करौली में शिक्षकों का फूटा आक्रोश:सरकारी कॉलेजों में संविदा भर्ती रोकने की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (उच्च शिक्षा) की राजकीय महाविद्यालय इकाई ने Raj-CES महाविद्यालयों में संविदा नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। महासंघ ने मुख्यमंत्री के नाम करौली में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस योजना को उच्च शिक्षा के लिए गंभीर और दूरगामी नुकसानदायक बताया है। महासंघ के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में कहा कि Raj-CES योजना के तहत संचालित महाविद्यालयों में स्थायी अकादमिक ढांचे का अभाव है। पर्याप्त अधोसंरचना, संसाधनों की कमी तथा शोध और नवाचार की सीमित संभावनाओं के कारण यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप नहीं है। गुणवत्ता पर असर का आरोप
संगठन ने आशंका जताई है कि संविदा और अस्थायी नियुक्तियों पर आधारित अध्यापन व्यवस्था से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, अकादमिक निरंतरता और बहुविषयक विकास प्रभावित होगा। ज्ञापन के अनुसार, सत्र 2020-21 से 2022-23 के बीच पूर्ववर्ती सरकार ने 303 नए Raj-CES कॉलेज घोषित किए थे। वहीं वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सत्र 2023-24 और 2024-25 तक 71 अतिरिक्त महाविद्यालयों की घोषणा के साथ इनकी कुल संख्या 374 हो चुकी है। इनमें से करीब 260 महाविद्यालय ऐसे हैं, जहां एक भी स्थायी संकाय सदस्य कार्यरत नहीं है। आंदोलन की दी चेतावनी
महासंघ ने आरोप लगाया कि Raj-CES नियम-2023 में संशोधन के बाद 5 साल के लिए फिक्स्ड पे पर संविदा नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। भर्ती परीक्षा कैलेंडर-2026 के क्रमांक 41 के तहत टीचिंग एसोसिएट और अशैक्षणिक संवर्गों की चयन प्रक्रिया को नीति-विरोधी बताते हुए इसे तुरंत रोकने की मांग की गई है। महासंघ की प्रमुख मांगों में सोडाणी समिति की सिफारिशों को सार्वजनिक कर उन्हें लागू करना, सभी Raj-CES महाविद्यालयों को सामान्य राजकीय महाविद्यालयों के रूप में संचालित करना और अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को भेजी गई अभ्यर्थनाओं को निरस्त करना शामिल है।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन लोकतांत्रिक और आंदोलनात्मक रास्ता अपनाने को बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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