ये भी दावा किया था कि ये सारी संपत्ति उसने भीख मांगकर ही बनाई है। भास्कर ने जब मांगीलाल से बात की तो उसने कहा कि लोगों को ब्याज पर पैसा देकर उसने ये सारी कमाई की है। उसने भास्कर के साथ अपना बिजनेस मॉडल भी साझा किया। ये भी बताया कि उसका असली नाम तो महाकाल है, लेकिन हर वक्त पैसे मांगने की आदत की वजह से दोस्तों ने उसका नाम मांगीलाल रख दिया। फिलहाल, मांगीलाल ने संपत्ति कैसे बनाई? प्रशासन इसकी जांच कर रहा है। उसे उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में ही रखा गया है। भास्कर ने यहां पहुंचकर मांगीलाल से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… मैं भीख नहीं मांगता, लोग तरस खाकर पैसे देते हैं
सेवाधाम आश्रम में जब भास्कर की टीम ने मांगीलाल से बात की, तो उसने प्रशासन के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उसने कहा, मैं भीख नहीं मांगता। मेरा असली नाम तो महाकाल है। 1956 में जब उज्जैन में सिंहस्थ का मेला लगा था, तब मेरे पिताजी यहां आए थे और मेरा जन्म हुआ, इसीलिए मेरा नाम महाकाल रखा गया। दोस्त मुझे मांगीलाल कहने लगे। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि मैं सबसे पैसे मांगता रहता हूं, इसलिए मेरा नाम मांगीलाल पड़ गया। मांगीलाल से पूछा कि वो भीख मांगते पकड़े गए तो उसने कहा- तीन घर हैं, जिनमें से एक सरकार ने दिया है। एक कार और तीन ऑटो हैं, जो मैं किराए पर चलाता हूं। रात 10 बजे के बाद मैं सराफा बाजार जाता हूं, लेकिन भीख मांगने नहीं, बल्कि उन लोगों से पैसे वसूलने जिन्हें मैंने उधार दिया है। मेरी तीन पहियों वाली गाड़ी बाजार के अंदर नहीं जा सकती, इसलिए मैं अपनी कार से वहां तक जाता हूं और फिर घिसटकर चलने वाली गाड़ी पर बैठकर अपने कर्जदारों तक पहुंचता हूं। खरगोन से इंदौर तक का सफर और व्यापार की शुरुआत
मूल रूप से खरगोन का रहने वाला मांगीलाल महज 12 साल की उम्र में इंदौर आ गया था। शुरुआत में उसने व्यापारियों के यहां बारदान (जूट की बोरियां) पहुंचाने का काम किया, जिससे उसे दलाली के कुछ पैसे मिल जाते थे। उसकी शारीरिक स्थिति को देखकर लोग उसे शुरू से ही पैसे दे देते थे। यहीं से मांगीलाल ने लोगों की सहानुभूति को अपने व्यापार का एक हिस्सा बना लिया। कुछ समय पहले जब तत्कालीन कलेक्टर ने इंदौर में भिक्षावृत्ति पर प्रतिबंध लगाया, तब भी मांगीलाल का काम चलता रहा। वह दावा करता है कि उसने कभी सीधे तौर पर भीख नहीं मांगी, लेकिन यह स्वीकार करता है कि उसकी हालत देखकर लोग खुद ही उसकी मदद कर देते थे। मांगीलाल का पैसे कमाने का बिजनेस मॉडल
मांगीलाल बताता है कि उसकी कमाई के कई सारे सोर्स हैं। इससे वो 50 से 60 हजार रुपए महीना कमाता है। खर्चे ज्यादा नहीं हैं तो पैसा बच जाता है, जिसे वह ब्याज पर देता है। साथ ही उसके पास एक कार और तीन ऑटो-रिक्शा हैं। वह हर ऑटो को 300 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से किराए पर देता है, जिससे उसे महीने के लगभग 27,000 रुपए मिलते हैं। कार को भी बुकिंग पर किराए पर चलाकर भी अच्छी खासी कमाई हो जाती है। मांगीलाल कहता है कि मैं एक छोटे ट्रैवल एजेंट के रूप में भी काम करता हूं। जब किसी को वाहन की आवश्यकता होती है, तो कमीशन पर वाहन भी देता हूं। शहर के एक मकान को मैंने किराए पर दिया है जिससे हर महीने 16 से 18 हजार रुपए की आय होती है। मेरा सबसे बड़ा कारोबार ब्याज पर पैसा देना है। मैंने बाजार में करीब 4 लाख रुपए उधार दिए हैं। मैं बड़े कर्ज देने की बजाय, उन गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करता हूं जो मुझसे सुबह पैसा लेते हैं और शाम को मूलधन और ब्याज समेत लौटा देते हैं। जैसे किसी को राजवाड़ा में रुमाल, चश्मे और गमछे की दुकान लगानी है तो मैं उन्हें 1 हजार से 2 हजार रुपए जैसी छोटी रकम उधार देता हूं। 