करौली में नगर परिषद की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन पर एकतरफा और चुनिंदा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कानून के समान पालन और किसी एक व्यक्ति को निशाना न बनाने की मांग की है। यह विरोध नगर परिषद करौली द्वारा पूर्व सभापति के बेटे अमीनुद्दीन खान के व्यावसायिक परिसर को सीज करने और संभावित तोड़फोड़ की कार्रवाई के अंदेशे को लेकर है। अमीनुद्दीन पर नव संवत्सर रैली पर पथराव और दंगे का आरोप है। उनकी संपत्ति अंबेडकर सर्किल, भट्टावस्ती, लवे रोड पर स्थित है, जिसे नगर परिषद ने 12 जनवरी 2026 को सीज किया था। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर परिषद क्षेत्र में कम से कम 38 ऐसी संपत्तियां रिकॉर्ड में दर्ज हैं, जिन पर पैनल्टी लगने के बावजूद आज तक न तो सीज के बाद कोई अग्रिम कार्रवाई की गई और न ही तोड़फोड़। कई मामलों में दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन उन पर समान नियम लागू नहीं किए गए। आंदोलन की दी चेतावनी
करौली के पूर्व विधायक लखन सिंह मीणा ने कहा कि अमीनुद्दीन की न्यायिक अभिरक्षा समाप्त होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, उससे पहले एक ही व्यक्ति के खिलाफ राजनीतिक दबाव में की जा रही कार्रवाई कानून के सिद्धांतों के विपरीत है। कांग्रेस नेताओं ने इस प्रकार की एकतरफा कार्रवाई पर आंदोलन की चेतावनी दी है। इस दौरान कांग्रेस जिला अध्यक्ष और टोडाभीम विधायक घनश्याम महर, करौली के पूर्व विधायक लाखन सिंह मीणा, सुनील कुमार सैनी सहित कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। उन्होंने मांग की कि पहले रिकॉर्ड में दर्ज सभी 38 संपत्तियों पर समान रूप से कार्रवाई की जाए। इसके बाद ही अमीनुद्दीन के मामले में कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाए, ताकि कानून का राज स्थापित हो सके।