100 साल की मां, बेटी से नाता टूटा
मांगीलाल की बेटी भी है, लेकिन वह उसे पिता नहीं मानती। मांगीलाल के मुताबिक मेरी बहुत पहले शादी हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद ही पत्नी छोड़कर चली गई। उसने दूसरी शादी कर ली। मेरी बेटी की भी शादी हो चुकी है, लेकिन वह मुझे अपना पिता नहीं मानती। मैंने बेटी को वापस लाने की कोशिश की, पंचायत में पैसे भी खर्च किए, लेकिन उसने साफ कह दिया, ‘मैं तुम्हें अपना पिता नहीं मानती।’ अब मैंने भी उम्मीद छोड़ दी है। मांगीलाल बताता है कि घर पर मां है, जिसकी उम्र करीब 100 साल है। एक भतीजा भी साथ रहता है, जो दोनों के लिए खाना बनाता है और उनकी देखरेख करता है। न मुझसे खाना बनता है, न मां से। भतीजा ही सब कुछ संभालता है। संपत्ति दान कर दूंगा, लड़कियों की शादी कराऊंगा
मांगीलाल अपनी संपत्ति को लेकर भविष्य की योजनाएं भी बताता है। वह कहता है, “मेरे आगे-पीछे तो कोई है नहीं। मैं चाहता हूं कि पैसों की कमी से किसी की पढ़ाई न रुके। वह दावा करता है कि वह अपनी पहचान की कुछ जरूरतमंद लड़कियों की पढ़ाई का खर्च उठाता है। अभी उनकी फीस जमा करनी थी, तो मैंने करवा दी। अफसर कह रहे हैं कि मेरे पास करोड़ों की संपत्ति है, लेकिन ऐसा नहीं है। जितनी भी है, मैं उसे आश्रम में दान कर दूंगा, ताकि गरीब लड़कियों की शादी हो सके और वे अपना जीवन सम्मान से जी सकें। प्रशासन की डेढ़ महीने की निगरानी
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को मांगीलाल के बारे में काफी समय से जानकारी मिल रही थी। रेस्क्यू नोडल ऑफिसर दिनेश मिश्रा के नेतृत्व में एक टीम पिछले डेढ़ महीने से उस पर नजर रख रही थी, लेकिन मांगीलाल केवल रात में ही सराफा बाजार में सक्रिय होता था, जिससे उसे पकड़ना मुश्किल हो रहा था। टीम ने अपनी रणनीति बदली और रात में उस पर ध्यान केंद्रित किया। 17 जनवरी की रात, मांगीलाल अपनी कार से उतरा और अपनी घिसटने वाली गाड़ी पर बैठकर बाजार में निकला। अधिकारियों ने उस पर नजर रखी। जैसे ही कुछ लोगों ने उसे पैसे दिए, टीम ने उसे पकड़कर गाड़ी में बैठा लिया। दिनेश मिश्रा ने बताया, “अभी जांच चल रही है। फिलहाल तीन मकान, एक कार और तीन ऑटो की जानकारी सामने आई है। हम यह पता लगा रहे हैं कि उसने यह संपत्ति कैसे बनाई? ये खबर भी पढ़ें… अपनी कार से इंदौर के सराफा जाता था करोड़पति भिखारी इंदौर का करोड़पति भिखारी मांगीलाल दिन के उजाले में नहीं, बल्कि रात के अंधेरे में सराफा बाजार में सक्रिय होता था। यहां वह कार से जाता और भीख मांगने के साथ ब्याज वसूली का काम करता था। अब तक की जांच में सामने आया है कि मांगीलाल ने दिहाड़ी व्यापारियों, ठेले वालों और जरूरतमंद दुकानदारों को तीन से चार लाख रुपए ब्याज पर दे रखे थे। पढ़ें पूरी खबर…

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